हाथियों के लिए धान खरीदी में भ्रष्टाचार का संदेह:नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से पूछा- खुले बाजार में 1350 रुपए में बेच रहे, फिर वन विभाग सड़ा धान 2 हजार में क्यों खरीद रहा?

रायपुर6 महीने पहले
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा, हाथियों को खिलाने के लिए सड़े धान की खरीदी का निर्णय समझ से परे है।

छत्तीसगढ़ में जंगली हाथियों को खिलाने के लिए मार्कफेड से धान खरीदी की योजना पर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने खरीदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने पूछा है कि जब सरकार इस साल खरीदा हुआ धान खुले बाजार में 1350-1400 रुपए प्रति क्विंटल बेच रही है तो वन विभाग को एक साल पुराना सड़ा धान दो हजार से अधिक में खरीदने की कौन सी मजबूरी है।

भाजपा विधायक दल के नेता धरमलाल कौशिक ने कहा, उन लोगों ने लगातार विधानसभा में यह सवाल उठाया है कि वर्ष 2019-20 में खरीदी का हिसाब नहीं आया है। कितना धान सड़ गया है और कितना कस्टम मीलिंग के लायक है। इसी को छिपाने के लिए आनन-फानन में हाथियों को धान खिलाने का निर्णय लिया गया। अब यह कौन देखने जाएगा कि वन विभाग ने कितना धान हाथियों को खिलाया है। कहां-कहां खिलाया और हाथी ने कितना खाया।

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा, हाथियों को खिलाने के लिए सड़े धान की खरीदी का निर्णय समझ से परे है। क्या हाथियों को सड़ा हुआ धान अच्छा लगता है या इसके पीछे अनियमितताओं को दबाने का प्रयास हो रहा है। वन विभाग को उनकी सलाह है कि हाथियों की समस्या का स्थायी हल ढूंढे। लेमरु हाथी रिजर्व की अधिसूचना काे तत्काल प्रकाशित करना चाहिए, ताकि हाथियों की सुरक्षा हो सके। उनके पर्याप्त चारे की व्यवस्था हो सके।

यहां से शुरू हुआ विवाद
छत्तीसगढ़ में सरकार ने जंगली हाथियों को खिलाने के लिए सरकारी धान खरीदने का फैसला किया है। यह खरीदी छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन महासंघ से की जानी है। इस धान को वन विभाग हाथी प्रभावित गांवों के बाहर ढेर बनाकर रखेगा, ताकि भोजन की तलाश में निकला हाथी दल को बाहर ही भरपेट भोजन मिल जाए। वन विभाग ने प्रदेश के सर्वाधिक हाथी प्रभावित 9 जिलों सूरजपुर, काेरबा, रायगढ़, सरगुजा, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद, कांकेर और धमतरी जिलों के लिए बड़े स्तर पर धान खरीदी का प्रस्ताव दिया है।

मार्कफेड ने 2095.83 रुपए प्रति क्विंटल लगाया दाम
वन विभाग के प्रस्ताव पर ने 2 हजार 95 रुपए 83 पैसा प्रति क्विंटल की दर पर धान देना स्वीकार कर लिया है। यह खरीदी सीधे धान संग्रहण केंद्रों से की जानी है। मार्कफेड ने वन विभाग को कहा है, रायपुर जिले के संग्रहण केंद्र जौंदा, महासमुंद जिले के पिथौरा, बिलासपुर के मोपका और सेमरताल तथा सूरजपुर जिले के देवनगर व लोधिमा केंद्रों से धान उठाया जा सकता है। वर्ष 2019 में खरीदा गया 86 हजार मीट्रिक टन धान अभी भी संग्रहण केंद्रों में पड़ा हुआ है।

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