पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

प्रदेश में 11.75 लाख टन की जरूरत:रोपाई के लिए जरूरी डीएपी की भारी कमी निजी दुकानों से खरीदने को मजबूर किसान

रायपुर/ दुर्ग/बिलासपुर11 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
अभी तक मिले 4.5 लाख टन खाद। - Dainik Bhaskar
अभी तक मिले 4.5 लाख टन खाद।

मानसून के समय पर पहुंचने से प्रदेश में खेती-किसानी के काम में तेजी आ गई है। अच्छी बारिश के कारण अधिकांश जिलों के किसान रोपाई शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन प्रदेश में खाद की किल्लत ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। समितियों में पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों से खाद खरीदना पड़ रहा है। नतीजा कई किसान संगठन विरोध में सड़कों पर उतरने की तैयारी भी कर रहे हैं।

प्रदेश में 2058 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से खाद का भंडारण और वितरण किया जाता है। रायपुर में कुल 126 समितियां हैं। भास्कर ने रायपुर, धमतरी, कांकेर, बिलासपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार समेत कुछ जिलों के दो दर्जन से ज्यादा सहकारी समितियों की पड़ताल की तो पाया कि अधिकांश समितियों में यूरिया और डीएपी की कमी है। वजह, मांग की तुलना में खाद नहीं मिल रहा।

किसानों की चिंता है कि समय पर खाद नहीं मिला तो रोपाई का काम पिछड़ जाएगा। रायपुर से लगे गांवों की पड़ताल में पता चला कि खोरपा, सेजबहार, सिवनी, खिलोरा, दतरेंगा में यूरिया और पोटाश तो है लेकिन डीएपी की कमी है। किसानों को रोपाई के समय ही डीएपी खाद की जरूरत होती है।

खोरपा के प्रभारी नोखेलाल साहू ने बताया कि वे आसपास की सात समितियों को खाद की सप्लाई करते हैं और उनके यहां अभनपुर के झांकी गोदाम से खाद की सप्लाई होती है। लेकिन झांकी में ही डीएपी नहीं है। दतरेंगा के समिति प्रबंधक जयकुमार सपहा ने बताया कि पोटाश और यूरिया तो है लेकिन उनके यहां भी डीएपी नहीं है।

बिलासपुर में भी किसान भटक रहे खाद के लिए
बिलासपुर के ग्राम देवरी, हरदी, कोरमी, बसिया और बन्नाकडीह जैसे कई गांव हैं जहां खाद नहीं मिलने से किसान परेशान है। डीएसपी और पोटाश नहीं मिल रहा है। हरदी गांव के किसान संतोष कौशिक ने बताया कि डीएपी लेने वह तीन बार जा चुके हैं लेकिन समिति में उपलब्ध नहीं है। शिवकुमार साहू का कहना है कि समय पर खाद ही नहीं मिलेगा तो खेती कैसे कर पाएंगे? बसिया गांव के पलटू धुरी ने बताया कि समिति से खाद के बगैर ही लौटना पड़ा। कोरमी गांव के बैसाखू यादव ने भी डीएपी नहीं होने की बात कही।

डीएपी की जगह भेज दिया इफको
हरदी गांव के समिति संचालक नाेहर सिंह ने बताया कि उसके पास 1400 बाेरी यूरिया, 90 बोरी पोटाश है लेकिन डीएपी एक भी बोरी नहीं है। समिति संचालक ने बताया कि रिलीज आर्डर कटे 15 दिन हो चुके हैं लेकिन सप्लाई नहीं हुई है। सेलर समिति संचालक नारायण कश्यप के अनुसार एक गाड़ी डीएपी आकर खत्म हो चुकी है लेकिन दूसरी बार गाड़ी नहीं आई है रिलीज आर्डर कट चुके हैं। देवरी सहकारी समिति संचालक लक्ष्मी श्रीवास के अनुसार किसान डीएपी की मांग कर रहे हैं। नेवरा के समिति संचालक महेंद्र बघेल के अनुसार उनके यहां भी डिमांड भेजी जा चुकी है लेकिन अभी तक उन्हें सप्लाई नहीं की गई है।

दुर्ग में भी किल्लत
दुर्ग में खरीफ फसल के लिए डीएपी की किल्लत बनी हुई है। इस वर्ष 95197 किसानों ने करीब 1.27 लाख हेक्टेयर में धान व अन्य खरीफ फसल की बुवाई की गई है। जिले की 90 सहकारी समितियों से किसानों को 6958 टन खाद मिला है। 10974 टन यूरिया में से 9491 टन, 4433 टन सुपर फास्टफेट खाद में से 3320 टन और 4591 टन पोटाश में से 2867 टन का वितरण हो गया है।

खबरें और भी हैं...