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आखिरी तिमाही में सुधारी अर्थव्यवस्था:प्रदेश की इकानॉमी 5 फीसदी ही पीछे, कर्ज भी डेढ़ हजार करोड़ रुपए कम लिया

रायपुर13 दिन पहले
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प्रतिकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतिकात्मक फोटो

कोरोना की वजह से देश की वित्तीय व्यवस्था पिछले एक साल से भी अधिक समय से गड़बड़ाई हुई है। हालांकि अप्रैल से जून तक लड़खड़ाने के बाद राज्य की वित्तीय व्यवस्था धीरे-धीरे संभल गई। वित्त वर्ष के अंत तक पिछले साल की तुलना में सिर्फ पांच प्रतिशत का अंतर रह गया। मतलब राज्य की कुल प्राप्तियों में थोड़ी सी कसर रह गई। इस साल जनवरी से मार्च के बीच अर्थव्यवस्था में जबरदस्त उछाल आया।

वित्त विभाग ने द्वारा हाल ही में जुटाई गई जानकारी में ये तथ्य सामने आए। केन्द्र से मार्च अंत तक जीएसटी क्षतिपूर्ति की राशि 632 करोड़ और आईजीएसटी सेटलमेंट की राशि के रूप में करीब 257 करोड़ रुपए मिले। डीजल, पेट्रोल पर वैट से 350 करोड़ रुपए मिले हैं। वित्त वर्ष के अंतिम दिन यानी 31 मार्च तक कुल आय (केन्द्र+राज्य) मिलाकर 1500 करोड़ रुपए होते हैं।

अंतिम दिन का व्यय लगभग 1700 करोड़ रुपए हुआ। मार्च में कुल आय (केन्द्र+राज्य) लगभग 15 हजार करोड़ रुपए हुई। कुल व्यय लगभग 15500 करोड़ रुपए हुआ। वर्ष 2019-20 का कुल व्यय 82000 करोड़ रुपए था। वर्ष 2019-20 का बजट आकार 90910 करोड़ था। इसमें व्यय 90 प्रतिशत था। वर्ष 2020-21 का व्यय लगभग 81500 करोड़ रुपए रहा।

वर्ष 2020-21 के बजट का आकार 95650 करोड़ रुपए था। इसमें व्यय 85 प्रतिशत था। इस प्रकार पिछले वर्ष से केवल 5 फीसदी ही कम व्यय हुआ, जो कोरोना काल को देखते हुए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस वर्ष बजट आवंटन 2021-22 के निर्देश भी पहली अप्रैल को जारी हो चुके हैं।

खास बातें

  • इस वर्ष कोई कटौती नहीं की गई है।
  • बीते वर्ष में 85 प्रतिशत व्यय रहा, जबकि वर्ष के प्रारंभ में लॉकडाउन के कारण व्यय में 30% की कटौती की गई थी।
  • राज्य में दूसरी तिमाही से ही स्थिति संभलनी शुरू हुई। तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में काफी सुधार हुआ।
  • अंतिम तिमाही में पिछले वर्ष से भी बेहतर राजस्व संग्रह हुआ।
  • कुल व्यय गत वर्ष के 90 प्रतिशत की तुलना में 85 प्रतिशत होने से केवल 5 फीसदी ही कम रहा।
  • केन्द्र सरकार से भी मार्च के अंत में राज्य को भरपूर राशि मिली।
  • केन्द्रीय करों में हिस्से में 500 करोड़ रुपए और जीएसटी प्राप्तियों में 890 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई।
  • इसमें राज्य को लगभग 1400 करोड़ रुपए अतिरिक्त मिले।

कर्ज की स्थिति
इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में राज्य ने कम कर्ज लिए। पिछले वर्ष लगभग 12 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिए गए थे। कोरोना काल में केन्द्र सरकार ने 2 प्रतिशत अतिरिक्त कर्ज की छूट दी थी लेकिन राज्य ने 15 हजार करोड़ रुपए की तुलना में 10500 करोड़ रुपए ही कर्ज लिए।

जीएसटी और ऊर्जा ने संभाली स्थिति
सूत्रों की मानें तो इस साल राज्य की प्राप्तियों में जहां -जहां से कमाई के ज्यादा अनुमान थे वह विभाग पिछड़ गए। जैसे शराब से करीब 500 करोड़ रुपए कम आय हुई। माइनिंग से भी करीब 900 करोड़ रुपए कम मिले। इसके अलावा रजिस्ट्री से करीब 300 करोड़ रुपए कम आए। वहीं बिजली से 2100 के अनुमान की जगह 2250 करोड़ रुपए मिले। जीएसटी से भी पहले से ज्यादा आय हुई।

जरूरत और योजनाओं के अनुसार बजट खर्च करने को कहा
वित्त विभाग ने सरकारी विभाग में सालभर बजट रोककर वित्तीय वर्ष के अंत में आनन-फानन में खर्च करने वाले पर नकेल कसने का फैसला किया है। वेटेरनरी, पंचायत समेत कई विभागों को सर्कुलर भेजकर कहा है कि वे नया बजट आबंटन जल्द ले लें।

इसे जरूरत व योजनाओं के अनुसार अभी से खर्च करना प्रारंभ करें। मैदानी दफ्तरों तक इसे शीघ्र पहुंचाएं। इसी तरह छुट्टियां को की वजह से सोमवार से अधिकारियों-कर्मचारियों को मार्च का वेतन मिलना प्रारंभ हो सका है। इसके साथ ही सातवें वेतनमान की तीसरी किश्त भी एरियर्स के रूप में दी जा रही है। बताते हैं कि परसों फिर अवकाश है इसलिए पे-बिल जल्दी मांगे गए हैं।

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