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सीएम ने महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं का हौसला बढ़ाया:मजदूरी छोड़ महिलाओं ने शुरू किया वनौषधियों का व्यवसाय, 20 लाख का मुनाफा कमाया

रायपुर2 महीने पहले
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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं की सफलता की कहानी सुनकर ताली बजाकर उनका हौसला बढ़ाया। महिलाएं जो कभी मजदूरी करती थी, अब वन धन विकास केन्द्र के माध्यम से वनौषधियों का कारोबार कर रही हैं। इसमें वह अच्छा-खासा मुनाफा भी कमा रही है।

कोरबा के पाली तहसील के ग्राम डोंगानाला की महिलाओं ने हरिबोल स्व-सहायता समूह बनाकर वन औषधि प्रसंस्करण केन्द्र में दवाई बनाने का काम शुरू किया है। आज यह समूह 44 लाख का कारोबार कर 20 लाख का मुनाफा कमा रहा है। इस समूह की प्रमुख सरोज पटेल ने अपनी सफलता की जानकारी सीएम भूपेश बघेल से शेयर की। सरोज पटेल और उनके समूह की दूसरी महिलाओं ने बताया कि इस कारोबार को अगले साल तक ढाई करोड़ रूपए प्रतिवर्ष के टर्न ओवर तक बढ़ाने की योजना भी बना चुका है।

सरोज ने बताया कि महिलाएं जंगलों से जड़ी-बूटी इकट्ठा करके 18 किस्म की दवाइयां बना रहीं हैं। सरोज ने बताया कि उनके समूह में 12 महिला हैं वर्ष 2020-21 में समूह की महिलाओं ने 44 लाख रूपए का कारोबार किया, जिसमें से 20 लाख रूपए की शुद्ध आवक हुई है। सरोज ने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि पहले महिलाओं द्वारा गांव में मजदूरी काम करके एक महीने में केवल 500 से 600 रूपए तक आमदनी हो पाती थी। वर्तमान में कच्चे वनौषधि संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विक्रय कर प्रत्येक महिला सदस्य को एक लाख 71 हजार रूपए प्रति वर्ष की आमदनी प्राप्त हो रही है।सरोज ने बताया कि 30 रूपए रोजी से शुरू कर आज 200 रूपए प्रतिदिन की मजदूरी सभी महिलाएं प्राप्त कर रहीं हैं।

दिव्यांग ललिता को गोठान ने दी ताकत, रोजगार भी दिया
कोरबा के ही ग्राम चिर्रा की दिव्यांग महिला ललिता राठिया की आप बीती भी प्रेरणादायक रही। उसने सीएम को बताया कि उसके दोनों पैर खराब हैं । इसके चलते पहले वह दुखी रहती थी। खाने-पीने तक के लिए मां-बाप पर ही आश्रित थी। लेकिन अब खुद कमा-खा रही हूं, और दूसरों को भी खिला-पिला सकती है। मैंने आज 35 और महिलाओं को अपने साथ जोड़कर रोजगार दिया है। मुख्यमंत्री ने ललिता उनकी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ललिता तथा उनकी समूह की महिलाओं को उनके प्रयासों के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के युग में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है। प्रदेश की सभी गौठानों को रूरल इंडस्ट्रियल पार्कों के रूप में स्थापित करना है। गौठान के माध्यम से सभी ग्रामीणों को जोड़कर रोजगार के नए अवसर प्रदान करना और लोगों को स्वावलंबी बनाना सरकार का उद्देश्य है।

गौठान से कौशल्या की किस्मत खुल गई
कुछ साल पहले तक कौशल्या बाई कंवर के परिवार की जैसी माली हालत थी, उसमें बकरी खरीदना भी बड़े सपने जैसा था। पति चरवाहे का काम करते हैं। सुराजी गांव योजना शुरु होने के बाद जब गांव में गौठान खुल गया तो परिवार की किस्मत भी खुल गई। कौशल्या वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने में जुट गई। खाद से 1 लाख 53 हजार की आमदनी उनके समूह को हुई। फिर मुर्गी-पालन शुरु किया। अंडे का उत्पादन भी करती है। इन दोनों उद्यमों से भी अच्छी-खासी कमाई हो रही है। अब वे दूसरों की भी मदद करने में सक्षम हो चुकी है।

बड़ा लड़का आईटीआई कर रहा है। कौशल्या ने भी सीएम को बताया कि आज न सिर्फ वे कमा रही हैं, बल्कि उनके पति ने सिर्फ गोबर इकट्ठा करके ही 9 हजार 400 रुपया कमा लिया है। कौशल्या कंवर ने बताया कि उनके समूह हरे कृष्ण स्व-सहायता समूह ने 1 लाख 90 हजार रूपए केंचुआ खाद की बिक्री की है। अण्डा उत्पादन से 15 हजार रूपए, केंचुआ के बिक्री से 24 हजार रूपए और 12 हजार रूपए की आय गमला बेचने से हुई है।

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