• Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Raipur
  • If You Win Gold In Divyang National, Only 15 Thousand Rupees In Chhattisgarh Will Give Job To Excellent Players In The State, Not Even Diet Money.

पैरालिंपिक के लिए कैसे तैयार होंगे खिलाड़ी:दिव्यांग नेशनल में गोल्ड जीते तो छत्तीसगढ़ में सिर्फ 15 हजार रुपए प्रदेश में उत्कृष्ट खिलाड़ियों को नौकरी तो दूर, डाइट के पैसे भी नहीं

रायपुरएक महीने पहलेलेखक: कौशल स्वर्णबेर/सुमय कर
  • कॉपी लिंक
नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाली छोटी मेहरा । - Dainik Bhaskar
नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाली छोटी मेहरा ।
  • 2021 की नेशनल चैंपियनशिप में खिलाड़ियों ने जीते थे 17 मेडल, पर चंदा करने की मजबूरी

टोक्यो पैरालिंपिक में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने देश का सीना चौड़ा कर दिया है। मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों पर ईनामों की बारिश हो रही है। वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन के बाद भी सुविधाओं के अभाव में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। प्रदेश के खिलाड़ियों का हाल ऐसा है कि नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को सिर्फ 15 हजार रुपए की नकद राशि दी जाती है।

उत्कृष्ठ खिलाड़ी घोषित होने पर भी नौकरी का राज्य में कोई प्रावधान नहीं है। छत्तीसगढ़ में पैरा स्पोर्ट्स एसाेसिएशन एथलेटिक्स, स्वीमिंग और वेटलिफ्टिंग के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेलों के लिए प्रशिक्षित कर रही है। बैंगलोर में 2021 में हुए नेशनल चैंपियनशिप में प्रदेश के खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 17 मेडल अपने नाम किए थे। इनमें गोल्ड, सिल्वर और ब्रांज मेडल की संख्या लगभग बराबर थी।

कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो दो अलग-अलग खेलों में गोल्ड मेडल भी जीत चुके हैं। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने के बाद भी उन्हें प्रोत्साहन के रूप में अधिकतम 15 हजार रुपए दिए जा रहे हैं, जबकि दूसरे प्रदेशों में यही राशि 50 हजार से डेढ़ लाख रुपए तक होती है।

पुरस्कार बढ़े, नौकरी भी मिले
पैरा स्पोर्टस एसोशिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के संयोजक डिकेश टंडन ने बताया कि बैंगलोर में 2016 में हुए नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया था। रायपुर जिले को आठ मेडल मिले थे। जिनमें दो गोल्ड, चार सिल्वर व दो ब्रांज शामिल हैं। लेकिन सरकार द्वारा दी जाने वाली पुरस्कार राशि से खिलाड़ी अपना डाइट भी नहीं सुधार पाते। यहां तक कि उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित होने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से नौकरी का कोई प्रावधान भी नहीं है।

इसलिए नहीं जा पाते अंतराष्ट्रीय स्तर पर
राज्य शासन की ओर से जितनी मदद पैरा खिलाड़ियों को दी जाती है वह नाकाफी है। सरकार द्वारा दी जाने वाली पुरस्कार की राशि भी बहुत कम है इसके कारण खिलाड़ी आगे खेलने या अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कोच के पास नहीं जा पाता। यदि सरकार की ओर से खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर अच्छी ट्रेनिंग दी जाए तो हमारे राज्य से भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं।

सिर्फ 4 खेलों को अनुमति
छत्तीसगढ़ पैरा-ओलंपिक एसोसिएशन के सचिव रतिश चंद्र मिश्रा के मुताबिक पैरालंपिक कमिटी ऑफ इंडिया की ओर से उन्हें केवल चार खेलों के आयोजन की अनुमति दी गई है। इसलिए उनका एसोसिएशन भी एथलेटिक्स, स्वीमिंग, पावरलिफ्टिंग और शूटिंग पर ही केंद्रित है। अन्य खेलों के आयोजन केवल लोकल लेवल पर किए जा रहे हैं। गौरतलब है, पैरा-ओलंपिक में 15 खेल रखे गए हैं।

बाहर ले जाते हैं चंदा करके
छत्तीसगढ़ पैरा जूडो एसोसिएशन के सचिव शेख सलीम ने बताया कि स्टेट और नेशनल चैंपियनशिप में टीम ले जाने के लिए सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिलती। दिव्यांग कोटा का उपयोग या फिर चंदा इकट्‌ठा कर टीम को बाहर ले जाना पड़ता है। तलवारबाजी के खिलाड़ी डीआर साहू ने बताया कि खेल के संबंध में ही कोई डाक्यूमेंट साइन करवाना हो तो दस चक्कर काटने की मजबूरी है।

स्टेट लेवल टूर्नामेंट ही नहीं
छत्तीसगढ़ पैरालंपिक एसोसिएशन जिला और प्रदेश स्तर पर खेलों का आयोजन ही नहीं कराता है। यही वजह है खेल विभाग से इसके लिए अनुदान नहीं मिलता। पैरालिंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष पल्लीवार ने कहा कि हम हर साल पैरा एथलेटिक्स टूर्नामेंट कराते हैं। सभी खेलों में पर्याप्त खिलाड़ी नहीं पहुंचते, इस वजह से केवल एथलेटिक्स ही करवाया जा रहा है।

खबरें और भी हैं...