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दोस्ती का फर्ज निभाने वाले दोस्तों की कहानी:पिता की हार्ट सर्जरी के लिए नहीं थे पैसे दाेस्तों ने 20 घंटे में जमा किए 7 लाख

रायपुर8 दिन पहले
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दोस्तों के साथ अंकित शर्मा (बाएं)।

ये कहानी है एनआईटी रायपुर के माइनिंग डिपार्टमेंट के स्टूडेंट अंकित शर्मा और उनके दोस्तों की। 2016 में कैंसर के कारण मां मधु शर्मा को खो चुके अंकित के लिए पिता कपिल शर्मा ही पूरा परिवार हैं। जब अचानक पिता की तबियत बिगड़ी तो मुश्किल हालात में दोस्त कृष्णकांत ढहरिया, नितिन अग्रवाल, मोहित राय और विकास लगरा हर कदम पर ढाल बनकर अंकित के साथ खड़े हो गए। 22 साल के अंकित के 56 साल के पिता कपिल की तबियत जून से लगातार खराब चल रही थी। कुछ दिन पहले चक्कर आया और वो वॉशरूम में ही गिर गए। तब अंकित घर में नहीं थे। खाना पकाने के लिए घर आने वाली बाई ने काॅल करके उन्हें ये जानकारी दी। वे भागे-भागे घर पहुंचे। हॉस्पिटल गए तो डाॅक्टर ने बताया कि पिता की स्थिति नाजुक है। पेसमेकर लगाना पड़ेगा। घबराने के बजाय अंकित ने हिम्मत से काम लिया। सबसे पहले टेम्परेरी पेसमेकर लगवाया और फिर परमानेंट पेसमेकर लगवाने के लिए दिल्ली के उस डाॅक्टर काे काॅल किया, जिन्हाेंने 2009 में पिता की किडनी ट्रांसप्लांट की थी। डाॅक्टर ने वक्त बर्बाद किए बिना तुरंत दिल्ली आने कहा। दाेस्त विकास ने ई-पास की व्यवस्था कराई और 24 जुलाई को अंकित पिता काे लेकर दिल्ली रवाना हाे गए। हार्ट स्पेशलिस्ट ने चेकअप के बाद बताया कि इंफेक्शन के कारण तुरंत ऑपरेशन नहीं कर सकते। पिता काे आईसीयू में एडमिट किया गया। हर बीतते दिन के साथ हॉस्पिटल का बिल भी बढ़ता गया। सारी बचत खत्म हो चुकी थी। पेसमेकर लगाने में छह लाख का खर्च और आना था। पैसाें की व्यवस्था के लिए अंकित बेहद परेशान थे। ऐसे में दोस्त कृष्णकांत, नितिन और मोहित ने खर्च की चिंता उन पर छोड़ने और सिर्फ पिता की सेहत का ख्याल रखने की बात कही। तीनों दोस्तों ने मिलकर क्राउड फंडिंग कैंपेन शुरू कर दिया। एनआईटी के एलुमिनी एसोसिएशन से जुड़े पूर्व छात्रों तक मैसेज पहुंचाकर उनसे मदद मांगी और महज 20 घंटाें के भीतर साढ़े सात लाख रुपए अंकित के खाते में पहुंच गए। 31 जुलाई की रात अंकित के पिता की हार्ट सर्जरी हुई, उन्हें पेसमेकर लगाया गया है। पिता की तबियत अब बेहतर है। सिटी भास्कर से बातचीत में अंकित ने बताया, मुझे ताे समझ ही नहीं आ रहा था कि पिता की देखभाल करूं या पैसाें की व्यवस्था। दाेस्ताें के साथ की वजह से ही सब ठीक हाे पाया।

सता रहा था कोरोना का डर, सहेली ने हर वक्त की मदद

ये कहानी है अदिति पटेल और उनकी सहेली कल्पना नेगी की। खैरागढ़ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट अदिति को लॉकडाउन के बीच ये खबर मिली कि उनका सलेक्शन दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स के स्कल्पचर डिपार्टमेंट में बतौर अस्सिटेंट प्रोफेसर हो गया है। खबर खुशी थी, लेकिन अदिति के चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं। वजह थी दिल्ली में बड़े स्तर पर फैला काेरोना। ऐसे में दिल्ली में घर ढूंढने से लेकर वहां जाने तक में कल्पना ने मदद की। 14 जुलाई को अदिति दिल्ली शिफ्ट हो गई। उन्होंने बताया, दिल्ली जाने से पहले बहुत घबरा गई थी। डर लग रहा था कि मुझे भी कोरोना न हो जाए। ऐसे वक्त में अपनी सेहत की चिंता किए बिना कल्पना हर वक्त मेरे साथ खड़ी रही।

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