भास्कर पड़ताल:प्रदेश में कोविशील्ड टीके का स्टॉक जीरो, कोवैक्सीन 1 हजार डोज ही

रायपुर6 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ के स्टेट वैक्सीन स्टोर में कोविशील्ड टीके का स्टॉक जीरो हो गया है। कोवैक्सीन टीके के भी केवल एक हजार ही डोज बचे हैं। दरअसल, आखिरी बार प्रदेश में 29 अप्रैल को 2 लाख कोविशील्ड टीके आए थे। उसके बाद से अभी तक इस टीके की नई सप्लाई नहीं आई है। इसी तरह, राज्य सरकार की ओर से खरीदे गए डेढ़ लाख कोवैक्सीन टीके जो एक मई को आए, उसमें से से 1 हजार टीके का स्टॉक बचा है। रायपुर में पहले तीन दिन में वैक्सीन के 30 हजार 800 रुपए से ज्यादा के 77 डोज बर्बाद हो चुके हैं।

भास्कर ने लगातार चार दिन जब टीकाकरण को लेकर जमीनी पड़ताल की तो कई हैरान करने वाली जानकारियां सामने आई। दरअसल, प्रदेश में अब दो श्रेणी में टीके लगाए जा रहे हैं। एक श्रेणी में 45 से अधिक उम्र के तथा दूसरी श्रेणी में 18 से 44 साल के युवा हैं। बहुत से केंद्रों पर दोनों तरह के टीके लगाए जा रहे हैं। कोवैक्सीन वायल की नई पैकिंग में 10 डोज हैं। इसलिए बहुत से टीकाकरण केंद्र‌ों में वैक्सीन के डोज बर्बाद न हों इसके लिए कम से कम दस हितग्राहियों के पूरा होने का इंतजार तक किया जा रहा है। लेकिन बहुत से अंत्योदय कार्डधारी हितग्राही केवल अकेले ही टीका लगवाने आ रहे हैं।

परिवार के दूसरे सदस्य जो 18 से 44 साल की उम्र के दायरे में आ रहे हैं उनको केंद्र तक लेकर नहीं आ रहे हैं। मंगलवार को टीकाकरण केंद्र में घर से अकेले आए ऐसे लोगों को कहा गया कि वो फोनकर बाकी सदस्यों को भी टीका लगवाने बुला लें, ताकि डोज बर्बाद न हो। दरअसल, एक बार वैक्सीन का वायल खुलने के बाद केवल आधा घंटे तक ही इससे टीके लगाए जा सकते हैं। बाद में बचे डोज बर्बाद मानकर अलग कर दिए जाते हैं। शाम पांच बजे की स्थिति में ऐसी स्थिति बन रही है कि सीनियर और युवाओं की लाइन में दोनों तरफ दो या तीन लोग ही रहते हैं। टीके का अलग-अलग हिसाब होने के कारण लाइन में लगे लोगों को टीके लगाने के लिए दो वायल तक खोलने पड़ रहे हैं। इससे दोनों जगह टीके बर्बाद हो रहे हैं।

सोमवार को 3 डोज बर्बाद
राजधानी के नेहरु मेडिकल कॉलेज के वैक्सीनेशन बूथ में सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच युवाओं के टीकाकरण के लिए दो वायल खोले गए। लेकिन टीके लगवाने वाले केवल 17 लोग ही थे। लिहाजा इस केंद्र में तीन डोज एक बार फिर बर्बाद हो गए। दोनों श्रेणियों का वैक्सीनेशन चलने के कारण शाम को आए हुए सीनियर के लिए भी अलग से वायल खोलना पड़ा। इसलिए 3 लोगों को टीका लगाने के लिए वैक्सीन के 7 डोज बर्बाद हो गए। दरअसल, हेल्थ विभाग ने अभी जो व्यवस्था बनाई है उसमें दोनों श्रेणियों के लिए टीको का कोटा अलग-अलग आया है।

शाम से पहले टीका लगवाने पहुंचे सभी लोगों को टीके लगाना अनिवार्य है। कई घंटों तक वैक्सीन के वायल इसलिए नहीं खोले जाते ताकि वैक्सीन की बर्बादी न हो। वायल तभी खोला जाता है जबकि आर्दश रूप में कम से कम 10 हितग्राही केंद्र में रहें या कम से कम 6 से ज्यादा लोग रहें। जानकारों के मुताबिक अगर अलग-अलग कोटा सिस्टम हटा दिया जाए तो वैक्सीन को बर्बादी को आसानी से रोका जा सकता है।

दो जरूरी सवाल
मेरा पास दूसरे डोज के लिए मैसेज नहीं आ रहा है?

- नई रिसर्च और स्टडी के बाद दोनों वैक्सीन के दूसरे डोज के लिए अधिकतम समय तय हुआ है। कोवैक्सीन का 42 दिन बाद और कोविशील्ड 56 दिन के बाद दूसरा डोज लग रहा है।

कोविशील्ड-कोवैक्सीन के दूसरे डोज कहां लगवाएं? शहर के शहरी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दोनों तरह के टीके के डोज उपलब्ध कराए गए हैं। दूसरा डोज वहां जाकर लगवाया जा सकता है। -डॉ. प्रतीक्षा चौहान, टीकाकरण अफसर

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