शासन ने कलेक्टरों को अधिकृत किया, फैसला आज:संक्रमण-मौतें कम नहीं, ज्यादा प्रभावित शहरों में बढ़ सकता है लाॅकडाउन, मंथन इसलिए 15 दिन में ही मिल गए 2 लाख मरीज

रायपुरएक वर्ष पहले
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  • अप्रैल के अंत तक बढ़ सकता है लॉकडाउन

राजधानी समेत प्रदेश के 22 से अधिक जिलों में मरीज़ों की संख्या और मौत के मामले में लगातार वृद्धि को देखते हुए अब लाकडाउन बढ़ाने पर मंथन शुरु हो गया है। फिलहाल प्रदेश के कई जिलों में लाॅकडाउन है। इसकी अवधि 26 से लेकर 29 अप्रैल तक है। लाॅकडाउन बढ़ाने के मसले पर राज्य सरकार ने कलेक्टरों को अंतिम निर्णय करने अधिकृत कर दिया है।

शासन ने कलेक्टरों को संकेत दिए हैं कि वे हालात की खुद समीक्षा करें और अलग लगता है कि जरूरी है, तो लाॅकडाउन बढ़ाने का फैसला कर सकते हैं। शासन ने कलेक्टरों को यह निर्देश भी दिए हैं कि वे ही दिनों की अवधि तय कर सकते हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार राजधानी समेत जिन जिलों में लाकडाउन 26 को खत्म हो रहा है, वहां के कलेक्टर शनिवार को आगे का फैसला करेंगे। यह भी संभव है कि अगर छूट देने की बात भी आई तो इस मामले में सख्ती बरती जाएगी। यह पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे कि लोगों को समूह में मौजूदगी से कड़ाई से रोका जाएगा।

दरअसल दो दौर के लाॅकडाउन के बाद भी संक्रमण की रफ़्तार कम नहीं होने और मरीज़ों की संख्या में लगातार वृद्धि से प्रशासनिक अमला परेशान है। वह लगातार डाक्टरों से संपर्क कर इसका तलाश रहा है। अब फिर से लॉकडाउन बढ़ाए जाने के प्रश्न पर डाक्टरों का कहना है कि न्यूनतम चौदह दिन का लॉकडाउन जरुरी है, और यदि इस बीच संक्रमण की रफ़्तार में कमी ना आए. तो उसे और बढ़ाना चाहिए। वहीं, लाकडाउन के दौरान आ रही परेशानियों को देखते हुए जनसामान्य कुछ छूट के पक्ष में भी है।

सर्वाधिक परेशानी कोरोना संक्रमित मरीजों के परिजनों को उठानी पड़ रही है। हाल के दिनों में मरीजों के लिए दवाओं के लिए अस्पातल प्रबंधन परिजनों को चिट थमाने लगे हैं। और वे खरीददारी के लिए पूरे शहर का चक्कर लगाने मजबूर हैं। साथ ही घरेलू उपयोग के सामान न मिलने से भी परेशानी बढ़ गई है।

मंथन इसलिए...15 दिन में ही मिल गए 2 लाख मरीज
लॉकडाउन के 15 दिनों में प्रदेश में 210436 व राजधानी में 47719 कोरोना के नए मरीज मिले हैं। इस दौरान प्रदेश में 2211 व रायपुर में 908 लोगों की कोरोना से मौत भी हुई है। लॉकडाउन के दौरान ही प्रदेश में कोरोना पीक का काल शुरू हुअा है। ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार को प्रदेश में कोरोना से सर्वाधिक 207 लोगों की मौत और रिकार्ड 16750 मरीज भी मिल चुके हैं। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में इन दिनों लॉकडाउन है और इस दौरान सारे अनुमानों के विपरीत नए मरीज बेतहाशा तो बढ़े ही हैं, कोरोना से जान भी ज्यादा जा रही है।

राहत वाली बात यह रही कि अस्पतालों व होम आइसोलेशन में रिकवर करने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन में लोग घरों में रहते हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से मरीजों की संख्या कम होनी थी। मौत में भी कमी आनी थी, पर ऐसा बिल्कुल नहीं हो रहा है। इससे विशेषज्ञ भी हैरान है। जिन छोटे जिलों में केस कम थे, वहां भी पिछले 15 दिन में केस बढ़े हैं। यही स्थिति मौतों की भी है। राजधानी में जरूर 18 से 20 अप्रैल तक 3000 से कम मरीज मिले थे, लेकिन पिछले 3 दिनों से फिर इससे ज्यादा मरीज मिलने लगे हैं।

ये तीन कारण जिम्मेदार

  • लॉकडाउन का पालन नहीं: संपूर्ण लॉकडाउन तो है, लेकिन अभी भी एक से दूसरे राज्य व जिलों में लोगों की आवाजाही शुरू है। इसलिए संक्रमण रूकने के बजाय बढ़ रहा है।
  • समय पर जांच-इलाज नहीं : ज्यादातर लोग अभी भी लक्षण दिखते ही कोरोना की जांच नहीं करवा रहे हैं। इससे देरी से इलाज शुरू हो रहा है और मौत हो रही है।
  • होम आइसोलेशन का उल्लंघन : लॉकडाउन में लोग अभी भी बाहर घूम रहे हैं। घरों में रहने के बजाय वे बाहर नजर आते हैं। वे बाहर से संक्रमित हो रहे हैं।

नए केस व मौतों की संख्या बढ़ने से लगता है कि लोग लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं। अंतरराज्यीय व अंतरजिला आवागमन जारी है। इससे संक्रमण बढ़ रहा है। समय पर जांच व इलाज में देरी से मौत बढ़ी है।
-डॉ. सुभाष मिश्रा, मीडिया प्रभारी, स्टेट कोरोना सेल

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