छत्तीसगढ़ में कोरोना से निपटने साजो-सामान बढ़ा लिया... लेकिन:ऐसे कैसे निपटेेंगे तीसरी लहर से: डाॅक्टर और स्टाफ कम, गांवों में टेस्टिंग भी नहीं

रायपुर7 महीने पहले
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इंडोर स्टेडियम में अभी तक एक भी बेड नहीं लगा, सिर्फ ऑक्सीजन पॉइंट ही। - Dainik Bhaskar
इंडोर स्टेडियम में अभी तक एक भी बेड नहीं लगा, सिर्फ ऑक्सीजन पॉइंट ही।

छत्तीसगढ़ में कोरोना की तीसरी लहर की तैयारी के तौर पर जरूरी संसाधन दूसरी लहर के मुकाबले तीन गुना कर दिए गए हैं। इन्हें दूरस्थ इलाके में पहुंचाया जा चुका है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि प्रदेश के दक्षिणी सिरे पर धुर नक्सल प्रभावित भोपालपट्टनम में भी ऑक्सीजन प्लांट इस माह के अंत तक तैयार हो जाएगा। पहली-दूसरी लहर की तुलना में प्रदेश के अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़कर 31 हजार हो चुकी है।

इनमें ऑक्सीजन बेड ही साढ़े 7 हजार हैं। एक तरफ, संसाधनों के मामले में हेल्थ अमले ने ताकत काफी बढ़ाई, लेकिन बेहद जरूरी चीज यानी डाक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के मामले में हालात अब भी अच्छे नहीं हैं। इतनी बड़ी तैयारी के बावजूद गांवों में टेस्टिंग की सुविधा नहीं है, लोगों को प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक ही आना होगा। मामला जांच का नहीं है, ग्रामीण अस्पतालों में बेड होने के बावजूद अब तक वहां एक भी कोविड मरीज इलाज के लिए भर्ती नहीं किया जा सका है। यही नहीं, ओमिक्रान दस्तक दे रहा है लेकिन प्रदेश में फिलहाल एक भी कोविड केयर सेंटर खुल नहीं सका है।

भास्कर की जमीनी पड़ताल में सामने आए कई तथ्य हैरान करनेवाले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना की दोनों लहरों में करीब ढ़ाई हजार से अधिक नर्सिंग और तकनीकी स्टाफ को कोरोना के लिए भर्ती किया था। दूसरी लहर के धीमे पड़ने के साथ ही धीरे-धीरे इन्हें जिलों से निकाल दिया गया। इसलिए अब गांवों में कोरोना जांच करने वालों की कमी हो गई है, क्योंकि रेगुलर स्टाफ केवल नॉन कोविड कामों पर ही फोकस है। इसी का नतीजा है कि प्रदेश में दूसरी लहर के मुकाबले अभी कोरोना जांच रोज आधी से भी कम है। दूसरी लहर के पीक में रोज 70 हजार से अधिक टेस्ट हो रहे थे, जो अब अधिकतम 22 हजार रह गए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि राजधानी के खोखोपारा शहरी स्वास्थ्य केंद्र में अब तक 5 बेड की व्यवस्था नहीं बनी क्योंकि पुराने भवन में जगह नहीं, नया भवन बना नहीं है।

ओमिक्रान वैरिएंट को अभी तीसरी लहर की वजह माना जा रहा है। कोविड की दूसरी लहर ने छत्तीसगढ़ में जिस तरह दहशत फैलाई थी, उस वजह से स्वास्थ्य अमले ने जरूरी संसाधन दो-तीन गुना कर लिए, लेकिन सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने वाले डाक्टर-नर्सें और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी बनी है। तीसरी लहर के लिए हम कितने तैयार हैं? इससे जुड़े हर जरूरी मुद्दे और उसकी हकीकत सामने लाती रिपोर्ट-

1. 443 डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया पर फिलहाल स्टे
विभाग ने दो लहरों में काम करने वाले संविदा पर रखे गए ढ़ाई हजार से अधिक लोगों को पहले ही निकाल दिया, 443 डॉक्टरों की भर्ती पर हाल ही में कोर्ट का स्टे लगा है। मरीजों की तुलना में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अनुपात तो चिंता बढ़ाने वाला है।

