कोरोना संक्रमण ने बदला सिस्टम:सरकारी दौरे बंद, बैठकें ऑनलाइन, इससे बचे 80 करोड़ से ज्यादा

रायपुर3 महीने पहलेलेखक: पी. श्रीनिवास राव/राकेश पाण्डेय
  • कॉपी लिंक
  • 15 माह में सीएम के अलावा हर स्तर पर ऑनलाइन बैठकों से इतने पैसे बचे जितना दो छोटे विभागों का सालाना बजट

कोरोना महामारी भले ही बड़ा संकट बनकर सामने आई, लेकिन इस वजह से कुछ ऐसे प्रयोग और बदलाव भी हुए हैं जिनका फायदा अब नजर आने लगा है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है सरकारी बैठकों में होने वाला बड़ा खर्च, जो ऑनलाइन या वर्चुअल प्लेटफार्म में आने की वजह से लगभग खत्म हो गया और यह प्लेटफार्म काफी किफायती साबित हुआ है।

पिछले साल मार्च से मुख्यमंत्री और मंत्री ही नहीं, सारी बैठकें तथा भूमिपूजन जैसे कार्यक्रम भी ऑनलाइन हुए हैं और शासन का अनुमान है कि मीटिंग की व्यवस्था और उसमें शामिल होने के लिए आने-जाने का खर्च मिलाकर 80 करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत हुई है। यह राशि उतनी ही है, जितना प्रदेश के दो छोटे विभागों जैसे धार्मिक-धर्मस्व और अल्पसंख्यक कल्याण का सालाना बजट होता है।

प्रदेश में कोरोना की वजह से पहला लाॅकडाउन 19 मार्च 2020 में लगा, और तब से अब तक मुख्यमंत्री, मंत्री और शासन के विभागप्रमुख ही नहीं, बल्कि कलेक्टर तथा जिला-जनपद पंचायत स्तर पर भी सारी बैठकें ऑनलाइन हुई हैं। शेष|

मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने मिलकर सभी विभागों की भारी-भरकम समीक्षाएं भी वेबिनार तथा वर्चुअल मीटिंग्स के जरिए कर डाली हैं। यही नहीं, सरकारी गाड़ियों की सर्विसिंग, ड्राइवर आदि पर होने वाले खर्च के अलावा नई गाड़ियों की खरीदी पर रोक लगने से भी सरकार के करोड़ो रुपए बचे। मंत्रियों, अफसरों के दौरे कम होने के कारण पेट्रोल- डीजल आदि पर खर्च होने वाली बड़ी राशि आधी से कम खर्च हुई है।

3 हजार करोड़ के लोकार्पण-भूमिपूजन 4 दिन में
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जून माह में केवल चार दिनों में ही 8 जिलों को 2,660 करोड़ रुपए का फंड आवंटित किया है। यही नहीं, 3,433 नए विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन भी किया गया। यह सारा कुछ वर्चुअली हुआ है। अफसरों का मानना है कि अगर यह सारा ऑफलाइन अर्थात मौके पर जाकर होता, तो इसमें ही कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो जाते।

क्योंकि इस दौरान सीएम ने 8 जिलों दुर्ग, बालोद, बलौदाबाजार- भाटापारा, महासमुंद, गरियाबंद, कबीरधाम, राजनांदगांव और धमतरी में लोकार्पण-भूमिपूजन किए, यानी ऑफलाइन मोड नहीं होता तो सभी जगह सीएम के दौरे होते।

15 महीनों में पांच हजार से अधिक ऑनलाइन बैठकें
पिछले 15 माह में एनआईसी ने केंद्र और राज्य सरकार के लिए 5 हजार से अधिक ऑनलाइन बैठकें आयोजित की। एनआईसी सूत्रों के अनुसार इसमें लगभग 25 सौ बैठकें कांफ्रेंस के जरिए जबकि डेस्कटॉप वीसी की संख्या तीन हजार से ऊपर है। इनमें कई बैठकें ऐसी हैं जिनमें शामिल होने मुख्यमंत्री, मंत्रियों मुख्य सचिव के अलावा आला-अफसरों को दिल्ली जाना पड़ता था, लेकिन कोरोना के कारण सभी बैठकें ऑनलाइन ही हुईं।

राज्य में संयुक्त सचिव के स्तर पर 1020 बैठकें, सचिव के स्तर पर 232, चीफ सेक्रेटरी 106, स्टेट इंफार्मेशन कमिश्नर 613, केंद्र की संयुक्त सचिव के स्तर पर 582, सेंट्रल इंफार्मेशन कमिश्नर 250 बैठकें हुई हैं।

इसके अलावा मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अफसरों की विभागीय बैठकों के अलावा जिले और ब्लॉक स्तर पर की जानेवाली विभागीय समीक्षा बैठकें भी शामिल हैं। प्रदेश के सभी 54 विभागों की बैठकों के अलावा राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग, कलेक्टर, कमिशनर द्वारा भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठकें ली गई हैं।

बैठकों के कारण ऐसे खर्च भी बचे
शासन के विभिन्न विभागों में हर साल औसतन 20-25 गाड़ियां खरीदी जाती हैं। यह आमतौर पर अफसरों के आने-जाने के लिए होती हैं। अभी सिर्फ फील्ड वर्क के लिए गाड़ियां इस्तेमाल हो रही हैं, जो विभागों के पास पर्याप्त हैं। इसलिए सरकार ने नई गाड़ियों की खरीदी पर रोक लगा दी थी।

इससे 15 माह में लगभग 3 करोड़ रुपए बच गए हैं। मंत्रियों के यात्रा व्यय पर इस साल लगभग 3 करोड़ 50 लाख रुपए रखे गए हैं, लेकिन पिछले साल केवल 2 करोड़ 96 लाख रुपए ही रखे गए थे। इसी तरह आला अफसरों के यात्रा व्यय लिए इस साल 2 करोड़ 70 लाख रुपए रखे गए हैं।

स्थायी व्यवस्था पर विचार

  • कोराेना के कारण मीटिंग, लोकार्पण और भूमिपूजन को ऑनलाइन करने से काफी लाभ हुआ है। कोई काम नहीं रुका और सरकार का खर्च काफी बचा। यही नहीं, सरकार की योजनाओं को लेकर सीएम व मंत्रियों को सीधे हितग्राहियों से जुड़ने का मौका इसी प्लेटफार्म ने दिया। यह कई तरह से फायदेमंद है, इसलिए आईटी के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर इसे स्थायी कर सकते हैं। -रविंद्र चौबे, कृषि मंत्री व प्रवक्ता