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लोकवाणी में सीएम ने की विकास की बात:भूपेश बघेल ने कहा- कम समय में ही प्रदेश में 5 नए जिले बनाए, नई परियोजना से पहले अधूरे को पूरा करने पर जोर

रायपुर10 दिन पहले
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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हर महीने के दूसरे रविवार को रेडियो वार्ता लोकवाणी के जरिए प्रदेश के लोगों से बात करते हैं। - Dainik Bhaskar
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हर महीने के दूसरे रविवार को रेडियो वार्ता लोकवाणी के जरिए प्रदेश के लोगों से बात करते हैं।

मासिक रेडियो वार्ता लोकवाणी में आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार की बुनियादी ढांचे के विकास के लिए शुरू हुई योजनाओं पर बात की। उन्होंने प्रशासनिक इकाई के रूप में जिलों को महत्व देते हुए कहा कि हमने कम समय में ही 5 नए जिले बनाए हैं। साथ ही जिला स्तर पर योजनाएं, कार्यक्रम और अभियान संचालित करने की खुली छूट दी है, ताकि स्थानीय जनता की अपेक्षा के अनुरूप काम करने में जिला प्रशासन अधिक सक्षम हो सके।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दुर्ग जिले में इसका असर देखने को मिला है। यहां की सिपकोना नहर के बारे में कहा जाता है कि यह एशिया की सबसे लंबी नहरों में शामिल है। वर्ष 2008 में इसे आधा-अधूरा छोड़ दिया गया। लाइनिंग, सफाई और मरम्मत पर ध्यान दिया जाता तो इस योजना में हुए निवेश का बहुत लाभ किसान भाई-बहनों को मिलता। दुर्ग जिला प्रशासन ने पहल करके सिपकोना नहर से 22 की जगह 51 गांवों को सिंचाई सुविधा देने की दिशा में काम शुरू किया। बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखण्ड के 7 गांवों में 1 हजार 259 हेक्टेयर और दुर्ग जिले के पाटन विकासखण्ड के 44 गांवों में 10 हजार 252 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा दी जाएगी। मुझे लगता है कि कम खर्च में ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलाने का यह बहुत अच्छा मॉडल है। इसमें सिंचाई विभाग के अलावा मनरेगा की मदद भी ली जा रही है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया सिपकोना नहर से अब 22 की जगह 21 गांवों को सिंचाई सुविधा मिल पाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया सिपकोना नहर से अब 22 की जगह 21 गांवों को सिंचाई सुविधा मिल पाएगी।

मुख्यमंत्री ने नंदनी माइंस क्षेत्र में जंगल विकसित करने की योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा दुर्ग शहर से 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित नंदनी में 2500 एकड़ की जमीन में पहले चूना पत्थर की खदान थी। बरसों से इस खदान में खनन गतिविधियां बंद हैं। जिला प्रशासन ने इस क्षेत्र में जंगल विकसित करने की कार्ययोजना बनाई है। यह दुर्ग-भिलाई के औद्योगिक प्रदूषण से निपटने में भी मदद करेगा और प्रदेश के पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी बल मिलेगा। इस क्षेत्र में 80 हजार से अधिक पौधे लगाने का काम शुरू किया गया है, जिससे बहुस्तरीय वन का विकास होगा। यहां घास भी लगाई जाएगी ताकि मवेशियों को अच्छी गुणवत्ता का चारा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा इस मानव निर्मित विशाल वन क्षेत्र में वन्यप्राणियों का बसेरा होगा तो समूचा अंचल वृहद ईको पर्यटन स्थल के रूप में आकर्षण का केन्द्र बनेगा।

चूना पत्थर की इस बंद पड़ी 2500 हेक्टेयर में फैली खदान को ही जंगल बनाने की तैयारी है।
चूना पत्थर की इस बंद पड़ी 2500 हेक्टेयर में फैली खदान को ही जंगल बनाने की तैयारी है।

नई परियोजना से पहले अधूरे को पूरा करने पर जोर

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के सिलसिले में मैंने निर्देश दिए थे। कहा था, सड़क, सिंचाई, बिजली या ऐसी किसी भी अधोसंरचना की बड़ी परियोजनाओं को हाथ में लेने के साथ ही, अधूरी पड़ी या किसी भी कारण से अनुपयोगी हो गई परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। इससे उस परियोजना में निवेश हो चुकी धनराशि का लाभ जनता को मिल सकेगा।

नालों के पुनरुद्धार को बताया संकट मोचक

मुख्यमंत्री ने अपनी फ्लैगशिप योजनाओं में शुमार नरवा, गरुवा, घुरवा अउ बाड़ी की भी बात की। मुख्यमंत्री ने कहा अभी तक लगभग 3 हजार 200 नालों में जरूरी सुधार कार्य किया जा चुका है। अगले साल करीब 11 हजार नालों को पुनर्जीवित करने की योजना पर हम युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रयासाें का असर जमीन पर भी दिखने लगा है। कई क्षेत्रों से भू-जल स्तर बढ़ने की सुखदायी खबरें आने लगी हैं। जलवायु परिवर्तन से सूखे की परिस्थितियां बनने की चेतावनी वैज्ञानिकों ने दी है, लेकिन मुझे विश्वास है कि नरवा विकास की हमारी तैयारी, हमें हर संकट से उबार लेगी।

अभी तक गोबर बेचने वालों को 100 करोड़ 82 लाख रुपए, महिला स्व-सहायता समूह को 21 करोड़ 42 लाख रुपए का भुगतान मिल चुका है।
अभी तक गोबर बेचने वालों को 100 करोड़ 82 लाख रुपए, महिला स्व-सहायता समूह को 21 करोड़ 42 लाख रुपए का भुगतान मिल चुका है।

गोबर से बरसे 100 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरुवा और घुरुवा को विकसित करने से नए रास्ते बनते चले गए और गोबर से धन बरसने लगा। गोधन न्याय योजना के 8 सितम्बर के आंकड़े से एक अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस योजना से क्या लाभ मिल रहा है। अभी तक गोबर बेचने वालों को 100 करोड़ 82 लाख रुपए, महिला स्व-सहायता समूह को 21 करोड़ 42 लाख रुपए तथा गौठान समितियों को 32 करोड़ 94 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। गोधन न्याय योजना से 1 लाख 77 हजार 437 पशुपालकों को लाभ मिला है। इनमें से 79 हजार 435 तो भूमिहीन हैं।

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