विकास शुल्क की डिमांड से व्यापारी बौखलाए, विरोध शुरू:गोलबाजार में हजार रुपए फीट विकास शुल्क 10 बाई 10 की शाॅप पर यही होगा लाख रुपए

रायपुर8 दिन पहले
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सवा सौ साल पुराने और शहर के ऐतिहासिक गोलबाजार के कारोबारियों को उनकी दुकानों का मालिकाना हक मिलने का काम जारी है, दावा-आपत्ति की तारीख भी 15 जनवरी से बढ़ाकर 27 जनवरी कर दी गई है, लेकिन दुकानों के प्रति वर्गफीट निर्माण पर हजार रुपए की दर से विकास शुल्क की डिमांड ने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है।

यह शुल्क कंस्ट्रक्शन एरिया पर लिया जाना है। इसका सीधा गणित ये है कि सौ वर्गफीट दुकान (10 बाई 10 फीट) के 1 लाख रुपए और हजार वर्गफीट दुकान के लिए 10 लाख रुपए विकास शुल्क देना पड़ेगा, जो रजिस्ट्री अथवा अन्य शुल्क से अलग है। इस डिमांड ने व्यापारियं की नींद उड़ा दी है और विरोध भी शुरू हो गया है। कलेक्टर की संयुक्त कमेटी ने गोलबाजार में दुकानों का सर्वे और मूल्यांकन करने के बाद 579 दुकानों की सूची का प्रकाशन कर दिया है। इनपर दावा-आपत्ति मंगाई जा रही है। इसके निराकरण के बाद अंतिम सूची राज्य शासन को भेजी जाएगी और वहां से स्वीकृति आने के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू होगी।

कलेक्टर गाइडलाइन रेट के 102 प्रतिशत कीमत पर दुकानों की रजिस्ट्री होगी। इसके अतिरिक्त प्रति वर्गफीट पर विकास शुल्क भी देय बनाया गया है, जिससे व्यापारी सहमत नहीं है। वे महापौर एजाज ढेबर से राहत की मांग भी कर चुके हैं। जानकारी के मुताबिक विकास शुल्क निर्मित क्षेत्रफल पर प्रति वर्गफीट 1000 रुपए की दर से लिया जाएगा। जैसे किसी की 100 वर्गफीट की दुकान है, तो उनसे एक लाख लिया जाएगा। बाजार में कई व्यापारियों ने दो और तीन मंजिला दुकानें बना ली है। प्रत्येक फ्लोर में यदि 100 वर्गफीट है अर्थात कुल 300 वर्गफीट निर्मित क्षेत्रफल है तो उनका विकास शुल्क तीन लाख रुपए होगा। बड़े क्षेत्रफल वाले दुकानदारों को उसी अनुपात मंे शुल्क देना होगा। व्यापारियों का कहना है कि आमतौर पर विकास शुल्क की रकम इतनी ज्यादा नहीं होती, वह भी पहले से बसे हुए पुराने बाजार में। निगम ने विकास शुल्क की गणना का आधार नहीं बताया है और न ही अब तक यह बताया है कि यहां पर किस-किस तरह के और क्या विकास काम होंगे। बाजार की अंतिम ड्राइंग-डिजाइन भी साझा नहीं की गई है।

अवैध कालोनियों पर लागू
विकास शुल्क आमतौर नगर निवेश विभाग अ‌वैध कालोनियों के वैध होने के बाद नक्शे मंजूर करते समय लेता है। यह जरूरी सुविधाओं के नाम पर लिया जाता है और गणना प्रति वर्गफीट दर से की जाती है। यहां पर विकास शुल्क भूमि क्षेत्रफल के आधार पर लिया जाता है। हजार वर्गफीट के मकान पर निगम औसत 40 हजार के आसपास विकास शुल्क निगम ले रहा है। इस अनुपात मंे गोलबाजार का विकास शुल्क 25 गुना ज्यादा बताया जा रहा है। निगम का तर्क है कि निगम का कहना है कि गोलबाजार में व्यापारियों से लिए जाने वाले विकास शुल्क से ही बाजार में बिजली, पानी, सड़क, ड्रैनेज और सौंदर्यीकरण का काम होगा। मालिकाना हक से मिलने वाली रकम राज्य शासन और निगम के बीच बंटेगी। बाजार में 579 दुकानदार हैं। उन्हें पहले से बेहतर और खुला बाजार मिलेगा।

सामान्य सभा में मुद्दा ही नहीं
नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे और पूर्व नेता प्रतिपक्ष सूर्यकांत राठौर ने कहा कि विकास शुल्क को लेकर हमने भी आपत्ति जताई है। यह सरासर गलत है। व्यापारियों पर विकास शुल्क थोपा जा रहा है। सामान्य सभा में भी विकास शुल्क का कोई जिक्र नहीं था। सिर्फ कलेक्टर गाडलाइन और अन्य चीजों को लेकर सभा में चर्चा की गई थी। एजेंडे में विकास शुल्क का कहीं भी जिक्र नहीं था।

विकास शुल्क के विरोध में व्यापारी मिलने आए थे। यह जरूरी है, क्योंकि उसी से बाजार मंे डेवलपमेंट के काम होंगे। फिर भी उनकी आपत्ति को लेकर चर्चा की जाएगी। शासन स्तर पर जो मदद होगी, करेंगे।
-एजाज ढेबर, महापौर रायपुर

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