दसवीं के टॉपर्स की बातें:किसी ने टीवी-मोबाइल छोड़ा तो किसी ने बिना गैप पूरे साल रोज 6 घंटे पढ़ाई की

रायपुर5 दिन पहले

छत्तीसगढ़ दसवीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट जारी होने के बाद। मेरिट लिस्ट का सभी को इंतजार था। मेरिट सूची में जगह पाने के लिए कितना कठिन कांम्पिटिशन था। कितनी बड़ी जद्दोजहद थी इसका पता इसी बात से लगता है कि टॉप टेन में संयुक्त रूप से 71 छात्र-छात्राओं ने जगह बनाई है। इनमें प्रदेश के तकरीबन सभी जिलों के बच्चे हैं। शासकीय और निजी दोनों तरह की स्कूलों के बच्चे हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों के होनहार भी शामिल हैं। हमने कुछ टॉपर छात्र-छात्राओं से बात की।

कहेफ अंजुम
कहेफ अंजुम

डॉक्टर बनना चाहती हैं कहेफ

कहते हैं प्रतिभा किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। छत्तीसगढ़ के नवोदित गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में संयुक्त परिवार, आर्थिक स्थिति कमजोर होने जैसी परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए कहेफ अंजुम ने सफलता हासिल कर दिखाई। सारबहरा की रहने वाली कहेफ अंजुम ने कक्षा दसवीं के रिजल्ट में 600 में 589 अंक हासिल किए। उसने पूरे साल मोबाइल से दूरी बनाए रखी। इस के साथ पूरे छत्तीसगढ़ में दूसरा स्थान हासिल किया और गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले को गौरवान्वित किया। चार बहन और एक भाई के परिवार में सबसे बड़ी कहेफ आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहती हैं और गौरेला के ग्रीन वैली स्कूल की छात्रा है । अपनी सफलता का श्रेय माता पिता और गुरुजनों को देती है।

जयप्रकाश के घर में लोगों ने उसे मिठाई खिलाई।
जयप्रकाश के घर में लोगों ने उसे मिठाई खिलाई।

जयप्रकाश को बनना है IAS

दसवीं बोर्ड में बिलासपुर के जयप्रकाश कश्यप भी पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर आए हैं। उन्हें 600 मे्ं से कुल589 अंक हासिल हुए हैं। शुभम विहार में रहने वाले जयप्रकाश मंगला के होली क्रॉस हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई करते हैं। दो बहन और एक भाई में छोटे जयप्रकाश शुरू से ही मेधावी रहे हैं, उनके पिता मदन लाल कश्यप पंडरिया के कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, और दोनों बहनें कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं, जो उसे तैयारी करने में सहयोग करती थी। जय प्रकाश का कहना है, कि उसने एग्जाम के लिए साल के शुरुआत के साथ ही तैयारी की थी। वह रोज बिना गैप 6 घंटे तक पढ़ता था। जिसमें उनकी बड़ी बहनों ने स्कूल के टीचर्स और माता-पिता ने सहयोग किया।, जिसके चलते उन्हें यह सफलता मिली है। जयप्रकाश ने अपनी इस सफलता का श्रेय माता पिता, दोनों बहन और अपने गुरुजनों को दिया है। वह आगे कड़ी मेहनत कर आईएएस बनना चाहते हैं।

आशिफा साह
आशिफा साह

आशिफा शाह भी चाहती है IAS बनना

दसवीं की परीक्षा में संयुक्त रूप से प्रदेश में मेरिट में दूसरा स्थान हासिल करने वाली आशिफा शाह को कोई भी विषय कभी कठिन नहीं लगा। वजह है उसका समझकर पढ़ना। उसने जी तोड़ मेहनत की थी। उसका टाइम टेबल इस तरह था...सुबह 4 से 8 पढ़ाई, फिर 9 से 11 कोचिंग-(विज्ञान व गणित) 12 से 5 स्कूल, रात 8 से 11 पढ़ाई। कवर्धा होलीक्रास स्कूल की आशिफा को उसके पूरे परिवार का सहयोग रहा। उसके पेपर जिस तरह से गए थे। उससे लग रहा था कि वो मेरिट में आएगी, लेकिन दूसरे स्थान को लेकर थोड़ा संशय था। आशिफा कहती है कि वह देश की सेवा करना चाहती है। इसलिए आईएएस की तैयारी करेगी।

युंगात की मां ने अपने बेटे को गले से लगा लिया।
युंगात की मां ने अपने बेटे को गले से लगा लिया।

छोटे ने पूरा किया बड़े भाई का सपना

रैंक लाने वाले दुर्ग के युगांत कुमार साहू ने टॉप टेन में जगह बनाकर अपने बड़े भाई प्रखर साहू का सपना पूरा किया है। प्रखर इस समय इंजीनियरिंग कर रहा है। 10वीं में वह 1 नंबर की कमी से टॉप टेन में नहीं आ पाया था। इसलिए उसने अपने भाई युगांत को इसके लिए तैयार किया। युगांत की मां शकुंतला साहू सरोरा हाइस्कूल में संस्कृत की लेक्चरर हैं। उनके पिता नरेश कुमार साहू प्राइवेट जॉब करते हैं। मानसरोवर हायर सेकंडरी स्कूल जंजगिरी बीएमवाय दुर्ग से पढ़ने वाला युगांत रॉकेट साइंस की पढ़ाई करके बड़ा साइंटिस्ट बनना चाहता है। युगांत का कहना है कि उसे उम्मीद थी वह पहली और दूसरी रैंक लाएगा, लेकिन कहीं कोई चूक हुई है, जिससे वह 10वीं रैंक में आए। 12 वीं में वह और मेहनत करेंगे और पहली रैंक लेकर आएंगे।