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धोखाधड़ी का मामला:ढाई महीने तक अकाउंट से निकले पैसे कार्ड स्वाइप किया तो ठगी का खुलासा

रायपुर8 दिन पहले
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  • युवक के खाते से ठगों ने पेटीएम के जरिए निकाले 1.37 लाख

गुढ़ियारी के एक युवक के खाते से ठग ने पिछले ढाई महीने में 1.37 लाख ऑनलाइन सिस्टम से निकाल लिए। कभी 4000 तो कभी 5000 निकाले गए। थोड़े थोड़े कर खाते के पूरे पैसे निकल गए और बैलेंस शून्य हो गया। उसके बाद भी युवक को पता नहीं चला।

खाते के पूरे पैसे निकल जाने के बाद जब वह अपनी जरूरत के लिए पैसे निकालने एटीएम गया तब कार्ड स्वाइप करने पर पता चला उसके खाते में तो एक पैसा नहीं है। पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि पूरी रकम पेटीएम से निकाली गई है। पूरी रकम यूपी में नोएडा और गाजियाबाद में निकाली गई है।

पुलिस अफसरों के अनुसार ठग यूपी का रहने वाला है। बैंक खाते का रिकार्ड निकलवाया जा रहा है। उसी के आधार पर ठग की तलाश की जाएगी। फिलहाल युवक का खाता ब्लॉक कर दिया गया है। पुलिस के अनुसार गुलाब नगर निवासी बैरिस्टर सिंह सिलतरा की फैक्ट्री में फिटर का काम करता है। वह मोबाइल पर पेटीएम का उपयोग करता है।

वह 7 सितंबर को एटीएम गया। उसने पैसा निकालने के लिए अपना कार्ड स्वाइप किया। कई बार प्रयास करने के बाद भी उसके खाते से पैसा नहीं निकला। वह हैरान रह गया। उसने अपने खाते का बैलेंस चेक किया। खाते में जीरो बैलेंस दिखाया। बैरिस्टर सकते में आ गया। वह एटीएम से तुरंत बैंक गया।

वहां बैंक अधिकारियों से मिलकर उसने खाते में बैलेंस शून्य होने की शिकायत की। अधिकारियों ने उसी समय उसके खाते के ट्रांजेक्शन की जानकारी निकाली। अधिकारियों ने पिछले तीन महीने का रिकार्ड चेक करने के बाद बताया कि 16 जून से 31 अगस्त तक उसके खाते से पेटीएम के माध्यम से पैसे निकाले गए हैं।

इस तरह उसके खाते में जमा 1.37 लाख पार कर दिए गए। बैंक से पैसे निकलने का पूरा रिकार्ड मिलने के बाद भी बैरिस्टर हैरान है। उसका कहना है कि उसने किसी को भी खाते की जानकारी नहीं दी है। किसी को ओटीपी भी नहीं बताया है। इसके बाद भी खाते से पैसे कैसे निकल गए? पुलिस ट्रांजेक्शन की जानकारी निकाल रही है।

रिवार्ड के नए फार्मूले से ठगी

पुलिस को शक है कि रिवार्ड के नए फार्मूले से ठगों ने बैरिस्टर से ठगी की है। ठग आजकल ई-वॉलेट में रिवार्ड देने का झांसा देकर ठगी कर रहे है। रिवार्ड के लिए वे मोबाइल पर लिंक भेजते हैं। आमतौर पर पेटीएम जैसे ई-वॉलेट इस्तेमाल करने वालों को रिवार्ड मिलता रहता है। इस वजह से रिवार्ड से संबंधित लिंक को देखकर लोग समझ नहीं पाते और लिंक को क्लिक कर देते हैं।

उस लिंक को क्लिक करते ही ठगों को संबंधित के बैंक खाते से संबंधित सारी जानकारी मिल जाती है। उसके बाद ठगों के लिए ऑन लाइन सिस्टम से खाते में सेंध लगाना आसान हो जाता है। पुलिस विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार ठग लोगों को झांसे में लेकर उनके मोबाइल पर लिंक से एनीडेस्क एप भेजते हैं।

उसे भी किसी न किसी बहाने डाउनलोड करवा लेते हैं। ये एप डाउनलोड करते ही मोबाइल का पूरा डेटा ठगों के पास पहुंच जाता है। हालांकि गुढ़ियारी में ठगी के शिकार फैक्ट्री कर्मी का दावा है कि उसने किसी तरह का एप डाउनलोड नहीं किया है। उसने इस बात से भी इनकार किया है कि उसने कोई लिंक क्लिक किया है। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है।

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