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सराहनीय / कुर्मी समाज पहला जहां 18 से अधिक उम्र के हर व्यक्ति को अध्यक्ष चुनने का अधिकार, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने बदली 116 साल पुरानी परंपरा

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दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:21 AM IST

रायपुर. गौरव शर्मा | मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज में अब 18 साल के युवा भी प्रदेश अध्यक्ष और राज प्रधान चुनने के लिए वोट कर सकेंगे। इसके लिए समाज ने अपनी 116 साल पुरानी परंपरा को बदल दिया है। अब प्रदेश अध्यक्ष और राज प्रधान पंचायत चुनाव की तर्ज पर चुने जाएंगे। इसके लिए गांव-गांव में मतपेटियां भेजी जाएंगी। समाज के जिन युवाओं के पास वोटर आईडी कार्ड है, वे इसमें वोट कर सकेंगे। युवाओं की समाज में भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। 
दरअसल, प्रदेश में मनवा कुर्मी समाज के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। समाज के दावे के मुताबिक उनकी आबादी 20 लाख के करीब है। हर 3 साल में समाज के नए प्रदेश अध्यक्ष और राज प्रधान चुने जाते हैं। अब तक यह चुनाव किसी एक स्थान पर होता रहा है। जिसमें आसपास के वरिष्ठ लोग तो शामिल होते हैं पर दूर-दराज के लोग, खासतौर पर युवा नहीं आ पाते थे। ऐसे में 20% वोटिंग ही हो पाती हैं। समाज का कहना है कि नई व्यवस्था में 100% वोटिंग होगी। नए सिस्टम के तहत चुनाव की तैयारियां कैसी होंगी, इसे लेकर हाल ही में समाज की कोर कमेटी की बैठक नरदहा में हुई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी इसमें शामिल हुए। वे 27 साल से समाज के संरक्षक हैं। हर व्यक्ति को मत का अधिकार देने वाले इस प्रस्ताव का उन्होंने भी समर्थन किया।  

अध्यक्ष, राजप्रधान का चुनाव अब एक ही दिन
समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामकुमार सिरमौर ने बताया कि बैठक में सभी से सुझाव लिए गए। इसके बाद यह तय किया गया कि प्रदेश अध्यक्ष और राज प्रधान का चुनाव एक ही दिन होगा। समाज के सदस्यों को वोटर आईडी कार्ड साथ लेकर मतदान केंद्र जाना होगा। शांतिपूर्वक चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी ग्राम प्रमुखों और क्षेत्र प्रमुखों की होगा। मतदान के बाद स्थानीय स्तर पर वोटों की काउंटिंग होगी। इसके बाद ये आंकड़े चुनाव कराने वाली समिति को भेजे जाएंगे। चुनाव समिति नए प्रदेश अध्यक्ष और राज प्रधानों की घोषणा करेगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला 100% मतदान कराने के मकसद से लिया गया है।

फिजूलखर्ची, अव्यवस्था... ये भी बड़ी वजहें
समाज की चुनाव व्यवस्था बदलने के पीछे और भी कुछ बड़ी वजहें हैं। दरअसल, प्रदेश में समाज के 10 राज हैं। चुनाव कराने की जिम्मेदारी हर बार अलग-अलग राज को दी जाती है। हर 3 साल में होने वाले इस चुनाव में 20% लोग ही वोट डालते हों, पर तब भी लोगों का आंकड़ा डेढ़ से 2 लाख के करीब हो जाता है। इतने ज्यादा लोगों के लिए एक जगह व्यवस्था करना काफी खर्चीला भी हो रहा था और व्यवस्था बनाने में समाज को बहुत सी परेशानियां भी आ रही थीं। कई बार विवाद जैसी स्थितियां भी बनी। इन वजहों को देखते हुए भी चुनाव प्रणाली बदलने का फैसला लिया गया है।

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