रायपुर...भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:पहली स्मार्ट रोड 10 माह में बदसूरत, 6 और सड़क किनारे लगाए गए पेड़ सूखे; पेवर ब्लॉक उखड़े, नालियां भी बर्बाद

रायपुर2 महीने पहले
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सड़क के आसपास केवल रंगरोगन और सौंदर्यीकरण में ही लाखों रुपए खर्च कर दिए गए। - Dainik Bhaskar
सड़क के आसपास केवल रंगरोगन और सौंदर्यीकरण में ही लाखों रुपए खर्च कर दिए गए।

राजधानी में स्मार्ट सिटी 6 सड़कों को स्मार्ट रोड में बदलने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। लेकिन करीब 10 माह पहले बनाई गई ऑक्सीजोन को राजातालाब से जोड़ने वाली शहर की पहली स्मार्ट सड़क बदहाल हो गई है। करीब 1.20 करोड़ खर्च कर 600 मीटर लंबी और 14 मीटर चौड़ी इस स्मार्ट सड़क को कोरोना काल में बनाया गया था।

शहर में स्मार्ट सिटी के ये उन चुने हुए कामों में था जिसमें कोविड और लॉकडाउन के दौरान भी काम नहीं रुका। लॉकडाउन और स्थिति सामान्य होने के बाद स्मार्ट सिटी ने 24 नवंबर 2020 को सबसे पहले इसी काम का लोकार्पण किया था। स्मार्ट सिटी ने जब इस प्रोजेक्ट को लांच किया था, उस वक्त इसमें जो कंपोनेंट गिनवाए थे, उनमें से एक भी काम यहां नहीं हो पाया।

सड़क के आसपास केवल रंगरोगन और सौंदर्यीकरण में ही लाखों रुपए खर्च कर दिए गए। स्मार्ट रोड में पैदल चलने वालों के लिए पाथ वे, ग्रीनरी, ऑटो-साइकिल स्टैंड, बैठने के लिए बेंच और वाशरूम जैसी सुविधा भी अब तक नजर नहीं आई, बल्कि जो बनाया गया वह ध्वस्त हो गया। भास्कर ने शहर की इस पहली स्मार्ट सड़क की जमीनी पड़ताल की, तो हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं।

स्मार्ट के नाम पर सिर्फ चौड़ीकरण
ऑक्सीजोन की विस्तारित योजना यानी दूसरे चरण के काम के दौरान आसपास के सरकारी दफ्तरों-घरों को तोड़कर यहां स्मार्ट रोड प्लान की गई थी। करीब 10 मीटर चौड़ी पुरानी सड़क की जगह इसे बनाया गया। हालांकि राजधानी में स्मार्ट सिटी ने सबसे पहली स्मार्ट सड़क का काम महाराजबंध तालाब में शुरु किया था। लेकिन कुछ मीटर बनाने के बाद ये काम बंद हो गया था। उसके बाद कोरोना काल के दौरान इस नए प्रोजेक्ट को लांच किया गया। चूंकि ये स्मार्ट सड़क पहले बनकर तैयार हुई इसलिए यही शहर की पहली स्मार्ट रोड कहलाई।

हर एमडी के साथ ही बदलता गया प्लान
स्मार्ट सिटी ने शहर के कोर एबीडी इलाके (घने शहर के करीब 16 वार्ड) में पहले करीब 40 किमी लंबी 300 करोड़ की स्मार्ट सड़कों के प्रोजेक्ट पर काम करना शुरु किया था। व्यवहारिक तौर पर ये प्लान उचित नहीं पाया गया। इसके बाद टुकड़ों में छोटी-छोटी स्मार्ट रोड योजना प्लान हुई। पहली स्मार्ट रोड के बाद रायपुर में स्मार्ट सिटी करीब 32 करोड़ में 6 नई स्मार्ट रोड बनाने जा रहा है। जिसमें से तीन काम शुरु हो चुका है।

नई स्मार्ट सड़कों पर पूरा बही-खाता

  • जयस्तंभ चौक से शास्त्री चौक तक 0.68 किमी - लागत 6.42 करोड़
  • जयस्तंभ चौक से फाफाडीह चौक 1.44 किमी - लागत 9.20 करोड़
  • कलेक्टोरेट से खालसा स्कूल तक 0.5 किमी - लागत 1.64 करोड़
  • शास्त्री चौक से महिला थाना तक 1.15 किमी - लागत 8.61 करोड
  • कोतवाली से निगम मुख्यालय तक 0.27 किमी - लागत 1.62 करोड़
  • महिला थाना से राजीव गांधी चौक- 0.471 किमी - लागत 1.55 करोड़
  • - जीई रोड आमापारा से लाखेनगर - 1.198 किमी - लागत 4.47 करोड़

पाथ-वे पर अतिक्रमण
स्मार्ट रोड के आसपास बने व्यवसायिक इमारतें और परिसर यहां पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए पाथ वे पर अतिक्रमण कर लिया है। कब्जे की वजह यही है कि पेवर ब्लॉक लगाने का काम अब तक अधूरा है, इसलिए लोगों ने छोटा-मोटा कारोबार शुरू कर दिया है। जो पेवर ब्लॉक लगे थे, वह भी उखड़ रहे हैं। इससे पाथ-वे पर गड्ढा हो गया है। इस सड़क पर अंडरग्राउंड केबल के नाम पर केवल डिवाइडर पर लगे बिजली पोल के तार हैं, जो शहर के कई हिस्सों में हैं।

स्मार्ट रोड के मापदंडों जैसा अंडरग्राउंड सीवरेज भी यहां नहीं है। इसी तरह, डिवाइडर पर बड़े-बड़े पौधे रोपे गए थे, जिनके सूख जाने की आशंका थी और बरसात के बावजूद ऐसा ही हुआ है। यही नहीं, स्मार्ट सिटी ने डिवाइडर पर 10 फीट से ऊंचे पेड़ पौधे लगाने की लाखों रुपए की एक और स्कीम यहां लांच की थी, लेकिन इसकी जगह छोटे-छोटे पाम ट्री लगा दिए गए जो इतनी बारिश के बावजूद आखिरकार हरे नहीं हो पाए।

  • जिस एजेंसी ने स्मार्ट सड़क बनाई, मेंटेनेंस की जिम्मेदारी उनकी है। पेवर ब्लॉक से जुड़े काम जल्द पूरा करने के लिए कह चुके हैं। - एसके सुंदरानी, जीएम, स्मार्ट सिटी