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वर्चुअल बैठक पर तकरार:मुख्यमंत्री सचिवालय ने मीटिंग का लिंक भेजा, भाजपा ने जुड़ने से इनकार कर दिया, प्रदेश अध्यक्ष साय बोले - यह अशोभनीय है

रायपुर6 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच एक बैठक को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। चार दिन पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात का समय मांगा था। जवाब में मुख्यमंत्री की ओर से वर्चुअल बैठक की सहमति भेजी गई। मुख्यमंत्री सचिवालय ने जब भाजपा नेताओं को इस वर्चुअल बैठक का लिंक भेजा तो वहां से इनकार कर दिया गया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने वर्चुअल लिंक भेजे जाने को अशोभनीय तक बता दिया।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया एकाउंट से लिखा, ‘भूपेश बघेल जी! हम आपसे रविवार को एक्चुअल बैठक करना चाहते थे। उसके तीन दिन बाद वर्चुअल लिंक भेजना अशोभनीय है। भाजपा छत्तीसगढ़ में टीकाकरण और कोरोना से निपटने जैसे गंभीर विषय पर रूबरू बात करना चाहती थी। इस कथित बैठक में भाजपा के शामिल होने का औचित्य ही नहीं है। धन्यवाद।’ बाद में भाजपा अध्यक्ष ने अपनी पोस्ट को मिटा दिया। ऐसा क्याें किया गया? यह बताने को फिलहाल कोई तैयार नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय भी इस पर जवाब देने से बच रहे हैं।

इधर, रायपुर से भाजपा सांसद सुनील सोनी ने कहा, ‘हम भी मुख्यमंत्री से मिलकर इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा करना चाहते थे। समय मांगा था कि आपसे मिलकर वैक्सीन के संबंध में बात करना चाहते हैं। हमारी नीति और नीयत दोनों साफ थी। अगर केंद्र सरकार के स्तर पर राज्य को कोई परेशानी है तो हम भी कड़ी बनकर उनकी मदद करते। लेकिन मुख्यमंत्री को मुलाकात भी मंजूर नहीं है।

सोनी बोले- हम इतने अछूत भी नहीं हैं

सांसद सुनील सोनी ने कहा, ‘आज मुझे 2 साल हो गए सांसद बने। लेकिन किसी मंत्री और मुख्यमंत्री ने बुलाकर सुझाव नहीं लिया। हम इतने अछूत भी नहीं हैं। सांसद ने कहा कि हम हमेशा तैयार थे, तैयार रहेंगे, छत्तीसगढ के लिए काम करते रहेंगे।

भाजपा के आग्रह पर हमलावर हुई कांग्रेस

मुख्यमंत्री के साथ एक्चुअल बैठक के भाजपाई आग्रह पर कांग्रेस हमलावर है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा, भाजपा सांसद सुनील सोनी का बयान कोरोना रोकने के लिए बनी गाइडलाइन का पालन करने वालों का अपमान है। उनके बयान से ऐसा लग रहा है, गाइडलाइन का पालन करने वाले सभी लोग अछूत हैं। जहां देश के प्रधानमंत्री भी मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक करते हैं। भाजपा भी छत्तीसगढ़ में वर्चुअल प्रेस वार्ता करती है, धरना प्रदर्शन करती है, संगठन की बैठक करती है लेकिन CM के साथ आयोजित वर्चुअल बैठक से भागती है। वह वर्चुअल बैठक को अपना अपमान बताती है। ठाकुर ने कहा, भाजपा के पास इस बैठक में सुझाव के नाम पर कुछ नहीं था। वह बस सुर्खियाें में आने के लिए ऐसा कर रही थी। मुख्यमंत्री ने बैठक का स्वागत कर दिया तो भाजपा के लोग भाग खड़े हुए।

वर्चुअल बैठक से मना करने के बाद भाजपा नेता सरकार की शिकायत करने राजभवन पहुंचे।
वर्चुअल बैठक से मना करने के बाद भाजपा नेता सरकार की शिकायत करने राजभवन पहुंचे।

यहां से शुरू हुआ बैठक विवाद

दरअसल भाजपा ने रविवार को प्रदेश भर में टीकाकरण की दिक्कतों को लेकर विरोध जताने और कलेक्टर से मुख्यमंत्री तक से मिलकर कुछ सुझाव सौंपने का कार्यक्रम बनाया। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने शनिवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलने का समय मांगा। जवाब में मुख्यमंत्री ने बातचीत का स्वागत करते हुए वर्चुअल बैठक का प्रस्ताव रखा। अगले दिन मुख्यमंत्री सचिवालय ने 12 मई को दोपहर 12 बजे से वर्चुअल बैठक की जानकारी दे दी। भाजपा नेताओं ने इसे अपमान बताया। कहा, मुख्यमंत्री विपक्ष से भाग रहे हैं। रविवार को भाजपा नेताओं ने राज्यपाल अनुसुईया उइके से मिलकर सरकार की शिकायत की।

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