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स्टेशन ए-1 पर दिक्कतें भरपूर:भीड़ और ट्रेनें बढ़ीं पर स्टेशन का बुरा हाल धीमे काम से नया प्लेटफॉर्म भी सालभर लेट

रायपुर2 महीने पहले
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प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर शेड से लगातार बारिश का 
पानी गिर रहा है। इससे यात्री परेशान होते रहते हैं। - Dainik Bhaskar
प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर शेड से लगातार बारिश का पानी गिर रहा है। इससे यात्री परेशान होते रहते हैं।
  • बारिश के दौरान प्लेटफार्म नंबर-1 की छत में छोटे-छोटे झरने फूटे

राजधानी में एक माह पहले तक लंबे रूट की 6 ट्रेनें चल रही थीं और यात्री नहीं के बराबर थे, लेकिन पिछले एक माह में अप-डाउन मिलाकर 35 ट्रेनें बढ़ी हैं। इस वजह से यात्रियों का स्टेशन में फुटफाॅल रोजाना 15 हजार के पार चला गया है। इस वजह से स्टेशन के तकरीबन सभी प्लेटफार्मों की खामियां फिर सामने आ रही हैं।

बरसात में प्लेटफार्म-1 पर ही कई जगह छत से पानी की धार गिरने लगी है। पूरे स्टेशन को क्रास कर बनाए जा रहे नए फुट ओवरब्रिज का काम धीमा होने की वजह से भी प्लेटफार्मों पर अव्यवस्था पसर गई है। प्लेटफार्मों पर लगातार बढ़ती भीड़ से राहत मिल सकती थी, अगर प्लेटफार्म-7 तैयार हो जाता। लेकिन यह न सिर्फ अधूरा है, बल्कि रेलवे के ही अफसरों का मानना है कि इसे पूरा होने में कम से कम एक साल और लग सकता है। तब तक नागपुर की ओर से आने वाले ट्रेनों से उतरी भीड़ प्लेटफार्म नंबर 5 और 6 में परेशान होती रहेगी।

रेलवे पिछले एक माह से ट्रेनों को स्पेशल के नाम से लगातार बहाल कर रहा है। इसके मुकाबले हर प्लेटफार्म पर सुविधाएं वही हैं, जो कोरोना काल से पहले थीं। भास्कर की पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि कई तरह के निर्माण कार्यों से इन प्लेटफार्मों पर बदइंतजामी नजर आने लगी है। प्लेटफार्म-7 शुरू होने से काफी राहत हो सकती थी, लेकिन अब रेलवे के ही अफसरों का मानना है कि इसे भले ही 6-7 महीने में तैयार कर दिया जाए, लेकिन शुरू करने में कम से कम एक साल लग जाएगा। यह समय पटरी बदलने का सिस्टम और सिग्नलिंग सिस्टम तैयार करने में लगेगा।

जब तक ये दोनों काम पूरे नहीं होंगे, नया प्लेटफार्म चालू नहीं किया जा सकता है। बता दें कि स्टेशन में प्लेटफार्म 5 और 6 बनने के 23 साल बाद पिछले साल प्लेटफार्म-7 का काम शुरू हुआ था। समय-सीमा 18 माह तय की गई, लेकिन काम शुरू होने के करीब दो माह बाद लाॅकडाउन लग गया। उसके बाद काम ऐसा रुका कि यह प्रोजेक्ट अब एक साल लेट है। इसका ढांचा भी इस साल के अंत तय तैयार होना मुश्किल है। जानकारों का तो यह अनुमान भी है कि प्लेटफार्म-7 का 2022 के अंत तक शुरू होने पाना मुश्किल ही है।

स्टेशन ए-1 पर दिक्कतें भरपूर
रायपुर स्टेशन अब राजधानी की जरूरतों और यात्रियों की संख्या के हिसाब से छोटा पड़ने लगा है। कोरोना काल से ठीक पहले रायपुर से अप-डाउन मिलाकर 140 ट्रेनें चल रही थीं और यात्रियों का फुटफाॅल लगभग 60 हजार रोजाना था। सबसे बड़ी दिक्कत प्लेटफार्म-1 पर है, जहां अधिकांश ट्रेनें ठहरती हैं। इसकी चौड़ाई सारे प्लेटफार्मों से कम है और उसी में सारे कार्यालय, स्टाॅल और दूसरी सुविधाएं एडजस्ट कर दी गई हैं। इस वजह से यहां यात्रियों के लिए जगह बहुत कम बची है। रेलवे इस प्लेटफार्म की चौड़ाई नहीं बढ़ा सकता, लेकिन इसे व्यवस्थित करने के प्रयासों के कई तरह के निर्माण के कारण झटका लगा है।

इस प्लेटफार्म पर बिलासपुर और ओड़िशा की ओर से आने वाली 50 से ज्यादा ट्रेनें रुकती हैं, इसलिए भीड़ भी इसी में सबसे ज्यादा है। हालात ये हैं कि शुक्रवार को भारी बारिश के दौरान इस प्लेटफार्म पर कई जगह छत से पानी झरने की तरह गिरा और दर्जनों यात्री अपना सामान भी भींगने से बचा नहीं सके। यही नहीं, दूसरी समस्या रायपुर में प्लेटफार्मों का खाली नहीं मिलना भी है। इस वजह से कई बार ट्रेनें आउटर में रोकनी पड़ रही हैं। ऐसा नागपुर की ओर से आने वाली ट्रेनों के मामले में ज्यादा हो रहा है। प्लेटफार्म-7 इसका विकल्प हो सकता है, लेकिन उसमें साल-डेढ़ साल का समय है। तब तक हालात ऐसे ही रहनेवाले हैं।

कोरोना के कारण प्लेटफार्म और स्टेशन विस्तार के कई कार्यों में बाधा आई है। बारिश के कारण भी काम धीमा है। एक-दो माह बाद काम में तेजी लाएंगे ताकि यात्रियों को ज्यादा असुविधा न हो।
-राकेश सिंह, स्टेशन डायरेक्टर रायपुर

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