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प्रशासन की लेटलतीफी:98 गांवों में डेढ़ साल से डायवर्सन रोका मास्टर प्लान का पता नहीं, हजारों परेशान

रायपुर2 महीने पहले
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तहसील कार्यालय।
  • शहर के मास्टर प्लान में 30 गांव रखे थे, जिन्हें 98 कर दिया, काम ठप

असगर खान| सरकारी एजेंसियां किस तरह प्लान बनाकर काम शुरू किए बिना किस तरह लोगों पर कड़े प्रतिबंध लागू करती हैं और वे कैसे परेशान होते हैं, राजधानी का लगभग डेढ़ साल से लंबित मास्टर प्लान इसका बड़ा उदाहरण है। मास्टर प्लान कब तक बनेगा, इसकी ठीक-ठीक जानकारी किसी के पास नहीं है, लेकिन इसकी आड़ में टाउन प्लानिंग ने पिछले डेढ़ साल से शहर से लगे 98 गांवों में जमीन के डायवर्सन से लेकर ज्यादातर काम प्रतिबंधित कर दिए हैं। नतीजा ये हुआ है कि इन गांवों के लोग जमीन या प्रापर्टी खरीदने-बेचने से लेकर छोटे-छोटे काम के लिए भटक रहे हैं, उनके अर्जियां भी रद्द हो रही हैं। डेढ़ साल में इस रोक ने राजधानी के आम लोगों के साथ-साथ उद्योगपतियों, किसानों, राइस मिलरों, बिल्डर और दूसरे कारोबारियों को भी परेशान कर दिया है। रायपुर के पुराने मास्टर प्लान में केवल 30 गांव शामिल थे। लेकिन अमृत मिशन (अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशनल) के तहत जब 2019 में नए प्लान की अधिसूचना लाई गई, तब 98 गांव शामिल कर लिए गए थे।
ठीक उसी समय यानी जनवरी 2019 से इन गांवों में कृषि जमीन के डायवर्सन का काम बंद हो गया। इन गांवों से संबंधित 600 से ज्यादा आवेदन टाउन प्लानिंग और तहसील में अटके हैं। तहसील में अधिकतर लोगों के आवेदन इसलिए रद्द कर दिए गए क्योंकि उनके पास टाउन प्लानिंग से एप्रूव नक्शा नहीं है। इसी तरह के और प्रतिबंध भी हैं, जिनसे परेशान होकर राजधानी बार एसोसिएशन ने विरोध शुरू कर दिया है। संघ ने कलेक्टर को दिए गए शिकायत पत्र में कहा कि हर वर्ग के लोग टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, तहसील, कलेक्टोरेट के चक्कर काट रहे हैं। जमीनों का डायवर्सन नहीं होने की वजह से राज्य सरकार को मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।

2019 में बन जाना था प्लान, अब शुरू हो सका है काम
राजधानी का नया मास्टर प्लान 2019 में ही बन जाना था। कई तकनीकी खामियों और कोरोना की वजह से यह अब तक अधूरा है। इस वजह से शहर से लगे गांवों में जमीन के डायवर्सन पर लगी रोक भी नहीं हट पाई। नया मास्टर प्लान 2041 तक के लिए बन रहा है। अनुमान है कि तब तक यानी 23 साल में शहर की आबादी 40 फीसदी बढ़कर 26 लाख से ज्यादा हो जाएगी। इसी को ध्यान में रखते हुए शहर में सड़कें, सफाई, ट्रैफिक, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। रायपुर के लिए पिछले 50 साल में 3 मास्टर प्लान बने हैं। अभी तीसरा लागू है और 2021 तक चलेगा। पहले मास्टर प्लान में 30 और बाकी के दो में 70 वार्डों को शामिल किया गया था। अब चौथा मास्टर प्लान बनने वाला है।

ऐसे शामिल किया क्षेत्रों को
करीब 16 लाख की आबादी वाले रायपुर शहर का दायरा अभी 226 वर्ग किमी है। नया प्लान में 503 वर्ग किमी क्षेत्र को लिया जा रहा है। शहर की चारों ओर की सरहदें जयस्तंभ चौक को केंद्र मानकर बढ़ाई गई हैं। जयस्तंभ चौक से पूर्व की दिशा में मंदिर हसौद तक, पश्चिम में कुम्हारी तक, उत्तर में सिमगा और दक्षिण में पुराना धमतरी रोड पर खिलौरा तक का इलाका नए प्लान में शामिल है। इसीलिए इन क्षेत्रों में विशेष प्रायोजन के लिए जमीन के डायवर्सन पर रोक लगी है।

"जो क्षेत्र प्लानिंग एरिया में शामिल हैं वहां के नियम अलग हैं जिनका पालन कर रहे हैं। ये गांव प्रतिबंधित कर दिए गए हैं, इसलिए कोई भी अनुमति सभी विभागों की एनओसी के बाद ही मिलेगी।"
-डॉ. एस भारतीदासन, कलेक्टर
"मास्टर प्लान में शामिल गांवों की जमीनों के डायवर्सन के आवेदन इसलिए रद्द किए जा रहे हैं क्योंकि उनमें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से नक्शा पास नहीं कराया गया था। बिना एनओसी आवेदन मंजूर नहीं होंगे।"
-प्रणव सिंह, एसडीएम रायपुर

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