दावों की पोल खुली / अनुमान था कि 65 हजार मजदूर बाहर, पर लौटने के लिए पंजीयन 2.5 लाख पार

It was estimated that 65 thousand laborers were out, the registration to return exceeded 2.5 lakhs
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It was estimated that 65 thousand laborers were out, the registration to return exceeded 2.5 lakhs

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:10 AM IST

रायपुर. कौशल स्वर्णबेर | कोरोना संक्रमण के कारण दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों की संख्या अब तक ढाई लाख को भी पार कर चुकी है। राज्य सरकार के श्रम विभाग द्वारा किए जा रहे ऑनलाइन पंजीयन से इसका खुलासा हुआ है। इससे बरसों पुराने सरकारी दावों की पोल खुल गई है, जिनमें यह कहा जाता रहा है कि पलायन करने वालों की संख्या कम हो गई है। हालात ये हैं कि बमुश्किल एक माह पहले शासन का अनुमान था कि प्रदेश के 65 हजार से ज्यादा मजदूर अन्य राज्यों में हैं। लेकिन यह एक माह में बढ़ते-बढ़ते ही ढाई लाख पार हो चुकी है और इसके 3 लाख तक पहुंचने के आसार हैं। 
दरअसल लॉकडाउन के कारण उद्योग, धंधों के साथ सभी प्रकार के काम बंद हो गए। काम बंद होने से मजदूर बेरोजगार हो गए और उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। खाने को राशन और रहने को छत नहीं होने के कारण मजदूर अपने उन घरों की ओर वापस जाने की जद्दोजहद में लग गए रोजी-रोटी की तलाश में वो सालों पहले छोड़ आए थे। लाॅकडाउन से  बस,ट्रेन और यातायात के सभी साधन बंद कर दिए गए थे लेकिन जब कोटा में पढ़ रहे बच्चों की घर वापसी की शुरुआत हुई तो बात मजदूरों की घर वापसी को लेकर भी शुरु हो गई। जैसे ही लॉकडाउन 3.0 के दौरान श्रमिकों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की बात शुरू हुई कई मजदूर सड़कों पर पैदल ही हजारों किलोमीटर की सफर पर निकल पड़े। 
 वहीं सरकारी व्यवस्था के तहत जब केन्द्र सरकार ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने की मंजूरी दी तो फिर राज्यों ने श्रम विभाग के माध्यम से छत्तीसगढ़ लौटने वाले श्रमिकों का पंजीयन शुरु किया। श्रम विभाग का दावा था कि प्रदेश के बाहर लगभग 60 से 65 हजार मजदूर ही फंसे हुए हैं। लेकिन जब श्रमिकों के लिए ऑनलाइन पंजीयन शुरु किया गया तो देखते ही देखते यह आंकड़ा एक सप्ताह में 2 लाख 96 हजार तक को पार कर गया। 
श्रम विभाग के लिए भी यह आंकड़ा चौकाने वाला है। बताया गया है कि ऑनलाइन पंजीयन लगातार जारी है और यह संख्या तीन लाख तक पहुंचने की संभावना है। छत्तीसगढ़ के प्रवासी श्रमिकों एवं अन्य लोगों की वापसी के लिए ऑनलाइन पंजीयन की व्यवस्था के तहत अब तक कुल 2 लाख 96 हजार 586 लोगों ने पंजीयन कराया है, जिसमें 2 लाख 72 हजार 152 श्रमिक तथा शेष छात्र, तीर्थ यात्री, पर्यटक एवं अन्य लोग शामिल हैं। 
गांवों के रजिस्टर में पलायन करने वालों के नाम ही नहीं 
पलायन के चौकाने वाले आंकड़े सामने आने के बाद जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि नियमत: गांव से बाहर कमाने-खाने जाने वाले व्यक्ति को गांव से बाहर जाने की सूचना सरपंच को देकर जाना होता है। सरपंच इसकी सूचना ब्लॉक कार्यालय में देता है। लेकिन सरपंच ऐसा नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण सही आंकलन श्रम विभाग तक नहीं आ पाया है। श्रम विभाग के पास केवल वही आंकड़े हैं जो पंजीकृत ठेकेदार श्रमिकों को लेकर जाते हैं और जो इसकी सूचना विभाग को देते हैं। यही वजह है कि राज्य से बाहर जाकर काम करने वालों की बहुत ही कम संख्या विभाग के पास दर्ज है।
सिर्फ श्रमिक पंजीयन रजिस्टर होता है
"राज्य में पलायन रजिस्टर जैसा कुछ भी नहीं है, सिर्फ श्रमिक पंजीयन रजिस्टर होता है। जो ठेकेदार मजदूरों को बाहर लेकर जाता उसकी जानकारी के आधार पर ही श्रमिकों का पंजीयन कराया जाता है। लेकिन कई ठेकेदार गोपनीय तरीके से लेकर चले जाते हैं उनकी संख्या नहीं मिल पाती है। जैसे-जैसे सूचना मिलती है उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।"
-डाॅ. शिव डहरिया, श्रम मंत्री

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