युवाओं ने संभाला मोर्चा:मौदहापारा कब्रिस्तान में भी युवाओं का समूह पीपीई किट खुद खरीदते हैं, आर्थिक मदद भी

रायपुर6 महीने पहले
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कोरोना से हुई मौतों के बाद डर की वजह से लोग कब्रिस्तान से दूरी बना रहे थे। संक्रमण के डर से कई बार ऐसी भी परिस्थिति बनती थी कि लोग शव के पास जाने के लिए हिचकिचाते थे। शुरू में ठीक तरीके से अंतिम संस्कार तक नहीं हो पाया, ऐसे में सामाजिक संस्था दावते इस्लामी से जुड़े शहरभर के युवा सदस्यों ने मोर्चा संभाल लिया। इनमें संजयनगर, बैरनबाजार, मौदहापारा, बैजनाथपारा और ईदगाहभाठा आदि के युवा हैं। सुबह के 6 बजे हो या फिर रात के 2 किसी भी समय कब्रिस्तान जाने को तैयार रहते हैं।

घरवालों के पास पीपीई किट नहीं होता है या फिर रायपुर से बाहर जाने के लिए गाड़ी नहीं होती है तो अपने खर्चों पर सारे इंतजाम करते हैं। इस संस्था के 25 से ज्यादा युवकों ने कब्रिस्तान में शवों को सुपुर्दे खाक करना शुरू किया। संस्था को सूचना मिलने के बाद से ही शवों का अंतिम संस्कार करने की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं।

इस कोरोना लहर में वे अभी तक 200 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं। इसमें करीब 110 शव मौदहापारा कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किए गए हैं। इस संस्था में प्रमुख रूप से हाजी मुख्तार अत्तारी, शहजाद अत्तारी, सैय्यद कलीम, अब्दुल इस्लाम, अशफाक रजा, जीशान अली, हाजी मकसूद अत्तारी, अशरफ रजा, वसीम अत्तारी, एहसान रजा, मोहम्मद जुबैर, नौमान, अख्तर, नईम, मोहसिन, अय्याज, इस्लाम अत्तारी, सोहेल, रशीद, साबिर, रफीक, अब्दुल अजीम शामिल हैं। दावते इस्लामी के लोगों को देखकर वे खुद से आगे आते हैं।

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