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खर्च का स्मार्ट आर्ट:4.28 करोड़ की डस्टबिन 36 जगह लगवाईं, दर्जनभर कबाड़ या अनुपयोगी

रायपुरएक महीने पहले
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चंद दिनों में स्मार्ट कचरा पेटी कबाड़। - Dainik Bhaskar
चंद दिनों में स्मार्ट कचरा पेटी कबाड़।

राजधानी में तीन साल पहले 36 जगह सेंसर तकनीक वाली 4.28 करोड़ रुपए से स्मार्ट डस्टबिन लगाने का प्रोजेक्ट तीन साल में ही दम तोड़ने लगी है। हालात ये हैं कि कुछ निचले हिस्से में जंग लगने की वजह से कुछ तीन डस्टबिन स्मार्ट सिटी के दफ्तर के सामने ही डंप करने पड़े हैं।

इन्हें मिलाकर आधा दर्जन से ज्यादा डस्टबिन इस तरह कबाड़ हुई हैं कि लोग उनके बजाय कचरा उन्हीं के आसपास सड़क पर फैला रहे हैं। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि कम से कम 6 डस्टबिन ऐसी जगह लगी थीं, जहां निगम की सफाई गाड़ियां ही नहीं पहुंच पा रही थीं। उनकी जगह भी बदली जा रही है। स्मार्ट सिटी ने तीन साल पहले शहर में 36 जगहों पर स्मार्ट डस्टबिन लगाने का प्लान लांच किया। एक जगह स्मार्ट डस्टबिन लगाने में करीब 11 लाख रुपए तक खर्च किए गए।

इसमें ऑपरेशन और मेंटनेंस भी शामिल था। स्मार्ट कचरा पेटी के बारे में दावा किया गया था कि इसमें सेंसर तकनीक लगी है। जब डस्टबिन भर जाएगी तो स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रूम में मैसेज आएगा और गाड़ियां जाकर इसे तुरंत खाली कर देंगी। इससे आसपास के लोगों को गंदगी और बदबू से निजात मिलेगी। स्मार्ट डस्टबिन का प्रोजेक्ट राजधानी में ऐसी जगहों के लिए बना, जहां चौपाटी या खाने पीने की दुकानों वाले बाजार हैं। खाने पीने का कचरे से खाद बनाना भी इस प्रोजेक्ट के टारगेट में रखा गया था। लेकिन तीन साल में ही इसकी उपयोगिता पर सवाल उठने लगे हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट, कबाड़ की तरह पड़ी हैं स्मार्ट पेटियां
चौराहों पर कचरा इनके बाहरबूढ़ातालाब के सामने स्मार्ट सिटी रायपुर मुख्यालय से बमुश्किल 30 कदम के फासले पर स्मार्ट डस्टबिन कबाड़ हालात में पड़ी हैं। मोटे टीन की चादर वाली इन स्मार्ट कचरा पेटियों की तली ही जंग से सड़ रही है। इन्हें जमीन के भीतर 7 फीट गहराई तक इंस्टाल किया गया, लेकिन खराब होने से बचाया नहीं जा सका। इसी तरह, तेलीबांधा, जीई रोड, आमानाका, अनुपम गार्डन, गांधी मैदान, घड़ी चौक समेत तीन दर्जन जगहों पर स्मार्ट डस्टबिन इंस्टाल की गई। अधिकांश जगह कचरा इन पेटियों में नहीं, बल्कि बाहर डाला जा रहा है। पार्षदों का कहना है कि पेटियां साफ नहीं होतीं, अगर इनमें कचरा डाला जाए तो यह सड़ता रहता है और पूरे इलाके में बदबू फैली रहती है।

निकालनी पड़ीं स्मार्ट पेटियां
शुरूआत में स्मार्ट डस्टबिन को आमानाका समेत कुछ ऐसी जगहों पर इंस्टाल कर दिया गया, जहां तक कचरा उठाने वाली गाड़ियां तक नहीं जा सकती थीं। नतीजा, वहां की पेटियां भरती रहीं और फिर कचरा बाहर फेंका जाने लगा। कूड़े का अंबार लगा, तब पता चला कि इनकी पोजीशन की गलत हो गई। इन्हें निकाला जा रहा है। लगातार शिकायतों के बाद स्मार्ट सिटी ने अब जाकर मेंटेनेंस करनेवाली एजेंसी को निर्देश दिए हैं कि जहां पेटियां खराब या अनुपयोगी हैं, उन्हें बदला जाए दिया जाए।

अंडरग्राउंड डस्टबिन को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से हम जोड़ रहे हैं। कुछ जगह कचरा पेटियां खराब हैं, कुछ टूट गई हैं। खराब हुई स्मार्ट डस्टबिन हटाकर नई लगाने के लिए कहा गया है।
-प्रभात मलिक, एमडी, स्मार्ट सिटी रायपुर

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