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खैरागढ़ उपचुनाव का Exit Poll:आसानी से जीतेगी कांग्रेस, जिस जकांछ के पास सीट थी उसको जमानत बचाना भी मुश्किल

रायपुर10 महीने पहले
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खैरागढ़ विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में वोटिंग खत्म हो गई है। दैनिक भास्कर ने मतदान के दौरान वोटर्स का सर्वे किया। रुझान के मुताबिक खैरागढ़ सीट पर सत्ताधारी दल कांग्रेस की प्रत्याशी यशोदा वर्मा जीत रही हैं। छुईखदान समेत कुछ इलाकों में भाजपा प्रत्याशी कोमल जंघेल टक्कर दे रहे हैं, लेकिन वो ऐसी लीड नहीं बना पाएंगे जिससे चुनाव जीत जाएं। सबसे खराब स्थिति में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ है। पिछला विधायक इसी पार्टी का था, लेकिन इस चुनाव में इसके प्रत्याशी नरेंद्र सोनी को जमानत बचाना कठिन हो रहा है।

वोटिंग के रूझान से लगता है कि कांग्रेस का नया जिला बनाने का दांव चल गया है। इस एक वादे के सहारे सत्ताधारी कांग्रेस जीत की ओर बढ़ गई है। मतदान के बाद दैनिक भास्कर ने खैरागढ़ के मतदाताओं से बात की। अधिकांश मतदाताओं ने नये जिले के लिए मतदान की बात कही है। उनका कहना है कि कांग्रेस इस समय सरकार में है। उसने नया जिले बनाने का वादा किया है। उसे जनादेश मिले तो यह काम सत्ताधारी दल ही कर सकता है। दूसरे दल के साथ जाने का फिलहाल कोई फायदा नहीं दिख रहा है। साल्हेवारा क्षेत्र में भी मतदाताओं को नये जिले का फायदा समझ में आया है। इस क्षेत्र में कहा जा रहा है कि कांग्रेस की प्रत्याशी जीत गई तो उन्हें जिला मुख्यालय के काम के लिए 150-160 किमी राजनांदगांव जाने की मजबूरी से छुट्‌टी मिल जाएगी। इन इलाकों में कांग्रेस को बड़ी बढ़त मिलती दिख रही है।

कुछ इलाकों में भाजपा को भी बढ़त

छुईखदान इलाके में कुछ मतदाता भाजपा उम्मीदवार कोमल जंघेल के व्यक्तित्व पर वोट डालने पहुंचे थे। वहीं गंडई में मतदाताओं का कहना था, वे लोग कांग्रेस के पंजे से परिचित हैं, लेकिन उसकी उम्मीदवार यशोदा वर्मा को नहीं जानते। कोमल जंघेल उनसे पहले से ही परिचित हैं, इसलिए उनको ही वोट जा रहा है। इस इलाके में कई मतदाता कांग्रेस और उसके जिले के वादे पर बात करते दिखे। उनका कहना था, अभी वे लोग केवल कांग्रेस को देख रहे हैंए उसके प्रत्याशी की ओर ध्यान नहीं है। अभी मौका है खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला बन गया तो इस इलाके का विकास होगा। लोगों को सुविधा मिल जाएगी। मतदाताओं के रुझान से लग रहा है कि छुई खदान और गंडई के इलाके में कांग्रेस को कड़ी टक्कर मिल रही है।

