भास्कर एक्सक्लूसिवदंगल के लिए आमिर ने छोड़ी थी शराब:बॉलीवुड के रेसलिंग कोच ने बताया कुश्ती प्लेयर्स का संघर्ष, झेलना पड़ता है असहनीय दर्द

रायपुर2 महीने पहलेलेखक: सुमन पांडेय
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ये कुश्ती नहीं आसां, दर्द का दरिया है और डूब कर जाना है। एक कुश्ती के खिलाड़ी को आम आदमी हारते-जीतते देखता है। मगर इसके पीछे की जो जिंदगी होती है उसकी मुश्किलें सामने नहीं आ पातीं। इन दिनों कुश्ती के खिलाड़ी शोषण के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, आंदोलन कर रहे हैं।

इस बीच कोच कृपा शंकर पटेल ने बताया कि एक कुश्ती खिलाड़ी को क्या कुछ सहना पड़ता है। कृपा को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है ये फिल्म दंगल में आमिर खान और फिल्म की एक्ट्रेसेस को ट्रेन कर चुके हैं। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में कृपा ने खुद दिलचस्प बातें बताईं।

प्रैक्टिस के दौरान कोच की पुरानी तस्वीरें।
प्रैक्टिस के दौरान कोच की पुरानी तस्वीरें।

लाखों बार दर्द से गुजरता है खिलाड़ी
इंटरनलेशनल कोच कृपा शंकर गीता-बबीता जैसे मशहूर कुश्ती खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। उन्होंने बताया कि फिजिकल ट्रेनिंग तो होती ही है। खिलाड़ी दर्द से गुजरते हैं। कुश्ती के इस खेल में शरीर बुरी तरह से तोड़ा, मरोड़ा जाता है। ट्रेनिंग और खेलने के बाद इतना दर्द होता है कि समझ नहीं आता कहीं चोट लगी है या थकान का दर्द है। फिल्म दंगल की ट्रेनिंग में मैं एक्ट्रेसेस फतिमा को मूव्स सिखाया करता था तो उनका और बुरा हाल होता था क्योंकि वो खिलाड़ी नहीं थे। कुश्ती के दर्द को ऐसे समझिए कि जैसे हजारों लठ आपके पूरे शरीर पर किसी ने मारे हों। ये सहकर खिलाड़ी मजबूत बनता है लाखों बार दर्द सहता है।

मेडल के साथ योगेश्वर दत्त की पुरानी फोटो।
मेडल के साथ योगेश्वर दत्त की पुरानी फोटो।

चोट खिलाड़ियों का गहना है
कृपा शंकर ने बताया उनके कान टूट गए, उंगली टूट गई। कुश्ती में खिलाड़ियों को चोट लगती ही है। कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं हो सकता जो नेशनल या इंटरनेशनल मैडल लाए और उसे चोट न लगे। योगेश्वर दत्त ने दो बार ओलिंपिक्स मैडल जीते दो बार सर्जरी करवाई है घुटने की। चोट, इस खेल में खिलाड़ियों का गहना है। कोई खिलाड़ी इस प्रसाद से बचा नहीं है।

भास्कर से कृपा शंकर ने खास बातचीत की।
भास्कर से कृपा शंकर ने खास बातचीत की।

क्यों टूट जाते हैं पहलवानों के कान
अक्सर देखा जाता है कि कुश्ती के पहलवानों के कान का आकार बदला हुआ होता है। आम लोगों के मुकाबले पहलवानों के कान सपाट से बाहर की तरफ उभरे होते हैं। कृपा शंकर बताते हैं कि ऐसा कान की नसें टूटने की वजह से होता है। जब बार-बार पहलवानों को खेल के दौरान दूसरा खिलाड़ी पूरा दम लगाकर उनकी गर्दन मरोड़ता है, सिर को पकड़ता है दबोचता है तो कान, बार-बार रगड़ खाते हैं, दबते हैं बुरी तरह मुड़ते हैं। इससे कान की नसें टूटती हैं, खून जमता है। वहां मक्खी भी बैठ जाए तो असहनीय दर्द होता है। बार-बार प्रैक्टिस में कान इसी तरह से बदल जाते हैं।

