भास्कर पड़ताल:सरकारी स्कूल खुले पर बच्चे आधे भी नहीं निजी स्कूल पैरेंट्स के राजी न होने से बंद

रायपुर2 महीने पहलेलेखक: सुधीर उपाध्याय
  • कॉपी लिंक
  • शहर व आउटर के 100 सरकारी स्कूल कंटेनमेंट जोन में आने से नहीं खुले

करीब 16 महीने बाद राजधानी में स्कूल तो खुल गए, लेकिन ये कोरोना की वजह से पैदा हुए हालात से उबर नहीं पा रहे हैं। शहर के 800 सरकारी स्कूलों में से करीब सौ स्कूल कंटेनमेंट जोन की सीमा में आ गए, इसलिए नहीं खुल पाए हैं। जो स्कूल खुले हैं, उनमें अब तक उपस्थिति बमुश्किल 40 फीसदी तक पहुंची है, यानी आधी से भी कम। उपस्थिति बढ़ रही है, लेकिन रफ्तार बहुत धीमी है।

इसकी तुलना में राजधानी के लगभग सभी प्रमुख निजी स्कूल खुले ही नहीं हैं। इसकी एकमात्र वजह यही है कि पैरेंट्स की समिति ने सहमति नहीं दी है, जबकि शासन की स्कूल खोलने की शर्तों में प्रमुखता से कहा गया है कि अगर पैरेंट्स तैयार नहीं होंगे तो स्कूल नहीं खुलेंगे, पढ़ाई ऑनलाइन ही होगी। राजधानी के कुछ सरकारी स्कूल खुले थे, लेकिन कंटेनमेंट जोन की सीमा में आने के कारण इन्हें बंद करना पड़ा है। इनमें खम्हारडीह, कटोरातालाब, अमलीडीह, रविग्राम, कचना, पंडरी, राजेंद्रनगर, संतोषीनगर, चौबे कालोनी, रायपुरा और मोवा समेत कई बड़े-छोटे सरकारी स्कूल शामिल हैं। राजधानी-आउटर में लगभग 700 सरकारी स्कूल खुले हैं और ऑफलाइन पढ़ाई हो रही है।

शिक्षा विभाग के अफसरों का कहना है कि औसत उपस्थिति 40 प्रतिशत से अधिक नहीं है। कुछ स्कूलों में यह ज्यादा है, तो कुछ में अब भी काफी कम बच्चे आ रहे हैं। जहां तक निजी स्कूलों का सवाल है, अधिकांश बंद हैं। भास्कर ने राजधानी में कुछ निजी स्कूलों के प्रबंधन से बात की तो ज्यादातर ने कहा कि तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका के कारण पैरेंट्स की समिति ही सहमति नहीं दे रही हैं। शासन ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि अगर पैरेंट्स सहमत नहीं होंगे, तो बच्चों को ऑनलाइन ही पढ़ाना होगा। ऐसे में ज्यादातर निजी स्कूल बंद हैं और ऑनलाइन पढ़ाई ही चल रही है। पिछले एक हफ्ते में राजधानी के एक-दो स्कूल माइक्रो कंटेनमेंट जोन की सीमा को छूने लगे, इसलिए बंद करने पड़े। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि स्कूल खुले 5 दिन बीत गए, लेकिन शहर के ज्यादातर निजी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई ही जारी है।

स्कूल खोलने की शर्तें कठिन

  • शहरी स्कूल खोलने के लिए संबंधित पार्षद एवं पालक समिति की अनुशंसा जरूरी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ग्राम पंचायत एवं स्कूल की पालक समिति की अनुशंसा जरूरी।
  • जहां कोरोना संक्रमण दर 7 दिनों में 1 प्रतिशत से कम, वहीं होगी ऑफलाइन पढ़ाई।
  • किसी भी विद्यार्थी को यदि सर्दी, खांसी, बुखार है, तो उसे कक्षा में नहीं बैठाया जाए।
  • - कंटेंनमेंट जोन के तहत आने वाले स्कूलों में ऑफलाइन पढ़ाई नहीं, यानी स्कूल बंद।

पैरेंट्स की सहमति नहीं

  • डीपीएस के प्रिसिंपल रघुनाथ मुखर्जी : ऑनलाइन पढ़ाई ही करवा रहे हैं। पैरेंट्स सहमति देंगे, तभी ऑफलाइन शुरू करेंगे।
  • ब्राइटन स्कूल की प्रिसिंपल जयश्री नायर : ऑफलाइन के लिए पैरेंट्स राजी नहीं हैं, इसलिए बच्चों को स्कूल नहीं बुला रहे हैं।
  • ज्ञानगंगा स्कूल प्रिसिंपल प्रतिमा राजगौर : बच्चों को पैरेंट्स स्कूल नहीं भेजना चाहते, इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे हैं।

सरकारी स्कूलों में उपस्थिति बेहतर हो रही है। शहर में स्कूल तभी खोले जा सकते हैं जब पालकों की समिति के साथ-साथ पार्षद की भी सहमति हो। ऐसा नहीं हुआ तो पढ़ाई ऑनलाइन करानी होगी।
-एएन बंजारा, डीईओ-रायपुर

खबरें और भी हैं...