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10 एकड़ में अवैध प्लाटिंग:दर्जनभर बिल्डरों या पार्टनरों पर एफआईआर; 22 एकड़ की अवैध प्लाटिंग में 50 से ज्यादा और लोगों की फाइल भी तैयार

रायपुर5 दिन पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो

आउटर में अवैध प्लाटिंग की बाढ़ जिन लोगों की वजह से आई, उनके खिलाफ एक बार फिर नगर निगम ने एफआईआर दर्ज करने का सिलसिला शुरू कर दिया। ताजा कार्रवाई भाठागांव में 8 एकड़, रायपुरा में 1 एकड़ तथा खमतराई-गोगांव में 1 एकड़ से ज्यादा में अवैध प्लाटिंग कर कालोनी बसाने की कोशिश करनेवालों के खिलाफ की गई है।

रायपुर एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर निगम अफसरों ने शहर के दो थानों में 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर करवाई है। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि इनमें से कुछ बिल्डर हैं तो कुछ उनके पार्टनर। यही नहीं, 22 एकड़ अवैध प्लाटिंग के मामले में 50 और लोगों की सूची तैयार है, जिनके खिलाफ इसी माह के अंत तक एफआईआर होगी।

जिन 50 लोगों के खिलाफ एफआईआर कराई जानी है, उनके केस तैयार कर लिए गए हैं। ये निगम के सभी 10 जोन के हैं। ज्यादातर प्लाटिंग की जांच रिपोर्ट एसडीएम दफ्तर से निगम के जोन कार्यालयों में पहुंच गई है। ताजा कार्रवाई भी आउटर में अवैध प्लाटिंग की है। केवल भाठागांव और कुशालपुर में ही 8 एकड़ से ज्यादा की अवैध प्लाटिंग निकली है। यहां खेतों में प्लाट काटकर बेच दिए गए हैं और डेढ़ से से ज्यादा लोगों ने इसे खरीदकर रजिस्ट्री भी करवा ली है। इस कार्रवाई से जमीन खरीदनेवालों की मुसीबत बढ़ जाएगी, क्योंकि जब तक अवैध प्लाटिंग को टाउन प्लानिंग के नियम-कायदों के तहत वैध नहीं करवाया जाएगा और आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होगी, लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक नहीं मिलेगा।

छोटा प्लाट खरीदकर लगी हुई सरकारी जमीन हड़पी, बड़ा नक्शा बनाकर काट दिए गए प्लाट
अवैध प्लाटिंग की जांच करने वाले अफसरों ने दैनिक भास्कर को बताया कि इन मामलों में सभी ने एक सा तरीका अपनाया है। उन्होंने ऐसी सरकारी जमीन तलाशी, जो बरसों से खाली थी। फिर इससे लगकर आधा-एक एकड़ जमीन खरीदी और उसमें सरकारी जमीन को मिला लिया। फिर सबका एक बड़ा नक्शा बनाया और खुद सादे कागज में प्लाट काटकर तथा नंबर डालकर रजिस्ट्री शुरू कर दी। पूरे प्लाट में नाप-नापकर एक साइज के छोटे प्लाट निकाले, चूने से लाइन खींची और नंबर खुद लिख दिए। बीच में 15 से 20 फीट की जगह को सड़क बताकर मुरुम डलवा दी। रेट कम रहने की वजह से लोग झांसे में आकर ऐसे प्लाट खरीदते गए। शहर में ऐसे सैकड़ों लोग इस तरह की अवैध प्लाटिंग में रकम फंसा चुके हैं।

यहां हो चुकी है कार्रवाई : अप्रैल में यानी दूसरे लॉकडाउन से पहले निगम के अमले ने चंगोराभाठा, कबीरनगर, सरोना में शीतला तालाब के पास, चाणक्य कॉलेज के पास डूमरतालाब, दुर्गा विहार में कामरेड मुखर्जी वार्ड में, गोगांव, भनपुरी, बीरगांव, खम्हारडीह, कचना समेत आउटर में अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई की थी। इसके बाद अब अवैध प्लाटिंग करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

इनके खिलाफ एफआईआर
निगम के जोन-5 के इंजीनियर सैय्यद जोहेब ने पुरानी बस्ती में एक साथ 10 एफआईआर दर्ज कराई हैं। 9 एफआईआर भाठागांव और एक कुशालपुर में अवैध प्लाटिंग की है। इनमें रमेश गंगवानी, राजेश पटेल, सावित्री सोनकर, संगीता गोलदार, गनपत साहू, गंगाराम, रामलाल, शिवचरण, भोला, महेश भोई, रविंद्र मिश्रा, धन कुमार, नंद कुमार और केकती सोनकर को आरोपी बनाया गया है। इसी तरह, जोन-10 के प्रभारी कार्य सहायक बलराम शर्मा ने अवैध प्लाटिंग के तीन मामलों में अर्पणा झा, हंसा पटेल और पार्वती बेन पटेल के खिलाफ एफआईआर करवाई है।

भास्कर नॉलेज | अवैध प्लाटिंग के नुकसान, बचने के लिए जरूरी सावधानियां
न नक्शा न सुविधा

  • अवैध प्लाटिंग में प्लाट लिया तो निगम से नक्शा पास नहीं हो, यानी मकान नहीं बना सकते।
  • नक्शा पास नहीं होने से बैंकों से लोन नहीं मिलता। सर्च के दौरान खारिज होते हैं अावेदन।
  • पूरी रकम देकर ऐसा प्लाट खरीद भी लिया तो उसे दोबारा बेचना मुश्किल, क्रेता नहीं मिलते।
  • बिल्डर रजिस्ट्री करवा देते हैं। लेकिन निगम अवैध बताकर बिना जुर्माने के कब्जा नहीं देता।
  • जब तक प्लाटिंग वैध न हो, वहां बिजली, सड़क और पानी की सुविधा भी नहीं मिलती है।

बच सकते हैं ऐसे

  • प्रॉपर्टी खरीदने से पहले लिंक डॉक्यूमेंट चेक करें ताकि पता चले कि खरीदी-बिक्री कितनी बार हुई।
  • जो प्लाट खरीद रहे हैं, उसकी पुरानी रजिस्ट्री की कॉपी से चेक करें कि डीटेल मिल रहे हैं या नहीं।
  • बेचने वाले का आइडेंटिटी प्रूफ डॉक्यूमेंट्स के साथ मैच करें और पावर ऑफ अटॉर्नी कॉपी भी लें।
  • घर बनाने के लिए वही जमीन खरीदें, जहां लैंडयूज आवासीय है। कृषि या औद्योगिक न हो।
  • यह भी देखें कि जो प्लाट खरीद रहे हैं, उसका लेआउट निगम-टाउन प्लानिंग से मंजूर है या नहीं।
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