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चैंबर चुनाव:14 जनवरी से पहले होंगे चुनाव, कैट सदस्यों को बाहर करने की मांग पर विवाद

रायपुर10 दिन पहले
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कई तरह के विवादों के बाद आखिरकार यह तय हो गया कि चैंबर का नया अध्यक्ष चुनने के लिए 14 जनवरी के पहले चुनाव हो जाएंगे। नए चुनाव करवाने की जिम्मेदारी हर बार की तरह इस बार भी वरिष्ठ संरक्षक शिवराज भंसाली को दी गयी है। चुनावी कार्यक्रम अगले महीने घोषित कर दिया जाएगा। इधर चैंबर के कुछ पदाधिकारियों ने कैट मेंबर्स को चैंबर से बाहर करने की मांग कर दी। इसपर जमकर विवाद हो गया। नए चुनाव करवाने और सालभर के खर्चों की जानकारी देने के लिए रविवार को राज्यभर के पदाधिकारी ऑनलाइन मीटिंग में जुटे। बैठक की शुरुआत में चैंबर अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा ने कहा कि उनका कार्यकाल 19 दिसंबर को खत्म हो रहा है। चैंबर संविधान के अनुसार इस तारीख के एक महीने के भीतर नए चुनाव हो जाने चाहिए। उनकी इस बात का सभी ने समर्थन किया और तारीख तय कर दी गई। बैठक में कुछ चैंबर पदाधिकारियों ने कैट सदस्यों को चैंबर से बहिष्कार करने की मांग की। इस पर सदस्यों में जमकर विवाद हो गया। इस मुद्दे पर व्यापारी दो पक्षों में बंट गए। कैट अध्यक्ष अमर परवानी के चुनाव लड़ने पर योगेश अग्रवाल ने कहा कि वे पिछले तीन साल तक अलग संगठन चलाते रहे हैं। कार्यकारी अध्यक्ष ललित जैसिंघ ने कहा कि जब तक चैंबर में श्रीचंद सुंदरानी, पूरनलाल, रमेश मोदी और बरलोटा जैसे समर्पित लोग हैं, कोई भी दूसरा संगठन कब्जा नहीं कर सकता। कैट सदस्यों ने कहा कि चुनाव का सामना करने के बजाय वे डर रहे हैं। कैट के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष और चैंबर उपाध्यक्ष विक्रम सिंहदेव ने कहा कि चैंबर पदाधिकारियों की आपसी लड़ाई के कारण कमजोर हुआ है।

कैट की सक्रियता की वजह से नहीं। पिछले तीन साल में एक भी महीना ऐसा नहीं हुआ है, जिसमें पदाधिकारियों के बीच आपस में विवाद न हुआ हो। इस बार अमर परवानी पर चुनाव लड़ने के लिए दबाव बनाया गया है, तो कुछ लोग घबराए हुए हैं। इसलिए विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।

खर्चों को लेकर विवाद
चैंबर कोषाध्यक्ष प्रकाश अग्रवाल ने जब अपने कार्यकाल का हिसाब दिया तो कुछ सदस्यों ने व्यापार मेला समेत कई खर्चों पर आपत्ति की। इस पर उन्होंने कहा दिया कि जिन्हें हिसाब देखना है वो दफ्तर आ सकते हैं। इस बात पर भी बहस हुई।

विवादित कार्यकाल से मजबूत हुआ कैट :
चैंबर में बरलोटा का विवाद सबसे विवादित रहा। आपसी पदाधिकारियों की खींचतान में उन्होंने इस्तीफा तक दे दिया था। सुंदरानी ने भी संरक्षक पद त्याग दिया था। युवा चैंबर को भंग किया गया और केंद्रीय मंत्री के कार्यक्रम में भी हंगामा हुआ था। इस बार व्यापारी मुद्दों के बजाय चैंबर में जमकर गुटीय राजनीति चली। इससे भी कैट का संगठन मजबूत होता रहा। यही वजह है कि इस बार चैंबर और कैट के बीच में सीधा मुकाबला होगा।

इस बार वोटिंग का सिस्टम बदलेगा
कोरोना की वजह से इस बार चैंबर चुनाव की वोटिंग का तरीका बदला जा रहा है। अब तक पूरे प्रदेश के चुनाव रायपुर में ही होते थे। इसके लिए सभी सदस्यों को वोट डालने के लिए रायपुर आना पड़ता था। लेकिन इस बार जिलों में ही वोट डालने की सुविधा देने की तैयारी कर ली गयी है। जिस जिले में 500 से ज्यादा मतदाता हैं, वहां पोलिंग बूथ बनाया जाएगा। व्यापारी वहीं वोट डाल सकेंगे। उन्हें रायपुर आने की जरूरत नहीं होगी। जिन जिलों में पांच सौ से कम मतदाता हैं, वहां के मतदाता पड़ोस के जिले में वोट डाल सकेंगे।

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