हादसे में अपनों को खोने वालों की कहानी:बेटा बोला- पिता की मौत की खबर की बजाय अस्पताल वालों ने पेमेंट के लिए किया फोन; दूसरे युवक ने कहा- लाशों के बीच अपना भाई ढूंढकर आ रहा हूं

रायपुर6 महीने पहले
तस्वीर रायपुर की है। युवती के पिता ईश्वर राव को लेकर प्रशासन ने कहा कि दम घुटने से उनकी मौत हुई, मगर अस्पताल में उनका जला हुआ शव घंटों तक पड़ा रहा।

रायपुर के राजधानी हॉस्पिटल में लगी आग में 5 लोगों की मौत हो गई। हादसे में मरने वालों के परिजन को सरकार ने 4 लाख रुपए देने का एलान किया है। शनिवार को दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच ये घटना हुई। अस्पताल में दो दर्जन से अधिक कोरोना मरीज भर्ती थे। आग लगने की वजह से किसी का दम घुट गया तो कोई कोविड से इतना कमजोर हो चुका था कि अपने बेड से उठकर भाग भी न सका। कुछ मरीज तो जिंदा ही जल गए। मृतकों के परिजनों ने दैनिक भास्कर को अपनी जिंदगी की इस बड़ी त्रासदी के बारे में जो कुछ बताया पढ़िए उन्हीं के शब्दों में...

‘हम पेमेंट के लिए एटीएम खोज रहे थे, इधर मेरे मेरे पिता जिंदा जल रहे थे’
हादसे में जान गवाने वाले इश्वर राव नाम के बेटे दिल्ली राव ने बताया, ‘मैं आज अपनी, मां, बहन को लेकर एम्स गया था। हम खुद का कोविड टेस्ट करवा रहे थे, तब दोपहर को करीब 2 बजे आस-पास अस्पताल वालों ने फोन किया कि पेमेंट करना है। इस वक्त अस्पताल में आग लग चुकी थी, मुझे किसी ने कुछ नहीं कहा।’ दिल्ली की बहन ने बताया, ‘हम एटीएम खोज रहे थे, कि कहीं से पैसे लाकर अस्पताल वालों को दें, ताकि मेरे पापा की अच्छी देख-रेख हो। मगर तब तक तो वो जल चुके थे।’

तस्वीर रायपुर के राजधानी अस्पताल की जहां ये हादसा हुआ।
तस्वीर रायपुर के राजधानी अस्पताल की जहां ये हादसा हुआ।

5 घंटे चींखते रहे- अरे लाश तो दे दो
दिल्ली ने बताया, ‘हम अस्पताल के सामने एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ी देखकर डर गए। कोई कुछ नहीं बता रहा था। अस्पताल वाले बात करने को राजी नहीं थे। मैंने कुछ नही सुना और ऊपर जाकर देखा, बेड पर मेरे पिता जले पड़े हुए थे। मैंने अपने हाथ से उनके चेहरे पर पड़ा कपड़ा हटाया तो देखा उनकी डेथ हो चुकी थी। हम 5 घंटे तक चींखते रहे कि कोई उन्हें बाहर निकाल दो, अरे लाश तो दे दो मगर अस्पताल वालों ने कुछ नहीं सुनी, यूं ही हमें छोड़ दिया। पुलिस वालों ने कह दिया कि सुबह पंचनामे के बाद लाश दी जाएगी।’

बेबसी के आंसू थम नहीं रहे थे, अपनों की इलाज में जिस अस्पताल में आए वहां आग ने उम्मीदों को खाक कर दिया।
बेबसी के आंसू थम नहीं रहे थे, अपनों की इलाज में जिस अस्पताल में आए वहां आग ने उम्मीदों को खाक कर दिया।

अंदर लाशें ही लाशें थी सर, बड़े भाई का अधजला शव पड़ा है
कवर्धा से आए प्रिय प्रकाश ने बताया, ‘मेरे बड़े रमेश साहू इस अस्पताल में 9 दिनों से एडमिट थे। मैं दिन भर उनके साथ था। करीब पौने दो बजे मैं दवाएं वगैहर लाकर देने के बाद रूम पर गया। पहुंचा तो करीब 15 मिनट बाद मुझे कॉल आया कि यहां आग लग गई है। मैं हड़बड़ाकर यहां पहुंचा। कोई कुछ जानकारी ही नहीं दे रहा था। मेरे पेशेंट को निकालने की मिन्नतें कर रहा था मगर किसी ने नहीं सुना। मैं जैसे-तैसे अंदर गया तो देखा कई लाशें पड़ी थीं, मैं गिन नहीं पाया मगर जो लोग निकालकर ले जा चुके थे, वो ले गए। अब भी वहां लाशें पड़ी हैं। अस्पताल का स्टाफ एक घंटे तक मुझे घुमाता रहा, मैं पूछता रहा मेरे भइया कहां है, मुझे जवाब मिला अरे रुक जाओ यार अभी हम बिजी हैं, कहीं इधर-उधर हो गए होंगे। शवों के बीच मैंने देखा तो मेरे बड़े भाई की आधी जली लाश पड़ी थी। वो ही मेरे भाई थे।’

अस्पताल के पिछले हिस्से की पार्किंग में कुछ मरीजों को कुर्सी पर बैठाकर ऑक्सीजन दिया गया।
अस्पताल के पिछले हिस्से की पार्किंग में कुछ मरीजों को कुर्सी पर बैठाकर ऑक्सीजन दिया गया।

लोग चींखते रहे एंबुलेंस ले आओ- मरीजों को सही जगह तो पहुंचा दो
अस्पताल में जिस वक्त हादसा हुआ यहां 50 के करीब मरीज थे। ऊपरी इमारत का कांच तोड़कर धुआं बाहर निकाला गया। मरीजों के परिजन खुद अपने जोखिम पर मरीजों को बाहर निकालने की व्यवस्था कर रहे थे। कुछ लोग चीख रहे थे, रो रहे थे बस अस्पताल के स्टाफ से यही कह रहे थे कि मेरे मरीज को बाहर निकाल दो, कोई उन्हें सही जगह पर पहुंचा दो। अस्पताल के बाहर स्टाफ और मरीज के घर वालों ने कुछ एंबुलेंस बुलवाईं।

कुछ मरीजों की किस्मत अच्छी थी वो सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए।
कुछ मरीजों की किस्मत अच्छी थी वो सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए।

यहां जिसे जो समझ आ रहा था कर रहा था। कुछ लोगों ने पास के दूसरे अस्पताल में अपने मरीज को भेजा। कुछ लोगों के मरीज रात 9 बजे तक अस्पताल में ही फंसे रहे। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने अस्पताल में काम करने वाले एक कर्मचारी से पूछा कि मरीजों को कहां भेजा जा रहा है। उसने जवाब दिया तहसीलदार सर से पूछिए। रात के वक्त यहां कलेक्टर भारतीदासन और SSP अजय यादव हालात का जायजा लेने पहुंचे अब जरुरत के हिसाब से बाकि बचे मरीजों को प्राइवेट या सरकारी कोविड सेंटर में शिफ्ट किया जा रहा है।

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