भास्कर पड़ताल:मृत्यु के सरकारी आंकड़ों में फिर गड़बड़, राज्य और जिले में 299 मौतों का अंतर

रायपुर6 महीने पहलेलेखक: अमिताभ अरुण दुबे
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  • 28 अप्रैल तक राज्य कंट्रोल रूम में 2269 मौतें, स्वास्थ्य विभाग में 2568 दर्ज

कोरोना से राजधानी में मौतें तो बढ़ी ही हैं, जिला और राज्य के आंकड़ों में 28 अप्रैल तक इतना बड़ा अंतर नजर आ रहा है कि मौतें छिपाने का शक होने लगा है। भास्कर टीम ने राज्यस्तरीय कोरोना कमांड सेंटर और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ डिपार्टमेंट में दर्ज राजधानी वाले जिले रायपुर में कोरोना से हुई मौतों के आंकड़ें का बारीकी से अध्ययन किया और पाया कि दोनों आंकड़ों में 299 मौतों का अंतर आ गया है। पूरे कोरोना काल यानी पिछली और मौजूदा लहर को मिलाकर जिले का मौतों का आंकड़ा 28 अप्रैल को 2568 है। लेकिन इसी विभाग के राज्यस्तरीय कंट्रोल सेंटर में 2269 मौतें ही दर्ज हुई हैं।

मौतों की संख्या में बड़ा अंतर पिछले तीन दिन के आंकड़ों में भी है। रायपुर सीएमओ कार्यालय की ओर से जारी पिछले तीन दिन के बुलेटिन में 26 तारीख को रायपुर में 73, 27 तारीख को 76 और 28 तारीख को 77 मौत दर्ज हुई। इस तरह, तीन दिन में जिले के मुताबिक जहां 226 मौत हुई है, जबकि स्टेट हेल्थ बुलेटिन ने 26 अप्रैल को 70, 27 को 54 और 28 अप्रैल को 77 मौतें दर्ज की हैं। इस तरह, सिर्फ तीन दिन के आंकड़ों में ही 75 मौतों का अंतर आ गया है।

एक्टिव मरीज और संक्रमितों की संख्या में भी काफी अंतर

एक्टिव मरीजों और संक्रमितों की कुल तादाद में भी जिला स्वास्थ्य कार्यालय के आंकड़े और स्टेट विभाग के मीडिया बुलेटिन में अंतर नजर आ रहा है। 28 तारीख की स्थिति में रायपुर में स्टेट हेल्थ विभाग के मीडिया बुलेटिन के मुताबिक केवल 10812 ज्यादा सक्रिय मरीज दिखाए गए। जबकि सीएमओ विभाग के आंकड़ों के मुताबिक ये संख्या 22428 है।

यानी दोनों के बीच 12 हजार से ज्यादा का फर्क है। राज्य कमांड कंट्रोल के मुताबिक इसी दिन यानी 28 अप्रैल को मरीजों की कुल संख्या 1.38 लाख से ज्यादा बताई गई। जबकि सीएमओ कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक ये आंकड़ा 1.36 लाख है। इसमें भी 2 हजार से ज्यादा का फर्क रहा है। इसी तरह रिकवरी करने वाले मरीजों की तादाद सीएमओ दफ्तर के मुताबिक इस दिन 1.11 लाख है जबकि स्टेट के आंकड़ों के मुताबिक ये 1.25 लाख है।

कई बार हो चुका जोड़-घटाना

हेल्थ विभाग के द्वारा हर दिन जारी किए जा रहे मीडिया बुलेटिन और जिलों की जानकारी में पहले भी फर्क आते रहा है। इसकी वजह से कई बार डेथ के आंकड़े पुरानी तारीखों के जोड़े या घटाए जाते रहे हैं। दरअसल, पिछले एक साल हेल्थ विभाग के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की ओर से लगातार जिलों को डेथ इनवेस्टीगेशन के बाद रियल टाइम पर मौत के आंकड़े रिपोर्ट करने के लिए सिखाया जा रहा है। लेकिन इस ट्रेनिंग का कोई असर नहीं दिख रहा है। मौत के आंकड़े में आ रहे इस फर्क की भास्कर ने जब पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

निजी अस्पताल नहीं दे रहे समय पर जानकारी

पड़ताल में पता चला है कि ज्यादातर प्राइवेट अस्पताल अपने हॉस्पिटल में हो रही मौत की जानकारी सही समय पर नहीं दे रहे हैं। रायपुर में पिछले दो हफ्तों में एक हजार से अधिक मौतों में से 483 से ज्यादा मौतें प्राइवेट अस्पतालों में हुई है। इनमें से 30 प्रतिशत से अधिक यानी करीब 150 मौत की जानकारी विलंब से पहुंची है। निजी अस्पतालों को मौत की जानकारी देने पर हेल्थ विभाग की ओर से बार बार चेतावनी भी भेजी जा चुकी है। लेकिन अभी तक इसमें सुधार नहीं आ पाया है।

जिलों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वो मौत के आंकड़े समय पर ही रिपोर्ट करें। रायपुर में 299 मौत का अंतर जो आ रहा है वो इसलिए कि कोरोना डेथ की पुष्टि होने में भी कई बार वक्त लगता है। ऐसे आंकड़ों को बाद में समायोजित कर शामिल किया जाता है। 28 अप्रैल के बुलेटिन में 60 मौत पुरानी शामिल की गई है।
-डॉ. सुभाष मिश्रा, मीडिया एवं कमांड एंड कंट्रोल सेंटर इंचार्ज, हेल्थ

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