कोरोना का कहर:बुखार, सर्दी-खांसी से भी फेफड़ों में इंफेक्शन; इसी वजह से ऐसे मरीजों की एक-दो दिन में ही उखड़ गईं सांसें

रायपुर9 महीने पहले
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इन दिनों कोरोना से उन लोगों की मौत भी हो रही है, जो बुखार, सर्दी व खांसी से पीड़ित हो रहे हैं। प्रदेश में 35 फीसदी से ज्यादा मरीजों की मौत अस्पताल पहुंचने के 24 घंटे के भीतर हो रही है। कई ऐसे हैं, जो होम आइसोलेशन या घर से अस्पताल के रास्ते में दम तोड़ रहे हैं। स्थिति भयावह इसलिए बन रही है, क्योंकि लोग अभी भी लक्षण दिखते ही जांच कराने में आनाकानी कर रहे हैं।

पहले स्वास्थ्य विभाग केवल 1 या 2 पेज का कोरोना बुलेटिन जारी करता था। जब बुलेटिन 9 पेज का आ रहा है। गुरुवार को रिकार्ड 207 मरीजों की मौत हुई, जो अब तक का सर्वाधिक है। औसतन हर घंटे 9 लोगों ने कोरोना से दम तोड़ा है। हम ये आंकड़े इसलिए बता रहे हैं, क्योंकि अब बुखार, सर्दी व खांसी को हल्के में न लें। डरें नहीं, बल्कि तत्काल जांच व इलाज कराएं। इससे कोरोना को हराया जा सकता है।

पिछले 18 दिनों में केवल कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़ी है। जिन्हें डायबिटीज, हायपरटेंशन व दूसरी गंभीर बीमारी नहीं है, वे भी संक्रमण के कुछ दिनों में या कुछ घंटों में दम तोड़ रहे हैं। इसमें कहीं न कहीं लापरवाही जिम्मेदार है। गुरुवार की बात करें तो 207 में केवल कोरोना से (को-मॉर्बिडिटी नहीं) 124 लोगों की मौत हुई। यानी 60 फीसदी मरीजों ने केवल कोरोना से दम तोड़ा। पिछले 24 घंटे में मौत का यह नया रिकार्ड है।

कोरोना के बाद सबसे ज्यादा मौत डायबिटीज व हायपर टेंशन वाले
केवल कोरोना से मौत के बाद को-मॉर्बिडिटी में डायबिटीज व हायपर टेंशन वाले मरीज हैं। कुछ मरीज हार्ट डिसीज वाले हैं। गुरुवार 83 लोगों की मौत कोरोना के साथ डायबिटीज, बीपी व हार्ट डिसीज वालाें की हुई। ये भी चौंकाने वाला है। डायबिटीज व हाई बीपी को कॉमन बीमारी माना जाता है। हर 10वां व्यक्ति इससे पीड़ित है। बीमारी का सही इलाज नहीं कराने पर यह भारी पड़ रहा है। आइसोलेशन व कोरोना केयर सेंटर में भी मौत डबल म्यूटेशन के बाद अब होम आइसोलेशन व कोरोना केयर सेंटरों में भी मरीजों की मौत होने लगी है।

29 मई 2020 से अब तक 100 से ज्यादा मरीजों की होम आइसोलेशन इतने ही मरीजों की मौत कोरोना केयर सेंटरों में हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि कई लोग पात्रता न रखते हुए भी होम आइसोलेशन में इलाज करवाता है। नए नियमों में 55 वर्ष वालों को होम आइसोलेशन की सुविधा नहीं दी जा सकती। बुलेटिन देखने से पता चलता है कि ऐसे लोगों की मौत होम आइसोलेशन में हो रही है।

केस-एक रायपुर के 51 वर्षीय व्यक्ति को गुरुवार को बुखार के साथ खांसी हुई। कुछ देर बाद में तकलीफ हाेने लगी। परिजन उसे मेडिकल कॉलेज लेकर गए, जहां इलाज के कुछ घंटे में उनकी मौत हो गई।
केस-दो शिवानंदनगर के 46 वर्षीय व्यक्ति को बुधवार को बुखार के बाद सांस में तकलीफ शुरू हुई। उनका इलाज मेडिकल कॉलेज में चला, फेफड़े में इंफेक्शन निकला। 24 घंटे के भीतर मृत्यु हो गई।

एक्सपर्ट व्यू
^सर्दी, खांसी व बुखार कोरोना के प्राइमरी लक्षण है। इसका सही इलाज नहीं होने पर सांस लेने की तकलीफ बढ़ जाती है। यहीं से मरीजों की स्थिति गंभीर होने लगती है। ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होने व समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने से मरीजों की स्थिति गंभीर हो रही है।
- डॉ. आरके पंडा, सदस्य कोरोना कोर कमेटी

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