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  • In The Second Wave, More Than 10 Thousand Children Were Infected, If The Symptoms Are Normal, Then The Government Protocol To Provide Paracetamol And Multivitamins At Home.

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:दूसरी लहर में 10 हजार से ज्यादा बच्चे संक्रमित हुए, लक्षण सामान्य हों तो घर में पैरासिटामाॅल और मल्टीविटामिन ही देने का सरकारी प्रोटोकाॅल

रायपुर2 महीने पहले
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प्रदेश में कोरोना की शुरुआत से लेकर अब तक 15 हजार बच्चे संक्रमित हो चुके हैं। इनमें दूसरी यानी मौजूदा लहर में संक्रमण ज्यादा है और लगभग 10 हजार बच्चे पाजिटिव निकले हैं। इस वजह से शासन के हेल्थ विभाग ने बड़ों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी दवाइयों का प्रोटोकाॅल जारी कर दिया है। इसके तहत कोरोना संक्रमित बच्चों को घर में इलाज के दौरान केवल मल्टी विटामिन व पैरासिटामॉल टेबलेट या सीरप दिया जाना है। इससे संक्रमित बच्चे लगातार स्वस्थ भी हो रहे हैं।

बच्चों की श्रेणी में शून्य से 14 वर्ष के बच्चे आते हैं। बच्चों में इम्यून पॉवर बढ़ाने के लिए मल्टीविटामिन देना है और अगर बुखार है तो उन्हें पैरासिटामॉल भी दी जानी है। यह उन बच्चों के लिए है, जो आइसोलेशन में रहकर इलाज करवा रहे बच्चों के लिए है। अस्पताल में मल्टी विटामिन के साथ लक्षण के अनुसार दवा दी जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में 10 साल से नीचे के बच्चों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन (एचसीक्यू) टेबलेट नहीं देने का प्रावधान है। लेकिन जिनकी उम्र 10 वर्ष से ऊपर व वजन 30 किग्रा से ज्यादा हो, उन्हें एचसीक्यू दी गई थी। नए प्रोटोकॉल में एचसीक्यू टेबलेट हटाकर आइवरमेक्टिन को रखा गया है।

इसे भी लक्षण के अनुसार इलाज के दौरान दिया जा रहा है। आइवरमेक्टिन केवल अस्पतालों में दिया जा सकता है, यानी इसे किट यानी पुड़िया में बांधकर घरों में नहीं दिया जा सकता। खास बात यह है कि इसे लिखने का अधिकार पीडियाट्रिशियन को है। जनरल प्रेक्टिशनर ये दवा प्रिस्क्राइब नहीं कर सकते। इसलिए घर में जिन बच्चों का इलाज चल रहा है, उन्हें डाक्टर की सलाह लिए बिना आइवरमेक्टिन या एचसीक्यू टेबलेट नहीं देना है। डॉक्टरों की सलाह व प्रोटोकाॅल के अनुसार मल्टी विटामिन व पैरासिटामॉल शुरू करने के लिए कहा गया है।

बच्चों को सांस में तकलीफ हो तो तत्काल ले जाएं अस्पताल
अगर बच्चे हल्के व बिना लक्षण के हैं, उन्हें गंभीर बीमारी नहीं है, तो ही होम आइसोलेशन में इलाज की अनुमति दी जाएगी। बच्चों की स्थिति बिगड़ने पर उन्हें तत्काल कोरोना केयर सेंटर के बजाय कोरोना अस्पताल ले जाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि सांस लेने में तकलीफ, 5 दिनों से तेज बुखार व खांसी हो, आक्सीजन सेचुरेशन 93 से कम हो, बैठने पर धड़कन तेज हो तो अस्पताल ले जाना जरूरी है।

नए वेरिएंट से बच्चे संक्रमित
कोरोना के नए वेरिएंट एन-440 ने वयस्कों के साथ बच्चों व महिलाओं को भी गिरफ्त में ले लिया है। दूसरी लहर में बच्चे ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं। पहले परिवार में वयस्क व कामकाजी ही पॉजिटिव आ रहे थे। अब परिवार में एक सदस्य के संक्रमित होने के बाद पूरा परिवार पॉजिटिव आ रहा है। नए वेरिएंट वाले वायरस तेजी से संक्रमण फैला रहा है और मौत भी ज्यादा हो रही है। मार्च से दूसरी लहर चल रही है। तब से संक्रमित होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है।

एक्सपर्ट व्यू; घर में आइवरमेक्टिन न दें
नए प्रोटोकाल में बच्चों को मल्टी विटामिन व पैरासिटामॉल देना है। लक्षण है तो अस्पताल में भर्ती अनिवार्य है। लक्षण के आधार पर आइवरमेक्टिन भी दे सकते है। होम आइसोलेशन के दौरान आइवरमेक्टिन या एचसीक्यू टेबलेट बच्चों को न दें।
-डॉ. आरके पंडा, सदस्य कोरोना कोर कमेटी

खास ध्यान देने की जरूरत
दूसरी लहर में बच्चे व महिलाएं भी बड़ी संख्या में संक्रमित हो रही है। देखने में आ रहा है कि जब परिवार का एक सदस्य संक्रमित हो रहा है, तो वहां बच्चे भी पॉजिटिव आ रहे हैं। ऐसे में जो संक्रमित है, वे बच्चों के संपर्क में भी बिल्कुल न रहें।
-डॉ. शारजा फुलझेले, एचओडी पीडियाट्रिक नेहरू मेडिकल कॉलेज

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