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18 प्लस वैक्सीनेशन:राजधानी में वैक्सीन सर्टिफिकेट में कोई भी गलती सुधारना आसान, हर टीकाकरण केंद्र में बनाया सिस्टम

रायपुर3 महीने पहले
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प्रदेश में युवाओं का टीकाकरण 1 मई से शुरु होने के बाद बहुत से युवाओं के सर्टिफिकेट में नाम, पते सहित कई जानकारियां गलत छप गईं हैं। - Dainik Bhaskar
प्रदेश में युवाओं का टीकाकरण 1 मई से शुरु होने के बाद बहुत से युवाओं के सर्टिफिकेट में नाम, पते सहित कई जानकारियां गलत छप गईं हैं।
  • हेल्पडेस्क या अपने वैक्सीनेशन बूथ में जाकर संशोधन करवा सकते हैं

राजधानी में 18 प्लस के वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट में किसी भी तरह की कोई गलती होने पर अब उसे वहीं बूथ में सुधारा जा सकेगा। इसके लिए वैक्सीनेशन सेंटर में ही सिस्टम बना दिया गया है। प्रदेश में युवाओं का टीकाकरण शुरु होने के बाद 1 से 18 मई के बीच टीके लगवाने वाले बहुत से युवाओं के सर्टिफिकेट में नाम, पते सहित कई जानकारियां गलत छप गईं हैं। एक के बाद एक कई सर्टिफिकेट में गड़बड़ी सामने आने के बाद इसे वहीं सेंटर में सुधरवाने का सिस्टम बनाया गया है।

जिला स्तर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के दफ्तर में हेल्प डेस्क भी बना दी गई है। हेल्प डेस्क में युवा किसी भी दिन वैक्सीन सर्टिफिकेट में संशोधन के लिए पहुंच रहे हैं। युवा आसानी से सर्टिफिकेट की गड़बड़ी सुधार सकें इसके लिए टीकाकेंद्रों पर भी वैक्सीन सर्टिफिकेट से जुड़ी गलतियों का संशोधन किया जा रहा है। नए सिस्टम के तहत युवाओं ने जिस टीका केंद्र में टीका लगाया है, वे वहीं जाकर संशोधन करवा सकते हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने 1 मई को युवाओं के वैक्सीनेशन के लिए सीजी टीका पोर्टल बनाया है। अफसरों के अनुसार शुरूआती दिनों में पोर्टल में दिक्कत आने के कारण शहर में करीब 70 हजार से अधिक युवाओं का ऑफ लाइन सिस्टम से रजिस्ट्रेशन कर वैक्सीन लगाई गई।

बाद में उनकी जानकारी रजिस्टर से पोर्टल अपलोड में की गई। रजिस्टर से डेटा पोर्टल में एंट्री करने के दौरान गलतियां हो गईं। इसी वजह से सर्टिफिकेट में गड़बड़ी हो गई। कई युवतियों को युवकों के नाम से सर्टिफिकेट मिल गए। यही नहीं कई लोगों के पते गलत लिखा गए। सरनेम की भी ढेरों गलतियां सामने आ रही हैं।

हिंदी टाइपिंग में भी गड़बड़ी
स्वास्थ्य विभाग के जानकारों ने बताया कि ऐसे हितग्राही जिन्होंने पोर्टल में हिंदी टाइपिंग कर अपनी जानकारी अपलोड की थी, उनके नाम में पोर्टल में एंट्री के दौरान सबसे ज्यादा गलतियां हुईं हैं। स्पेलिंग गलत होने से ऐसे सर्टिफिकेट को सर्च करने में भी हितग्राही को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सर्टिफिकेट यदि निकल भी रहा था तो वो किसी काम का ही नहीं रहता। ऐसे लोग भी हेल्पडेस्क या अपने वैक्सीनेशन बूथ में जाकर संशोधन करवा सकते हैं। बहुत सारे नामों में गलतियों के पीछे हिंदी में टाइपिंग एक वजह माना जा रहा है। रायपुर में पिछले एक हफ्ते में 350 से अधिक लोग हेल्पडेस्क के जरिए त्रुटियां सुधरवा चुके हैं।

ऐसे करवा सकते हैं संशोधन
सीजी टीका में 18 से 44 श्रेणी में टीकाकरण कराने वाले ऐसे युवा जिनके सर्टिफिकेट में कोई न कोई गलती है वे वैक्सीनेटर के माध्यम से वैक्सीनेशन सेंटर जहां टीका लगवाया है वहां पहुंचकर टीकाकरण के दौरान दी गई पंजीयन पर्ची दिखाकर संधोशन करवा सकते हैं। इसके अलावा जिला स्तर के हेल्प डेस्क अथवा डिस्ट्रिक्ट इम्यूनाइजेशन ऑफिसर(डीआईओ)में भी टीकाकरण के दौरान दी गई पंजीयन पर्ची दिखाकर गलती सुधरवायी जा सकती है। अफसरों का कहना है कि इन सेंटरों में युवा अपना नाम, मोबाइल नंबर, तारीख और किस जगह पर टीका लगवाया है ये बताकर भी अपने सर्टिफिकेट की गलती में सुधार करवा सकते हैं।

45 प्लस में गलतियां आने पर ये करें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविन पोर्टल के‌ जरिए‌ टीकाकरण ‌कराने वाले 45 साल से अधिक उम्र के लोग जिनके सर्टिफिकेट में त्रुटियां आ रही है। वो https://selfregistration.cowin.gov.in में अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर में ओटीपी हासिल कर रेज एन इश्यू (Raise an issue) ऑप्शन को चुनकर सर्टिफिकेट में हुई नाम , मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, पते फोटो या किसी भी तरह की गलती सुधारवा सकते हैं।

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