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भास्कर पड़ताल:राजधानी में आधे बच्चों को नहीं लगे जरूरी टीके; कोरोना की दूसरी लहर से बच्चों का बीसीजी- हेपेटाइटिस टीकाकरण प्रभावित

रायपुर23 दिन पहले
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जनवरी से मार्च की तुलना में अप्रैल- मई में जरूर कम टीके लगे, क्योंकि लॉक डाउन व लोगों के पास आने जाने का साधन न होना रहा। - Dainik Bhaskar
जनवरी से मार्च की तुलना में अप्रैल- मई में जरूर कम टीके लगे, क्योंकि लॉक डाउन व लोगों के पास आने जाने का साधन न होना रहा।

राजधानी समेत जिले में कोरोना महामारी का बच्चों के टीकाकरण पर जबरदस्त असर पड़ा है। बीसीजी और हेपेटाइटिस बी जैसे जरूरी टीके जनवरी-मार्च की तुलना में आधे ही लग पाए हैं। आधा साल गुजरने वाला है लेकिन अभी तक लक्ष्य का 25% वैक्सिनेशन भी नहीं हो पाया है। इस साल जनवरी से मार्च तक 13 से 25 फीसदी टीके लगे थे।

उसके बाद कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप फैल गया। इससे अप्रैल-मई में यह आंकड़ा सात से आठ फीसदी सिमट गया। यही नहीं बीसीजी, हेपेटाइटिस बी, ओपीवी-0, पेंटावैलेंट-3, एमआर 2 के टीके के साथ विटामिन ए की दवा भी पूरे बच्चों को नहीं लग पाई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के अनुसार जनवरी से मार्च के बीच जिले में कुल 10008 बच्चों का जन्म हुआ।

इनमें से नौ सौ इकहत्तर को बीसीजी और सात हजार पांच सौ इक्यासी को हेपेटाइटिस बी का टीका लगा। लक्ष्य का यह क्रमशः 17% और 13% है। इसी तरह ओपीवी-0 भी नौ हजार चार सौ सनतानबे बच्चों को लगाया गया। ओपीवी-3 का डोज चौदह हजार छह सौ छैसठ बच्चों को दिया गया।

पेंटावैलेंट-3 का टीका चौदह हजार छह सौ तिरासी बच्चों को लगाया गया है। इसी तरह एमआर2 का टीका बारह हजार दो सौ बाइस और विटामिन ए का डोज तेरह हजार तीन सौ बीस बच्चों को दिया गया। लेकिन अप्रैल-मई में यह क्रम और गिरता चला गया। इन दो महीनों में पूरे जिले में 5581 बच्चे जन्मे, जिनमें से सिर्फ तीन हजार नौ सौ चार को ही हेपेटाइटिस बी का टीका लगा गया।

बीसीजी भी पांच हजार दो सौ उनसठ बच्चों को लगा, जिनमें निजी अस्पताल में जन्म के बाद सरकारी अस्पतालों में टीका लगवाने वाले बच्चे भी शामिल हैं। यह आंकड़ा राज्य से मिले टारगेट का क्रमशः सिर्फ 7% और 9% फीसदी है।

बॉक्स- रायपुर जिले को मिला 58 हजार का टारगेट

स्वास्थ्य विभाग की तरफ से हर साल हर जिले को उसकी आबादी और उस साल जन्म लेने वाले बच्चों के आधार पर टीकाकरण का टारगेट दिया जाता है। रायपुर जिले को 58,164 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया है, लेकिन अभी तक इसका 20-25 फीसदी ही पूरा पाया है।

समय पर हर टीका लगे, ये जरूरी

डॉक्टरों के अनुसार बच्चों को जन्म से 15 दिन के अंदर बीसीजी, ओपीवी-0 और हेपेटाइटिस बी का टीका व डोज देना होता है। इसके बाद पेंटावैलेंट-3 छह हफ्ते (42-45 दिन), ओपीवी-3 का ओरल डोज डेढ़, ढाई और साढ़े तीन माह के दौरान देना होता है। एमआर 2 को 9 से 15 माह के दौरान और विटामिन ए का डोज 9 महीने में देते हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के जरिए पूरा कर रहे टारगेट

रायपुर जिले में टीकाकरण का जिम्मा देख रहे डॉ आशीष वर्मा ने बताया कि बच्चों के नियमित टीके को लेकर अब किसी तरह की परेशानी नहीं आ रही है। जनवरी से मार्च की तुलना में अप्रैल- मई में जरूर कम टीके लगे, क्योंकि लॉक डाउन व लोगों के पास आने जाने का साधन न होना रहा।

अब जिन बच्चों को लगने वाले टीके इस दौरान नहीं लगे हैं, उनकी ड्यू लिस्ट निकालकर एएनएम, मितानिन व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से घर घर जाकर उन्हें टीकाकरण के लिए बुलाया जा रहा है। जून में इसमें गति आई है।

घर-घर लगा रहे टीके

बच्चों को टीका लगाने का अभियान नियमित रूप चलता रहता है। लॉकडाउन के दौरान बच्चों को टीका लगवाने कम लोग आए। अभी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ घर-घर जाकर भी टीके लगाए जा रहे हैं।
डॉ मीरा बघेल, सीएमएचओ रायपुर