तीसरी लहर में बच्चों को ज्यादा खतरा:बच्चा संक्रमित हो तो उसे घर में एक व्यक्ति के साथ रखें आइसोलेट, 2 साल से कम वालों को भाप नहीं

रायपुर2 महीने पहलेलेखक: अमिताभ अरुण दुबे
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  • शिशुरोग विशेषज्ञ बता रहे कोरोना होने पर क्या करना चाहिए

बच्चा कोविड पाॅजिटिव हुआ तो उससे किसी को संक्रमण नहीं होगा, इस गलतफलहमी में रहने के बजाय ऐसे बच्चे को परिवार के किसी एक केयरटेकर के साथ आइसोलेट करना ही होगा। केयर टेकर को कोविड प्रोटोकाॅल और आइसोलेशन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। अगर 2 साल से कम उम्र के बच्चे में संक्रमण का अंदेशा हो तो उसे नेबुलाइज करवा सकते हैं, लेकिन भाप (स्टीम) बिलकुल नहीं देना है, क्योंकि इससे उसके ओंठ और नाक झुलसने का खतरा हो सकता है। जरूरत पड़े तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। बच्चों के कोरोना संक्रमित होने के बाद क्या करना चाहिए और क्या नहीं, बता रहे हैं-राजधानी के दो शिशुरोग विशेषज्ञ।

5 बातें जिनका ध्यान रखना जरूरी

  • बच्चों की सांस की रफ्तार व हाइड्रेशन पर नजर।
  • संक्रमित बच्चे को हर हाल में अाइसोलेट ही रखें।
  • पीड़ित बच्चे को गर्म, पौष्टिक भोजन देना अच्छा।
  • बच्चा 6 माह से ऊपर, तभी देना है पैरासिटामाॅल।
  • अगर सर्दी-खांसी हो तो सिट्रीजिन ही दे सकते हैं।

5 काम जिन्हें बिलकुल नहीं करना है

  • गैरजरूरी दवाएं, देसी इलाज, एंटीबायोटिक न दें।
  • 2 साल से कम उम्र के बच्चों को भाप न दें।
  • बच्चों में आइसोलेशन नियमों की अनदेखी न करें।
  • मल्टीविटामिन इम्युनिटी बूस्टर मन से न दें।
  • डायरिया, चर्म रोग को सामान्य न मानें।
  • 104 के जरिए एक्सपर्ट डॉक्टरों से घर बैठे कर सकते हैं संपर्क

एक्सपर्ट व्यू

गैरजरूरी दवा देने से बिलकुल बचें
बच्चों के पाजिटिव होने या कोरोना का संदेह होने की स्थिति में पैरेंट्स को चाहिए कि वे कोरोना की दूसरी लहर में लाया गया दवाइयों का स्टाक जिसमें एंटीबायोटिक्स, मल्टीविटामिन-इम्युनिटी बूस्टर या अाइवरमेक्टिन जैसी दवाइयां बिलकुल नहीं दें। बच्चा 6 माह से अधिक हो तो घर में रखे बुखार उतारनेवाले पैरासिटामाॅल फार्मूले के सिरप या सिट्रीजिन जैसी दवाएं दे सकते हैं, लेकिन वह भी डाक्टर की ओर से निर्धारित मात्रा में। बच्चे को सांस लेने में दिक्कत, शरीर निढाल होना या लगातार खांसने जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर को जल्दी दिखाना है।

ज्यादातर पैरेंट्स बच्चों को एक-दो दिन बाद ही अस्पताल या डाक्टर के पास ले जाते हैं। कोरोना के दौर में यह नहीं करना है। 2 साल से कम उम्र के बच्चों को जबरन भाप या स्टीम देने से भी बचें। बहुत छोटे बच्चों को भाप देने से उनके होंठ नाक या चेहरा जलने का डर रहता है क्योंकि बच्चों की त्वचा बहुत नाजुक होती है। सबसे अहम बात ये कि बच्चों की वजह से दूसरों को कोरोना नहीं होगा इस गलतफहमी में न रहें। बच्चे भी संक्रमण के वाहक हो सकते हैं, इसलिए पूरा परिवार सावधानी से रहे। बच्चे के साथ एक केयर टेकर रहे, वह भी आइसोलेशन में।
-डॉ. अतुल जिंदल, पीडियाट्रिशियन, एम्स

संक्रमित बच्चे को गर्म खाना खिलाएं
अगर बच्चा संक्रमित हो जाए तो माता-पिता को सबसे पहले हाइड्रेशन पर ध्यान देना चाहिए, अर्थात कहीं बच्चे को उल्टी-दस्त तो नहीं हो रहे हैं। यही नहीं, बच्चों की सांस की रफ्तार पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि संक्रमित बच्चों में यह दोनों लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत है। अगर बच्चे की धड़कनें और सांस तेज चल रही है तो इसका मतलब यह है कि संक्रमित बच्चे की स्थिति नाजुक हो रही है। ऐसे में तुरंत डाक्टर तक जाना ही है। बच्चे के शरीर में पानी की कमी न हो, इस बात का ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को आइसोलेशन में ही रखना है, कई बार बच्चों की स्थिति ठीक लगती है बहुत से पैरेंट्स बच्चों को घर से बाहर निकालने लगते हैं।

यह नहीं करना है। बच्चों को ताजा गर्म और पौष्टिक भोजन ही देना है। परिवार के सभी सदस्य बीमार बच्चे समेत मास्क सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन के नियम का पालन करें। बच्चे के बुखार की स्थिति को एक डायरी में जरूर नोट करें ताकि इससे बच्चे में फीवर कितना चढ़ या उतर रहा है डॉक्टर को बताने में सुविधा रहे। डॉक्टर की बताई हुई दवाएं ही बच्चों को दें। हेल्पलाइन नंबर 104 के जरिए एक्सपर्ट डॉक्टरों से घर बैठे संपर्क कर सकते हैं।
-डॉ. निलय मोझरकर, इंचार्ज, प्रथम शासकीय शिशु कोविड अस्पताल

बच्चों में पोस्ट कोविड मामले ज्यादा, डेढ़ माह रखें निगरानी
सीनियर पीडियाट्रिशियन डॉ. अतुल जिंदल के मुताबिक बच्चों में सबसे अधिक खतरा पोस्ट कोविड में आने वाली समस्याओं का रहता है। इसे एमआईएस (सी) यानी मल्टी इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम भी कहते हैं। कोरोना ठीक होने के बाद बच्चों की कम से कम डेढ़ माह तक सतत मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है। अगर बच्चे में उल्टी दस्त, हाथ पैर का ठंडा पड़ना, कमजोरी से निढाल होना, त्वचा का उधड़ना, त्वचा का रंग नीला या लाल होना, खांसी जैसे लक्षण हों तो बच्चों को तुरंत डॉक्टर को दिखवाकर पोस्ट कोविड ट्रीटमेंट शुरु करना चाहिए। ज्यादातर माता पिता ऐसे मामलों में बच्चों को आने वाली पोस्ट कोविड दिक्कतों को सामान्य मान लेते हैं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना है।

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