तीसरी लहर का द्वार:अस्पतालों के गेट से कोरोना प्रोटोकॉल ध्वस्त, डॉक्टर ही भीड़ लगाकर देख रहे हैं मरीजों को

रायपुर7 महीने पहले
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अंबेडकर अस्पताल में पर्ची बनवाने ही लग जाती है इतनी भीड़। - Dainik Bhaskar
अंबेडकर अस्पताल में पर्ची बनवाने ही लग जाती है इतनी भीड़।

नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के साथ तीसरी लहर का खतरा बढ़ा है, एहतियात की बात की जा रही है लेकिन इसकी सबसे ज्यादा धज्जियां राजधानी के बड़े अस्पतालों में ही उड़ रही हैं। भास्कर टीम ने राजधानी के चार प्रमुख सरकारी अस्पतालों की पड़ताल में पाया कि सभी जगह कोरोना प्रोटोकाॅल का उल्लंघन इनके प्रवेश द्वार से ही शुरू हो रहा है।

ओमिक्रॉन के साथ राजधानी में जगह-जगह कोरोना नियमों का पालन फिर शुरू हुआ है, लेकिन अस्पतालों में हालात उसी तरह के हैं, जैसे कोरोना आने से पहले तक थे। इन अस्पतालों के द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था बंद कर दी गई है। यही नहीं, सैनिटाइजर जैसे बंदोबस्त खत्म हो चुके हैं। ओपीडी के लिए जिस काउंटर से पर्ची बन रही है, वहां भीड़ और मारामारी का आलम है।

लाइन में लगनेवालों के बीच न तो सुरक्षित दूरी है, और न ही सभी मास्क में हैं। ओपीडी में एक-दो जगह खुद डाक्टर भी झुंड लगाकर मरीजों का इलाज करते देखे जा रहे हैं।

4 बड़े सरकारी अस्पतालों डॉ. अंबेडकर, डीकेएस, चाइल्ड एंड मैटरनिटी और जिला अस्पताल में हैरान करने वाली सच्चाई

1.डॉ. अंबेडकर अस्पताल

ओपीडी पर्ची के लिए भीड़ और लंबी लाइन, मरीज के बेड पर डॉक्टरों का झुंड

भास्कर टीम जैसे ही अंबेडकर अस्पताल में ओपीडी गेट से दाखिल हुई, दाहिने हाथ पर कतारनुमा भीड़ नजर आई। सारे लोग ओपीडी में इलाज के लिए पर्ची बनवाने लाइन में थे और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ मची थी। ज्यादातर लोग एक-दूसरे से सटे हुए थे और कई बिना मास्क के नजर आए। यहां से टीम पीडियाट्रिक वार्ड में पहुंची तो सुबह के राउंड के दौरान करीब एक दर्जन डॉक्टरों की टीम मरीज के बेड के आसपास झुंड बनाकर उसका हालचाल लेती नजर आई। बेड पर मरीज एक किनार था, शेष में उसके इलाज की फाइलें बिखरी थीं। ओपीडी में जांच करवाने आई गर्भवती महिलाओं के वेटिंग हॉल में गिरगिट भी नजर आया।

2.कालीबाड़ी मैटरनिटी अस्पताल

महिलाएं की भीड़ लेकिन कोरोना जांच का सिस्टम केवल गर्भवती के लिए

कालीबाड़ी मैटरनिटी अस्पताल के बाहर ही कोरोना जांच के लिए व्यवस्था बनाई गई है। अस्पताल में कई तरह के इलाज के लिए महिलाएं पहुंचीं, लेकिन कोविड एंटीजन टेस्ट केवल गर्भवती महिलाओं का ही हुआ। अन्य बीमारियों वाली महिलाएं बेरोकटोक ओपीडी में पहुंच गईं। इतना ही नहीं, कई महिलाओं ने शिकायत की कि उन्होंने कोरोना जांच नहीं करवाई, फिर भी मोबाइल पर पाजिटिव या निगेटिव का मैसेज आ गया।

3.डीकेएस अस्पताल

दिवाली के पहले तैयार होने वाला ऑक्सीजन प्लांट अब भी अधूरा

राजधानी के सरकारी सुपर स्पेश्यिलिटी अस्पताल डीकेएस में भी केवल उन्हीं मरीजों की कोरोना जांच की जा रही है, जो सर्जरी या किसी दूसरी दिक्कत के चलते अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। बाकी मरीजों की जांच का सिस्टम ही नहीं है। अस्पताल में रोजाना औसतन 25 पेशेंट भर्ती होते हैं और करीब इतनी ही कोरोना जांच हो रही है। यहां भी ओपीडी और आईपीडी में पर्ची काउंटर पर खासी भीड़ है।

4.जिला अस्पताल पंडरी

गेट के सामने कबाड़, थर्मल स्क्रीनिंग बंद, पूरे मरीजों की कोविड जांच नहीं

रायपुर में कोरोना केस बढ़ने के बाद पंडरी के जिला अस्पताल परिसर में ही पहला कोविड वार्ड ना था। आईसीयू बेड वाला वार्ड काफी समय पहले बनकर तैयार हो गया है, लेकिन इसके सामने अब भी केंद्र से मिले वेंटिलेटर का कबाड़ पड़ा है। मुख्य अस्पताल में भी सर्दी-खांसी-बुखार वाले मरीजों की कोरोना जांच बंद है। केवल उन्हीं मरीजों की जांच की जा रही है जो छोटी मोटी सर्जरी या किसी बीमारी के चलते यहां एडमिट हो रहे हैं। बाकी मरीज ऐसे ही आ रहे हैं और इलाज करवा के जा रहे हैं। अस्पताल के गेट पर कोरोना के दौर में बॉडी टैंपरेचर की जांच भी बंद हो गई है। मास्क को लेकर थोड़ी सख्ती केवल इसी अस्पताल में नजर आई है।