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सिलगेर पर अड़ी सरकार:आदिवासियों के विरोध के बावजूद CRPF कैम्प वहीं लगेंगे, मंत्री रविंद्र चौबे बोले- उसी इलाके में छह और कैम्प बनाएंगे

रायपुर4 महीने पहले
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मंत्री रविंद्र चौबे ने नक्सल क्षेत्रों में कैम्प के विरोध को लेकर बड़ा बयान दिया है। साफ संकेत हैं कि सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है। - Dainik Bhaskar
मंत्री रविंद्र चौबे ने नक्सल क्षेत्रों में कैम्प के विरोध को लेकर बड़ा बयान दिया है। साफ संकेत हैं कि सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है।

बस्तर के नक्सल प्रभावित सुकमा और बीजापुर जिलों में सुरक्षा बलों और स्थानीय आदिवासी समुदाय के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। आदिवासी, सिलगेर में CRPF कैम्प खोले जाने का विरोध कर रहे हैं। वहां हुई गोलीबारी में 3 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी सरकार वहां कैम्प बनाए रखने को लेकर अड़ी हुई है। मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा है कि सरकार उसी इलाके में छह और कैम्प बनाएगी।

राज्य मंत्रिपरिषद के प्रवक्ता और कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा, "सिलगेर मामले में कैम्प बनाया जा रहा था। वहां किन लोगों के द्वारा विरोध किया गया यह बहुत स्पष्ट है। केवल सिलगेर का मामला नहीं है। आने वाले दिनों में हम उसके आगे के रास्ते में 6 और कैम्प बना रहे हैं।" कृषि मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि तनाव अभी खत्म नहीं होगा। सरकार एंटी नक्सल मोर्चे पर मजबूत घेराबंदी और सड़कों की सुरक्षा के लिए ऐसे कैम्प जरूरी बता रही है। पुलिस का कहना है कि सिलगेर और आसपास के गांवों में आदिवासी नक्सलियों के प्रभाव में हैं। उन्हीं के कहने पर उस इलाके में कैम्प का विरोध किया जा रहा है। पिछले 18 दिन से वहां ग्रामीण विरोध करने जुट रहे हैं।

सिलगेर से तर्रेम की सड़क है महत्वपूर्ण
बताया जा रहा है कि सुकमा जिले का सिलगेर गांव पहुंच विहीन है। यहां से बीजापुर के तर्रेम तक एक सड़क बन रही है। इस सड़क का आगे भी विस्तार होना है। नक्सली प्रभाव वाले इलाके में इस सड़क की सुरक्षा के लिए CRPF के इन कैम्प की महत्वपूर्ण भूमिका हाे सकती है। सरकार को लगता है कि अगर कैम्प नहीं बन पाए तो सड़क बनाना भी असंभव हो जाएगा।

12 मई से चल रहा है विरोध
11-12 मई की रात में CRPF ने कैम्प के लिए सिलगेर में बाड़बंदी की। 12 मई की सुबह ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया। उस दिन CRPF और DRG के जवानों ने उन्हें खदेड़ दिया। 13 मई को ग्रामीणों ने कैम्प के पास ही आंदोलन शुरू किया। 14 मई को ग्रामीणों पर लाठीचार्ज हुआ। कई लोग घायल हुए। 17 मई को भी ऐसा ही विरोध प्रदर्शन चल रहा था, तभी पुलिस ने गोली चला दी। तीन लोगों की गोली लगने से मौत हो गई। भगदड़ में गिरने से एक गर्भवती महिला साेमली भी घायल हो गई। 25 मई को उसकी भी मौत हाे गई। प्रदर्शन अब भी जारी है। सर्व आदिवासी समाज समेत दर्जन भर से अधिक संगठनों ने स्थानीय लोगों के समर्थन में कल प्रदर्शन किया। राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की मांग की जा रही है।

सिलगेर में प्रदर्शनकारी आदिवासियों से चर्चा करते हुए जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि।
सिलगेर में प्रदर्शनकारी आदिवासियों से चर्चा करते हुए जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि।

विपक्ष की राजनीति भी तेज
इस गोलीकांड ने बस्तर में विपक्ष खासकर भाजपा को बड़ा मौका दिया है। करीब दो सप्ताह तक बिना किसी प्रतिक्रिया के चुप बैठी रही भाजपा अब इस मुद्दे पर आक्रामक है। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने एक जांच दल बनाया है। आरोप है कि पुलिस ने जांच दल को सिरगेल जाने से रोक दिया। इस बीच जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का एक जांच दल घटनास्थल पर ग्रामीणों से बातचीत कर लौट आया है।