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कार्डियक सर्जरी:पिछले चार साल में सिर्फ 18 कार्डियक सर्जरी, वेटिंग ज्यादा इसलिए हजार मरीज बाहर चले गए

रायपुर12 दिन पहले
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  • एसीआई में बायपास सर्जरी के लिए 200 से अधिक मरीज कतार में

राजधानी के एसीआई में मंगलवार को 8 हजार एंजियोग्राफी का आंकड़ा पार हो गया। इसके ठीक एक दिन पहले सोमवार को अंबेडकर अस्पताल को हार्ट, कैंसर आदि गंभीर सर्जरी के लिए जरूरी दवा और उपकरण की खरीद के लिए 10 करोड़ का फंड भी मिला है। एस्कार्ट से 2017 में अधिग्रहण के बाद एसीआई में पिछले 4 साल में केवल 18 कार्डियिक सर्जरी हो पाई है। संस्थान में सर्जरी के लिए इस दौरान एक हजार से अधिक मरीज पहुंचे, लंबी वेटिंग के चलते ज्यादातर मरीजों ने बाहर अन्य अस्पतालों या दूसरे राज्यों में जाकर सर्जरी करवा ली।

एसीआई में अभी बायपास सर्जरी के लिए 200 से अधिक मरीज वेटिंग में है। एसीआई अस्पताल में वेटिंग की लंबी कतार और सर्जरी जैसी जरूरत पूरी नहीं होने के कारण बहुत से मरीज इलाज के लिए नहीं आना चाहते हैं। भास्कर पड़ताल में पता चला है कि एसीआई में हार्ट सर्जरी के लिए सबसे बड़ी बाधा तकनीकी स्टॉफ और जरूरी उपकरणों की कमी है। यहां तक कि संस्थान में कार्डियक सर्जरी के लिए एनेस्थिसिया एक्सपर्ट तक नहीं है। इसके लिए संस्थान को हर सर्जरी में बाहर से करीब साढ़े 14 हजार रुपए में एनेस्थिसिया एक्सपर्ट बुलाना पड़ता है।

तीन दिक्कतें : बजट कम, जरूरी उपकरणों की कमी और स्टॉफ भी नहीं

फंड से पूरा कर्ज नहीं उतर रहा
सोमवार को अंबेडकर अस्पताल को इलाज के लिए जरूरी दवाओं और उपकरण की खरीद के लिए 10 करोड़ का फंड भी मिला है। जिन चार विभागों में सर्जरी के लिए ये फंड दिया गया है। उसमें एसीआई भी शामिल है। पड़ताल में पता चला है कि इस फंड से पहले करीब दो करोड़ की पुरानी उधारी ही चुकता हो पाएगी। सर्जरी के लिए जरूरी स्टेंट, बलून, वॉल्व, टिशू वॉल्व आदि कितनी मात्रा में मिल पाएंगे अभी ये तय नहीं है।
10 करोड़ के उपकरण चाहिए
संस्थान में सर्जरी को नियमित रखने के लिए करीब 10 करोड़ के जरूरी उपकरणों की मांग की जा रही है। इसमें पोस्ट सर्जरी के बाद आईसीयू में हार्ट पेशेंट को रखने के लिए एक दर्जन से ज्यादा मल्टी पैरा मॉनिटर की जरूरत है। एसीआई में 12 बिस्तरों वाले एक आईसीयू वार्ड का प्रस्ताव भी अटका हुआ है। यही नहीं संस्थान में 60 लाख की एक्मो मशीन, 17 से 20 लाख की कॉटरी मशीन, पोर्टेबल इको मशीन जैसे उपकरण चाहिए।
200 भर्ती की फाइल ही बंद
पिछले साल मार्च में 200 स्टॉफ की भर्ती के लिए शासन को प्रस्ताव दिया था। शासन की ओर से साढ़े 8 करोड़ भी मंजूर किए गए। कोरोना की वजह से फाइलें विभागों के बीच घूमती रही और 2020-2021 का वित्तीय वर्ष भी खत्म हो गया। भर्ती नहीं होने के कारण साढ़े 8 करोड़ रुपए की राशि भी लेप्स हो चुकी है। अब शासन ने संस्थान से दोबारा 50 प्रतिशत कटौती के साथ 150 तकनीकी स्टॉफ भर्ती के लिए नया प्रस्ताव मांगा है।

मरीजों के लिए अलग सिस्टम नहीं
एसीआई संस्थान में प्रवेश के लिए दो गेट हैं। एक गेट अस्पताल के अंदर से सीधा संस्थान तक जाता है। जबकि दूसरा गेट डेंटल कॉलेज के सामने सड़क की दूसरी ओर है। ज्यादातर मरीज इस बात को लेकर अक्सर भ्रम में रहते हैं कि संस्थान में आखिर जाएं तो कहां जाएं। यही नहीं दिल के मरीजों को भी अंबेडकर अस्पताल के बाकी मरीजों की लाइन में ही लगना पड़ता है।

यही नहीं एसीआई के पास अपनी खुद की एंबुलेंस तक नहीं है। इससे सर्जरी जैसी इमरजेंसी की सूरत में मरीजों को आवाजाही में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ब्लड आदि की जांच के लिए मरीजों को संस्थान से अंबेडकर अस्पताल में ही जाना पड़ता है। जहां मरीज पहले से ही बहुत ज्यादा होते हैं, इससे इनवेस्टीगेशन रिपोर्ट मिलने में कई बार तीन दिन से अधिक का समय लग जाता है। हार्ट पेशेंट के लिए जांच रिपोर्ट में इतनी लंबी वेटिंग जानकारों के मुताबिक सही नहीं रहती है। संस्थान में मरीजों की जांच के लिए अलग पैथेलॉजी की दरकार भी है।

  • एसीआई में सर्जरी को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए दिक्कतों को दूर किया जा रहा है। हाल ही में हमने दवाएं उपकरण की खरीद के लिए फंड जारी किया है। - टीएस सिंहदेव, स्वास्थ्य मंत्री
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