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सेंट्रल वेबसाइट की आईडी चुराकर फर्जीवाड़ा:भारत सरकार के नाम से हूबहू प्रमाणपत्र; कोरोना मौत के फर्जी सर्टिफिकेट 10-10 हजारमें बेचे, दो च्वाइस सेंटर चलाने वाले गिरफ्तार

रायपुर2 महीने पहले
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फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले आरोपी। - Dainik Bhaskar
फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले आरोपी।

प्रदेश में कोरोना मृतकों के परिजन को मृत्यु प्रमाणपत्र के आधार पर 50 हजार रुपए मुवजा आदेने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही 10-10 हजार रुपए में कोरोना मौतों के फर्जी सर्टिफिकेट बेचने का पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया है। पिछले महीने पुलिस से इसकी शिकायत हुई थी, उसके बाद चली गोपनीय जांच से पुलिस इस गोरखधंधे की तरह तक पहुंच गई। जब्त किए गए प्रमाणपत्र हूबहू असली जैसे हैं। च्वाइस सेंटर से इन्हें जारी करने का सिलसिला 2019 में बंद कर दिया गया था, इसके बावजूद पकड़े गए सेंटरों में सेंट्रल वेबसाइट की फर्जी आईडी से पूरा गोलमाल हुआ।

च्वाइस सेंटरों के संचालक नयन काबरा और युगलकिशोर वर्मा को गिरफ्तार कर पुलिस ने 6 कंप्यूटर, स्कैनर तथा अन्य मशीनें जब्त की हैं। आई-पासवर्ड देने के मामले में नगर निगम के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इस फर्जीवाड़े के तार उत्तरप्रदेश के गिरोह से भी जुड़ रहे हैं। फर्जी प्रमाणपत्र की शिकायत सबसे पहले नगर निगम में हुई थी। वहां से जांच के लिए पुलिस के पास अाई। एएसपी तारकेश्वर पटेल ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में खम्हारडीह निवासी काबरा का उमा च्वाइस सेंटर है। इसी तरह वर्मा रावांभाठा में च्वाइस सेंटर चलाता है। दोनों ही सेंटरों में प्रतिबंध के बावजूद जन्म-मृत्यु प्रमाण बनाया जा रहा था। ये प्रमाणपत्र पिछले दो साल से निगम में निशुल्क बन रहे हैं, लेकिन पूरा सिस्टम भारत सरकार से नियंत्रित है। दरअसल इन्हीं सेंटरों से जारी प्रमाणपत्र लेकर बिरगांव का एक युवक अपने बच्चे के नाम से दस्तावेज बनाने निगम गया। जांच में उसके बच्चे का अधिकृत सिस्टम में कोई रिकार्ड नहीं मिला। तब हड़बड़ाए निगम अफसरों ने जांच बिठा दी और पुलिस को शामिल किया। इसके बाद फर्जीवाड़ा सामने आया। तब निगम के रजिस्ट्रेशन विभाग के अधिकारियों ने पुलिस को अधिकृत तौर पर खबर दी।

कंप्यूटर से निकालेंगे डेटा
पुलिस ने जब्त 6 कंप्यूटरों को जांच के लिए सायबर सेल भेजा है। उसका डेटा रिकवर करने की कोशिश होगी ताकि पता चले कि कितने प्रमाणपत्र बनाकर बेचे गए। आरोपियों से अभी पुलिस को इसकी ठीक-ठीक संख्या नहीं मिली है। इसके अलावा पुलिस ने लोगों से अपील भी की है कि जिन्होंने आरोपियों के पास से या किसी भी च्वाइस सेंटर से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया है तो पुलिस या निगम में शिकायत करें। क्योंकि च्वाइस सेंटरों से प्रमाण पत्र बनना बंद हो गया है।

निगम कर्मियों की भी भूमिका?
पुलिस निगम के कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है, क्योंकि वहां के कर्मचारियों के पास ही आईडी और पासवर्ड होता है। जांच इसलिए की जा रही है कि कहीं उनमें से किसी ने पासवर्ड या आईडी बेच तो नहीं दिया है, या आरोपियों से सांठगांठ तो नहीं है। पुलिस ने निगम के रजिस्ट्रेशन विभाग में काम करने वालों की सूची मांगी है। इन सभी से पूछताछ की जाएगी।

आईडी-पासवर्ड हैकिंग का शक
पुलिस को शक है कि काबरा और वर्मा ने हैकिंग कर केंद्रीय जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र की साइट से आईडी व पासवर्ड चोरी कराया है। क्योंकि वह केंद्रीय साइट पर जाकर ही काम कर रहा था। आरोपियों ने पूछताछ में रहमानुद्दीन नाम के युवक से कथित तौर पर आईडी-पासवर्ड खरीदना बताया है। उसकी भी तलाश की जा रही है। पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई कि उत्तरप्रदेश के कुछ गिरोह हैकर की मदद से केंद्रीय वेबसाइट हैक कर फर्जी आईडी और पासवर्ड बनाते हैं। इसे 50-60 हजार में बेच देते हैं। च्वाइस सेंटर वाले इसी आईडी का उपयोग कर रहे थे।

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