खैरागढ़ में कैसे बना कांग्रेस का माहौल

खैरागढ़ विधानसभा चुनाव में सबसे पहले कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित किया। तय फार्मुले के मुताबिक यहां की जातीय बहुसंख्यक आबादी "लोधी' से यशोदा वर्मा को टिकट दिया गया। पूरे क्षेत्र के लिए कम परिचित चेहरा देखकर भाजपा ने पूर्व विधायक और "लोधी' समाज से ही आने वाले कोमल जंघेल को फिर से मैदान में उतारा। प्रत्याशी के स्तर पर भाजपा का यह बड़ा मूव था। इसकी काट के लिए कांग्रेस नये जिले का वादा लेकर आई। पहली बार उप चुनाव के लिए घोषणापत्र जारी किया गया। कांग्रेस ने कहा, उनका विधायक बना तो खैरागढ़-छुईखदान-गंडई नया जिला बनेगा। इसके बाद माहौल कांग्रेस के पक्ष में बदला। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लगातार छह दिन अलग-अलग क्षेत्रों में जनसभा कर माहौल बना डाला।

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इन वजहों से टक्कर दे पाए भाजपा के काेमल

भाजपा के कोमल जंघेल सामाजिक रूप से काफी सक्रिय नेता हैं। उनका निवास छुईखदान क्षेत्र में है। इसकी वजह से छुईखदान और गंंडई इलाकों में भाजपा की अच्छी पकड़ है। खैरागढ़ शहर में भी भाजपा भारी है, लेकिन जिले की घोषणा से उसके पारंपरिक वोटों पर टूटने का खतरा तय था। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभाओं और जनसंपर्क ने कुछ माहौल बदला है। वहीं भाजपा के दिग्गजों ने लोगों को यह समझाना शुरू कर दिया था कि कांग्रेस यह चुनाव हारी तभी वह जिले का वादा पूरा करेगी।

इस लड़ाई में जनता कांग्रेस कहां है, जिसकी यह सीट थी

2018 के विधानसभा चुनाव में राजा देवव्रत सिंह जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के सिंबल पर खैरागढ़ के विधायक चुने गए थे। उन्होंने भाजपा के कोमल जंघेल को नजदीकी मुकाबले में हराया था। उनकी वजह से कांग्रेस उम्मीदवार और सीटिंग विधायक गिरवर जंघेल को तीसरे स्थान पर रह जाना पड़ा। देवव्रत सिंह के निधन के बाद चुनाव हुए ताे जनता कांग्रेस ने सहानुभूति के सहारे वापसी की कोशिश की। जकांछ ने देवव्रत सिंह के बहनाई नरेंद्र सोनी को मैदान में उतारा। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित पहचान और संसाधनों के अभाव में जकांछ अपनी बात को लेकर बड़े वर्ग तक नहीं पहुंच पाई। ऐसे में किसी भी क्षेत्र में मतदाता जकांछ का नाम लेते नहीं सुने गए।

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उपचुनाव से अधिक मजबूत होती गई है सरकार

2018 के विधानसभा आम चुनाव में कांग्रेस 68 सीट जीतकर सत्ता में आई थी। छत्तीसगढ़ में किसी राजनीतिक दल को मिला यह सबसे बड़ा जनादेश था। अप्रैल 2019 में भाजपा से दंतेवाड़ा के विधायक भीमा मंडावी की एक नक्सली हमले में मौत हो गई। सितम्बर 2019 में इस सीट पर उपचुनाव हुए। इस बार कांग्रेस की देवती कर्मा ने भाजपा की ओजस्वी मंडावी को 11 हजार 192 मतों से हरा दिया। 2019 में हुए लोकसभा चुनाव जीतकर चित्रकोट विधायक दीपक बैज बस्तर के सांसद बन गए। उनके इस्तीफे के बाद अक्टूबर 2019 में चित्रकोट में उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस के राजमन बेंजाम ने भाजपा के लच्छुराम कश्यप को 17 हजार 862 मतों से हरा दिया। 29 मई 2020 को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का निधन हो गया। उनके निधन से खाली मरवाही सीट के लिए नवम्बर 2020 में उप चुनाव हुआ। उसमें कांग्रेस के डॉ. के.के. ध्रुव ने भाजपा के डॉ. गंभीर सिंह को 38 हजार 197 मतों से मात दी। इस तरह नवम्बर 2020 तक विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की संख्या 70 तक पहुंच गई।

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