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वर्ल्ड हेल्थ डे विशेष:मेडिकल सुपर स्पेश्यालिटी में सरकारी सेक्टर अब भी पीछे

रायपुर13 दिन पहलेलेखक: पीलूराम साहू/अमिताभ अरुण दुबे
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  • राजधानी से प्रदेश तक स्वास्थ्य सुविधाओं का मास्टर प्लान

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेश्यालिटी व जिला अस्पतालों में स्पेशलिस्ट सुविधाएं बढ़ाए जाने की जरूरत है। ताकि लोगों को इलाज के लिए केवल निजी अस्पतालों व दूसरे राज्यों के भरोसे रहना न पड़े। राजधानी स्थिति मेडिकल कॉलेज में कुछ सुविधाओं को छोड़कर सभी बीमारियों का इलाज होने लगा है, लेकिन बाकी 5 मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टर भी नहीं है।

जिला अस्पतालों की बात करें तो वहां मेडिसिन, ऑब्स एंड गायनी जैसे विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं है। ट्रामा सेंटर व आईसीयू की भी कमी है, जिससे लोगों को इलाज के लिए राजधानी की दौड़ लगानी पड़ रही है। भास्कर टीम ने वर्ल्ड हेल्थ डे पर राजधानी-प्रदेश में उपलब्ध मेडिकल सुविधाओं की पड़ताल में पाया कि प्रदेश में कैंसर की सिंकाई व सर्जरी, किडनी ट्रांसप्लांट, लीवर ट्रांसप्लांट, हार्ट की बायपास सर्जरी, बोन मेरो ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं तो हैं, लेकिन अभी भी सक्षम लोग बड़े निजी अस्पतालों की ओर ही रुख कर रहे हैं।

यहां कुछ निजी अस्पतालों में बोन मेरो ट्रांसप्लांट होने लगा है, जिसमें महज 9 से 10 लाख रुपए खर्च आ रहा है। वहीं 16 लाख में लीवर ट्रांसप्लांट भी होने लगा है, लेकिन ऐसे अस्पतालों की संख्या महज दो है। ये भी निजी क्षेत्र के हैं। डीकेएस में भी आने वाले दिनों में बोन मेरो, लीवर व किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने की योजना है, लेकिन इसमें समय लगेगा। मेडिकल कॉलेज के एसीआई में बायपास सर्जरी व लेजर पद्धति से हार्ट की एंजियोप्लास्टी हुई है। इसमें लेजर से एंजियोप्लास्टी तो देश में पहली बार की गई, जिसके लिए चेन्नई से एक्सपर्ट बुलाए गए थे। खास बात यह है कि डॉक्टर अभी भी राजधानी में काम करने के लिए आतुर है। इसके लिए वे अपना प्रमोशन भी मना कर रहे हैं। हाल ही में नेहरू मेडिकल कॉलेज के 22 डॉक्टरों का ट्रांसफर हुआ है, इनमें ज्यादातर नए कॉलेज ज्वाइन करने को तैयार नहीं है।

प्रदेश का स्वास्थ्य तंत्र

  • 28 जिला अस्पताल
  • 170 स्वास्थ्य केंद्र
  • 792 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
  • 5206 उप स्वास्थ्य केंद्र
  • 20 सिविल अस्पताल
  • 04 शहरी अस्पताल
  • 52 शहरी स्वास्थ्य केंद्र
  • 370 शहरी उप स्वास्थ्य केंद्र
  • 01 टीबी सेनेटोरियम
  • 01 मेंटल क्लिनिक
  • 67 लाख परिवारों के पास आयुष्मान कार्ड कवरेज, इसमें करीब 2 करोड़ लोग।
  • 56 लाख लोगों को खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना में 5 लाख रु. तक का कवर।
  • खूबचंद बघेल स्कीम में 835 सरकारी,. 376 प्राइवेट अस्पताल में मुफ्त इलाज।

हेल्थ सिस्टम में ये कमी

  • सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ के पद खाली।
  • सरकारी अस्पतालों के डाक्टरों की दूसरी जगह सेवाओं से भी नुकसान।
  • सरकारी संस्थानों में करोड़ों की मशीनें या तो खराब या उपयोग ही नहीं।
  • गर्भवती महिलाओं की गंभीर डिलीवरी पूरे प्रदेश में केवल रायपुर में ही।
  • एक-दो को छोड़कर जिला अस्पतालों में ट्रामा सेंटर व आईसीयू नहीं।
  • नवजात शिशुओं के लिए एनआईसीयू और एसआईसीयू की भारी कमी।

स्वास्थ्य बीमा

  • 67 लाख परिवारों के पास आयुष्मान कार्ड कवरेज, इसमें करीब 2 करोड़ लोग।
  • 56 लाख लोगों को खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना में 5 लाख रु. तक का कवर।
  • खूबचंद बघेल स्कीम में 835 सरकारी,. 376 प्राइवेट अस्पताल में मुफ्त इलाज।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
सुपर स्पेश्लिटी डाॅक्टरों के साथ एडवांस मशीनें चलाने को दक्ष स्टाफ की जरूरत है। रिसर्च भी जरूरी है। दूसरे मेडिकल कालेज व जिला अस्पताल ठीक होने चाहिए, ताकि राजधानी पर डिपेंडेंसी कम हो।
- डॉ. विष्णु दत्त, डीन मेडिकल कॉलेज

प्राइमरी हेल्थ सेंटरों को दुरुस्त करने की जरूरत है ताकि बीमार होने पर लोगों का इलाज हो सके। हार्ट, किडनी व कैंसर जांच से जान बचा सकते हैं। नर्सों को ट्रेंड करके सुविधा बढ़ा सकते हैं।
-डॉ. स्मित श्रीवास्तव, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट

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