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कांग्रेस के गले की फांस बना सिलगेर गोलीकांड:कैंप विरोधी आंदोलन को किसान आंदोलनकारियों का समर्थन, योगेंद्र यादव ने कहा- हम भी आदिवासियों के साथ

रायपुर19 दिन पहले
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पिछले 20 दिनों से सिलगेर कैंप के पास आदिवासियों का प्रदर्शन जारी है। ये लोग वहां से कैंप हटाने की मांग कर रहे हैं। - Dainik Bhaskar
पिछले 20 दिनों से सिलगेर कैंप के पास आदिवासियों का प्रदर्शन जारी है। ये लोग वहां से कैंप हटाने की मांग कर रहे हैं।

नक्सल प्रभावित बस्तर के सुकमा जिले में आदिवासी किसानों का एक आंदोलन कांग्रेस सरकार की गले की फांस बनता दिख रहा है। प्रदर्शन के बीच गोली चलने के बाद CRPF के कैंप का विरोध करने सिलगेर में जुटे आदिवासियों का समर्थन बढ़ता जा रहा है। दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन से भी अब इनको समर्थन मिलता दिख रहा है।

किसान आंदोलन के प्रमुख नेता योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन का समर्थन किया है। योगेंद्र ने लिखा, देश के सभी किसान बस्तर गाेलीकांड के शिकार आदिवासी किसानों के साथ हैं। स्वतंत्र मीडिया और मानवाधिकार संगठनों को बिना रोक-टोक सिलगेर जाने दिया जाए। निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले। इससे पहले विभिन्न आदिवासी संगठनों ने भी सिलगेर के आदिवासियों के समर्थन में वर्चुअल प्रदर्शन किया। राज्यपाल को ज्ञापन सौंप कर हस्तक्षेप की मांग की थी। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ भी इस मामले में खुल कर सरकार की लाइन के खिलाफ खड़े हो गए हैं।

क्या हुआ है सिलगेर में

11-12 मई की रात में CRPF ने कैंप के लिए सिलगेर में बाड़बंदी की। 12 मई की सुबह ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया। उस दिन CRPF और DRG के जवानों ने उन्हें खदेड़ दिया। 13 मई को ग्रामीणों ने कैंप के पास ही आंदोलन शुरू किया। 14 मई को ग्रामीणों पर लाठीचार्ज हुआ। कई लोग घायल हुए। 17 मई को भी ऐसा ही विरोध प्रदर्शन चल रहा था, तभी पुलिस ने गोली चला दी। तीन लोगों की गोली लगने से मौत हो गई। भगदड़ में गिरने से एक गर्भवती महिला भी घायल हो गई। 25 मई को उसकी भी मौत हाे गई। ग्रामीणों ने अब वहां मृतकों का एक स्मारक बना दिया। सड़क पर सूखी लकड़ियां रखकर उसे बंद कर दिया है। आंदोलन अब भी जारी है।

सड़क पर जंगल की सूखी लकड़ियों को रखकर ग्रामीणों ने इसे बंद कर दिया है। ये लकड़ियां कई किलोमीटर पर बिखेरी गई हैं।
सड़क पर जंगल की सूखी लकड़ियों को रखकर ग्रामीणों ने इसे बंद कर दिया है। ये लकड़ियां कई किलोमीटर पर बिखेरी गई हैं।

राज्य सरकार कैंप लगाने पर अड़ी हुई है

इस सारे विरोध के बीच राज्य सरकार अभी वहां पर कैंप लगाने पर अड़ी हुई है। 17 मई को गोलीबारी की पहली रिपोर्ट आने पर पुलिस ने कहा था कि ग्रामीणों की आड़ में नक्सलियों ने कैंप पर हमला किया था। उसके बाद गोली चली। बाद में प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 10-10 हजार रुपए की सहायता राशि दी। पुलिस का कहना है कि सिलगेर और आसपास के ग्रामीण नक्सलियों के दबाव में कैंप का विरोध कर रहे हैं। अभी एक दिन पहले सरकार के प्रवक्ता और कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि कैंप का विरोध कौन कर रहा है, यह सभी जानते हैं। सरकार उस सड़क पर अभी 6 कैंप और बनाने जा रही है। पूरी खबर पढ़ें।

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