गड़बड़ी का बड़ा खुलासा:नेत्र सहायकों की मार्कशीट में जेएनएम का लोगो, जबकि ऐसा कोर्स ही नहीं

रायपुरएक महीने पहलेलेखक: प्रशांत गुप्ता
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सूत्रों के मुताबिक बीते कई वर्षों से प्रदेशभर में इसी प्रकार मार्कशीट जारी होती आ रही हैं। - Dainik Bhaskar
सूत्रों के मुताबिक बीते कई वर्षों से प्रदेशभर में इसी प्रकार मार्कशीट जारी होती आ रही हैं।

छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा संचालित नेत्र सहायकों के 2 वर्षीय पाठ्यक्रम में एक बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। इससे न सिर्फ इस कोर्स बल्कि जारी हो रही मार्कशीट की वैद्यता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं? जी हां, काउंसिल छात्रों को जो मार्कशीट जारी कर रही है, उसमें पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर के नाम और लोगो का इस्तेमाल किया जा रहा है।

जबकि कॉलेज में ऐसा कोई कोर्स संचालित ही नहीं हो रहा है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि नेत्रसहायकों ने संचालक स्वास्थ्य सेवाएं को मार्कशीट के साथ पूरे मामले की लिखित शिकायत की। संचालनालय ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज की नेत्ररोग विभागाध्यक्ष को पत्र लिखा, जिनके जवाब से साफ हो गया कि कहीं न कहीं गड़बड़ी है।

अब मामला विभागीय है, इसलिए हर कोई जवाब देने से बच रहा है। सूत्रों के मुताबिक बीते कई वर्षों से प्रदेशभर में इसी प्रकार मार्कशीट जारी होती आ रही हैं। भास्कर के पास मौजूदा मार्कशीट में ट्रेनिंग सेंटर का नाम स्व. चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज का जिक्र है, जबकि परीक्षा केंद्र रायपुर लिखा है। मार्कशीट में काउंसिल के रजिस्ट्रार एवं कोर्स डायरेक्टर डॉ. जितेंद्र तिवारी के हस्ताक्षर हैं।

खुलासा इन पत्रों से

18 अक्टूबर: डीएचएस से नेत्ररोग विभागाध्यक्ष को पत्र

- पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा नेत्रसहायक द्विवर्षीय कोर्स संचालित किया जाता है। जानकारी के मुताबिक सिर्फ चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज को कोर्स संचालन की मंजूरी दी गई है। शासकीय मेडिकल कॉलेज में यह कोर्स 2013 से बंद है, लेकिन मार्कशीट में संस्था का नाम पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज रायपुर अंकित है। क्या आपके विभाग में ऐसा कोई कोर्स संचालित हो रहा है? यदि नहीं तो मार्कशीट में पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज अंकित होने का क्या औचित्य है? क्या आपके विभाग की निजी संस्था के प्रशिक्षण की कोई अधिकारिक भूमिका है?

9 नवंबर- नेत्र एचओडी डॉ. निधि पांडेय का जवाब
- वर्तमान में नेत्ररोग विभाग में नेत्र सहायक का कोई भी कोर्स संचालित नहीं हो रहा है। मार्कशीट में इस संस्था के नाम होने के औचित्य की कोई जानकारी इस विभाग को नहीं है। प्रथम दृष्टया यह उचित प्रतीत नहीं होता है। िकसी भी निजी संस्था के संचालन में कोई भूमिका नहीं है।

विभागाध्यक्ष ने यह भी लिखा- इस प्रकरण को संज्ञान लेते हुए इस पत्र की एक प्रति डीन और एक प्रति डीएमई को भेजी जा रही है।

पुराना फार्मेट नहीं बदला : रजिस्ट्रार
सवाल :
फार्मेट क्यों नहीं बदला गया?
पैरामेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डा. तिवारी का कहना है कि मार्कशीट का पुराना फॉर्मेट है जो नहीं बदला गया। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर क्यों? इसके न बदलने से हर कोई यही समझ रहा है कि कोर्स पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज में संचालित है। नौकरियों के आवेदन में अभ्यर्थियों इसी मार्कशीट को लगा रहे होंगे। इसी मार्कशीट के आधार पर न जाने कितने लोग नौकरियों मिल गई होंगी? फॉर्मेट न बदलना जाना कई आशंकाओं को
भी जन्म देता है।

तीन बड़े सवाल

  • जब ट्रेनिंग सेंटर -चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज है तो फिर पं. जेएनएम कॉलेज के नाम का इस्तेमाल क्यों?
  • अगर मेडिकल कालेज के नाम का गलत उपयोग हो गया, तो क्या अब तक जारी मार्कशीट फर्जी मानी जाएंगी?
  • मार्कशीट में दे सकते थे संबंधित संस्थान का लोगो। रायपुर मेडिकल कालेज के लोगो का ही इस्तेमाल किसलिए?

नेत्ररोग विभाग में नेत्र सहायकों से संबंधित कोई कोर्स नहीं चल रहा है। इस बारे में पूछा गया था, मैंने जवाब दे दिया है।-डॉ. निधि पांडेय, नेत्ररोग एचओडी

मार्कशीट का काफी समय से ऐसा ही फार्मेट है। हमारी मेडिकल कॉलेज से संबद्धता है, सारे कोर्स वहीं से चल रहे हैं।-डॉ. जितेंद्र तिवारी, सचिव एवं रजिस्ट्रार, छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल

अगर पैरामेडिकल काउंसिल कोई कोर्स चला रही है तो अपनी संस्था का नाम इस्तेमाल करे। इसकी जानकारी लेता हूं। -डॉ. विष्णुदत्त, डीन, पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज, रायपुर