2. स्वास्थ्य केंद्रों में पांच-पांच बेड, काेई भर्ती नहीं
तीसरी लहर के मद्देनजर सामुदायिक तथा कहीं-कहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी तीन माह पहले ही 5-5 बिस्तरों की व्यवस्था बना दी गई थी। तीन माह में मरीज भी मिले, लेकिन अभी तक प्रदेश के किसी भी सामुदायिक अस्पताल में एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया है।

3. बच्चे ज्यादा संक्रमित हुए तो उनके लिए बंदोबस्त कम
तीसरी लहर की आशंका के बीच संक्रमित बच्चों के लिए प्रदेश में एंबुलेंस ही नहीं है। बच्चों के आक्सीजन मास्क, नेजल डिवाइस, आईवी लाइन, लाइफ सपोर्ट बैग, नियोनेटल-पीडियाट्रिक वेंटिलेटर भी कम हैं। स्वास्थ्य विभाग ने हालांकि 387 ड्यूल मोड वेंटिलेटर खरीदे हैं, जो एडल्ट और बच्चे दोनों के काम के हैं। बच्चों के इलाज के पुख्ता इंतजाम सिर्फ राजधानी में हैं।

4. एक भी केयर सेंटर चालू नहीं, सजावट पूरी
दूसरी लहर में साढ़े 16 हजार से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था 165 से अधिक कोविड केयर सेंटर में थी। इनमें से एक भी केयर सेंटर चालू नहीं है। भास्कर पड़ताल में रायपुर में प्रदेश के इंडोर स्टेडियम के बच्चों के कोविड वार्ड में रंग रोगन दीवार पर कार्टून पोस्टर लगकर तैयार हो गए हैं।

5. 37 ऑक्सीजन प्लांट अब भी अधूरे, 76 तैयार भी
प्रदेश में 113 आॅक्सीजन प्लांट बनाने का टारगेट रखा गया था। जिसमें पीएम और राज्य की ओर से बनाए जा रहे दोनों तरह के प्लांट शामिल हैं। अभी तक की स्थिति में 76 प्लांट बनकर तैयार हो गया है। हालांकि डीकेएस अस्पताल का प्लांट कोविड की तैयारियों में शामिल नहीं है।

भास्कर डेटा एनालिसिस : स्पेशलिस्ट, डाक्टर और नर्सों
1. स्पेशलिस्ट

पहली लहर का पीक -216 मरीजों पर एक विशेषज्ञ
दूसरी लहर का पीक - 524 मरीजों पर एक विशेषज्ञ
अगर तीसरी लहर आई तब...
पहली लहर जैसा पीक - 126 मरीजों पर एक विशेषज्ञ
दूसरी लहर जैसा पीक - 436 मरीजों पर एक विशेषज्ञ

2. डॉक्टर
पहली लहर का पीक - 21 मरीजों पर एक डॉक्टर
दूसरी लहर का पीक - 69 मरीजों पर एक डॉक्टर

अगर तीसरी लहर आई तब...
पहली लहर जैसा पीक - 17 मरीज पर एक डॉक्टर
दूसरी लहर जैसा पीक - 61 मरीज पर एक डॉक्टर

3. स्टाफ नर्स
पहली लहर का पीक - 14 मरीज पर एक नर्स
दूसरी लहर का पीक - 43 मरीज पर एक नर्स

तीसरी लहर की आशंकाएं
पहली लहर जैसा पीक - 8 मरीज पर एक नर्स
दूसरी लहर जैसा पीक - 28 मरीज पर एक नर्स

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना जांच की व्यवस्था की है। फिर भी अगर किसी गांव में इकट्ठे ज्यादा केस आए तो वहां जांच टीमें भेज सकते हैं। स्टाफ कम न पड़े, इसके लिए भर्ती की सूचनाएं निकाल रहे हैं।
-डॉ. सुभाष मिश्रा, डायरेक्टर-एपिडेमिक

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