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खाद संकट पर हाईलेवल मीटिंग:अब तक जरूरत की 70% खाद ही मिल पाई; मुख्य सचिव ने प्रत्येक समिति की निगरानी का निर्देश दिया

रायपुर5 महीने पहले
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मुख्य सचिव ने मंत्रालय में विभिन्न विभागों के अफसरों के साथ हालात की समीक्षा की। - Dainik Bhaskar
मुख्य सचिव ने मंत्रालय में विभिन्न विभागों के अफसरों के साथ हालात की समीक्षा की।

खरीफ की बुआई के सीजन में रासायनिक खाद के संकट के दौरान सरकार उपाय खोज रही है। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने एक हाईलेवल बैठक में खाद की जरूरत और आपूर्ति की समीक्षा की। बताया गया कि अब तक जरूरत की 70% खाद ही प्रदेश को मिल पाई है। मुख्य सचिव ने खाद किसानों को बिना किसी परेशानी के उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए समिति स्तर पर निगरानी बढ़ाने को कहा है।

मंत्रालय में आयोजित बैठक में अधिकारियों ने बताया, खरीफ सीजन में यूरिया, डी.ए.पी. सहित अन्य उर्वरकों की करीब 8.93 लाख मीट्रिक टन की जरूरत है। अभी तक करीब 6.31 लाख मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति ही हो पाई है। अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन में उर्वरकों की कुल मांग के विरूद्ध अब तक 70% उर्वरक ही उपलब्ध हो पाया है। परिस्थितियों की जानकारी लेने के बाद मुख्य सचिव ने किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि खाद-बीज की उपलब्धता की समितिवार नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जाए। मुख्य सचिव का कहना था, धान की फसल के लिए चरणबद्ध तरीके से जरूरी उर्वरकों की उपलब्धता समिति स्तर पर कराया जाए।

यह ध्यान रखा जाए कि रोपा लगाने के समय, पौधे की वृद्धि के समय जिन-जिन उर्वरकों की जरूरत होती है, उसकी उपलब्धता उसी समय पर स्थानीय समिति में हो जाए। इसके लिए समितिवार तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी रासायनिक खाद की कमी के कारण फसल उत्पादन प्रभावित ना हो इसके लिए उसके विकल्प के रूप में अन्य खाद भी पर्याप्त मात्रा में सोसायटी में उपलब्ध हो। बैठक में कृषि विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, कृषि संचालक यशवंत कुमार, मार्कफेड की प्रबंध संचालक किरण कौशल, पशुपालन विभाग के संचालक चंदन त्रिपाठी सहित सहकारिता, कृषि और पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

नैनो फर्टिलाइजर का ट्रायल करने को भी कहा

मुख्य सचिव ने नैनो फर्टिलाइजर का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार इस वर्ष नैनों उर्वरक की आपूर्ति भी कर रही है। इसका राज्य की जलवायु के अनुसार फसल उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी जरूरी है। इसके लिए उन्होंने प्रत्येक सहकारी समिति स्तर पर एक किसान को चिन्हित कर एक निश्चित खेत में इसका प्रदर्शन करने के निर्देश दिए हैं।

48 लाख हेक्टेयर में होनी है खरीफ की बुआई

राज्य के 48 लाख 20 हजार हेक्टेयर रकबे में खरीफ फसलों की बुआई होनी है। जिसमें 36 लाख 60 हजार 500 हेक्टेयर में धान, 3 लाख 14 हजार हेक्टेयर में मक्का, एक लाख 6 हजार हेक्टेयर में कोदो-कुटकी, 40 हजार हेक्टेयर में रागी की बुआई का लक्ष्य है। अरहर की एक लाख 70 हजार, मूंग की 33 हजार, उड़द की 2 लाख 10 हजार तथा कुल्थी की 35 हजार हेक्टेयर में बुआई होनी है। तिलहनी फसलों के अंतर्गत मूंगफली, तिल, सोयाबीन, रामतिल, सूरजमुखी और अरण्डी की बुआई 2 लाख 67 हजार 700 हेक्टेयर में किया जाना है। करीब दो लाख 83 हजार हेक्टेयर में साग-सब्जी और अन्य फसलों की बुआई होगी।

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