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  • In The State, In Three Months, Only 2 Percent Of The Youth Are Given Both Doses, If This Speed Continues, Then It Will Take 12 Years For The Entire Population To Be Vaccinated.

धीमा वैक्सीनेशन:प्रदेश में दोनों डोज तीन माह में केवल 2 प्रतिशत युवाओं को, यही रफ्तार रही तो पूरी आबादी के वैक्सीनेशन में लग जाएंगे 12 साल, जरूरत से आधी सप्लाई इसकी वजह

रायपुर3 महीने पहले
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  • छत्तीसगढ़ में 18 प्लस में भी पहली डोज केवल 32 प्रतिशत को, यह इसलिए क्योंकि टीके की सप्लाई ही कम

प्रदेश में सबसे बड़ी आबादी (1.34 करोड़ से अधिक) वाले 18 से 44 की आयुवर्ग के केवल 2 फीसदी लोगों को अब तक यानी पिछले 3 माह में वैक्सीन की दोनों डोज लग पाई हैं। जबकि स्थिति यह है कि 32 फीसदी लोग पहली डोज लगवा चुके हैं और इनमें से अधिकांश की दूसरी डोज ड्यू हो चुकी है। 18 प्लस का वैक्सीनेशन 1 मई को शुरू हुआ था।

जानकारों का अनुमान है कि इस आयु वर्ग में टीकाकरण की रफ्तार यही रही तो इस आयु वर्ग के सभी लोगों को दोनों डोज लगाने में 150 महीने यानी साढ़े 12 साल लग जाएंगे। प्रदेश शासन के अफसरों का कहना है कि केंद्र से टीकों की धीमी सप्लाई इसकी बड़ी वजह बनी हुई है। अगस्त में भी वैक्सीन के 19 लाख डोज मिलने की ही संभावना है, जबकि टारगेट के हिसाब से जरूरत हर माह 30-35 लाख डोज की है।

प्रदेश में वैक्सिनेशन इसलिए रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है क्योंकि टीका जरूरत का आधा ही मिल पा रहा है। इनमें भी सबसे ज्यादा संख्या वाले 18 प्लस आयुवर्ग वालों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। प्रदेश में 18 प्लस की आबादी 1 करोड़ 34 लाख 33 हजार 21 है। इनमें 42 लाख 71 हजार 629 को पहली डोज व केवल 2 लाख 31 हजार 735 लोगों को दोनों डोज लगी है। 98 फीसदी लोगों को दोनों डोज लगनी बाकी है। यही रफ्तार रही तो 18 प्लस के सभी लोगों को दोनों डोज लगाने में काफी समय लग जाएगा।

तीन माह में 32 फीसदी लोगों को पहली डोज लगी है तो शत-प्रतिशत डोज के लिए 6 माह और लग जाएंगे। संभावना है कि इस साल के अंत तक सभी 18 प्लस को पहली डोज लग जाए। हालांकि पहली डोज पूरी होने में जब 44 प्लस लोगों को टीके लग जाएंगे तो 18 प्लस वालों को ज्यादा टीके लगेंगे। पिछले कुछ दिनों में 18 प्लस वाले लोगों में टीके लगाने के उत्साह में कमी आई है। हालांकि इसका कारण वैक्सीनेशन सेंटरों में टीके का उपलब्ध नहीं होना है। कई बार पर्याप्त टीके नहीं होने पर वैक्सीनेशन सेंटर बंद कर दिया जाता है। इससे लोगों को बिना टीका लगवाए लौटना पड़ता है।

संक्रमण कम होने से भी केंद्रों से दूर होने लगे लोग
कोरोना का संक्रमण लगातार घट रहा है। इस वजह से टीकाकरण की रफ्तार कम हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण कम होने की वजह से लोग टीकाकरण केंद्रों से दूर जा रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में टीके को लेकर अफवाहें बरकरार हैं। यह भी एक कारण है।

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