आमिर खान के साथ पुरानी तस्वीरें।
आमिर खान के साथ पुरानी तस्वीरें।

जब आमिर को छोड़नी पड़ी शराब
फिल्म दंगल में एक्टर्स ने किसी प्रोफेशनल की तरह कुश्ती स्क्रीन पर दिखाई। ये मुमकिन हो पाया था कृपा शंकर की ट्रेनिंग की वजह से। कृपा ने दंगल के सेट्स पर ट्रेनिंग के किस्सों को याद करते हुए बड़ी बात बताई। उन्होंने कहा कि कुश्ती को समझने और एक पहलवान की जिंदगी जीने के लिए आमिर खान को सिगरेट शराब छोड़नी पड़ी थी।

एक्ट्रेस को ट्रेनिंग देते कृपा शंकर।
एक्ट्रेस को ट्रेनिंग देते कृपा शंकर।

कृपा ने बताया कि फिल्म की एक्ट्रेसेस ट्रेनिंग से परेशान हो चुकी थीं। वो बुरी तरह से थक जाया करती थीं। मेरे लिए भी नई बात थी क्योंकि अब तक मैं नेशनल खिलाड़ियों को सिखा रहा था जो हट्‌टे-कट्टे थे। फिल्म वाली लड़कियां छुई-मुई सी थीं, हाथ लगाया नहीं कि उई मां कह दें। ट्रेनिंग में उन्हें तकलीफ हुई मगर मैंने उन्हें मजबूत बनाया उन्होंने भी हौसला दिखाते हुए ट्रेनिंग को सीरियसली लिया। एक बार एक्ट्रेस फातिमा सना से कुछ कुश्ती के मूव्स हो नहीं रहे थे, उनके मुंह से अपशब्द भी निकल गए। मैंने ये सहन नहीं किया, कुश्ती का अनुशासन होता है गुरु शिष्य परंपरा होती है। मेरी आपत्ति के बाद उन्होंने अपशब्द कहने बंद किए।

फिल्म शूटिंग के दौरान कृपा शंकर।
फिल्म शूटिंग के दौरान कृपा शंकर।

कृपा कहते हैं- दंगल फिल्म के वक्त टफ ट्रेनिंग की वजह से आमिर खान भी परेशान हो उठते थे। सिगरेट शराब का सेवन कर लिया करते थे तनाव में। एक दिन वो पीकर कुश्ती के मैट पर आ गए। मैंने उन्हें टोका। मैंने कहा कि आप महावीर फोगाट के जीवन का किरदार कर रहे हैं। सिर्फ ट्रेनिंग नहीं उनके जैसा जीवन जीकर दिखाइए। इस खेल को समझने अनुशासन जरूरी है। आमिर मेरी बात समझ गए उन्होंने तब सिगरेट शराब छोड़ दी थी। मैं भी मानता हूं कि मेरी वजह से शूटिंग के वक्त एक ये नेक काम हो गया।

कुश्ती खिलाड़ियों के विवाद पर भी बोले, कृपा
ये जो चीजें चल रही है, वो काफी लंबे समय से चल रही हैं। नियमों को सही तरीके से इम्प्लीमेंट नहीं किया जा रहा है। यहां नौसिखिए रेफरी को कॉम्पिटिशन में सीखने के लिए लगा देते हैं। इससे नेशनल लेवल पर कई गलत डिसीजन होते हैं। सीनियर लेवल के मंच पर नौसिखिए रेफरी कोच बनकर सिखाएंगे तो मेडल कहां से आएगा? मैंने तो कुछ दिन पहले ही ऐसे लोगों के नाम के साथ फेडरेशन को अवगत कराया था। बजरंग पुनिया के कोच सुजीत मान ने रेफरी पर आपत्ति की। इस आपत्ति पर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने सभी खिलाड़ियों से मुलाकात की है, उन्हें आश्वासन भी दिया गया और मामले की जांच भी जारी है। जांच के बाद जो भी चीजें सामने आएगी, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।

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