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ठेका देने पर विवाद:महालक्ष्मी मार्केट आरडीए ने बनाया, निगम ने पार्किंग बनाकर टेंडर किया तो भिड़ा प्राधिकरण- हमारी संपत्ति पर ठेका कैसे?

रायपुर​​​​​​​एक महीने पहले
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लंबे समय से पार्किंग की दिक्कत से जूझ रहे पंडरी मार्केट के लिए निगम ने महालक्ष्मी मार्केट के पास पार्किंग बनाई है। - Dainik Bhaskar
लंबे समय से पार्किंग की दिक्कत से जूझ रहे पंडरी मार्केट के लिए निगम ने महालक्ष्मी मार्केट के पास पार्किंग बनाई है।

पंडरी कपड़ा मार्केट आने वालों की पार्किंग की दिक्कत दूर करने के लिए नगर निगम ने दिवाली से पहले लगे हुए महालक्ष्मी मार्केट की सड़क से लगी दीवार गिराकर करीब 20 फीट अंदर की और छत्तीसगढ़ हाट से लगकर बड़ी पार्किंग डेवलप कर दी। निर्माण के बाद निगम ने जैसे ही पार्किंग का टेंडर जारी किया, रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने कड़ी आपत्ति कर दी। आरडीए के सीईओ ने निगम कमिश्नर को चिट्ठी लिखकर कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि प्रापर्टी उनके स्वामित्व की है, इसका व्यावसायिक उपयोग के लिए ठेका कैसे दे सकते हो?

उधर, निगम ने भी मोर्चा खोल दिया है और तर्क दिया कि पार्किंग आम लोगों तथा पंडरी के व्यापारियों के हित में बनाई गई है। जब निर्माण चल रहा था, तब तो आरडीए ने कुछ नहीं कहा। अब ठेका कर रहे हैं तो आपत्ति बेमानी है। काफी समय से पार्किंग की दिक्कत से जूझ रहे पंडरी मार्केट के लिए निगम ने ही प्लान किया और महालक्ष्मी मार्केट के पास रोड की जमीन चौड़ी कर वहां पार्किंग बनाई। निगम ने हाल में पार्किंग ठेका जारी किया तो आरडीए के नए सीईओ ऋतुराज रघुवंशी ने चिट्ठी लिखकर आपत्ति कर दी।

पूर्व सीईओ डा. अयाज तंबोली भी पहले इस पर आपत्ति कर चुके हैं, इसलिए निगम ने टेंडर रद्द कर दिया था। दोबारा टेंडर किया तो आरडीए के नए सीईओ ने पत्र में कहा कि महालक्ष्मी मार्केट को मेंटनेंस इत्यादि के लिए निगम को हैंडओवर किया गया है, लेकिन स्वामित्व आरडीए का ही है।

ऐसे में निगम यहां व्यावसायिक गतिविधि नहीं चला सकता। पार्किंग ठेके से निगम को आय होगी, जो जो आरडीए के दृष्टिकोण से असंगत है। निगम और आरडीए दोनों ही सरकारी एजेंसियां हैं, लेकिन अभी दोनों में खींचतान चल रही है। आरडीए ने पंडरी में पार्किंग को लेकर निगम को चिट्ठी लिखकर आपत्ति की, तो निगम ने भी आरडीए पर संपत्तिकर का 93 करोड़ का बकाया निकाल दिया है।

तब आपत्ति क्यों नहीं की?
निगम अफसरों का कहना है कि पार्किंग बनाने और महिलाओं की सुविधा के लिए यहां पिंक टायलेट बनाने को लेकर स्मार्ट सिटी और निगम ने आरडीए से एनओसी ली गई थी। मार्केट की दीवार पीछे करक सड़क चौड़ी की गई, तब आपत्ति नहीं आई। पार्किंग के संचालन के लिए टेंडर जरूरी है। ऐसे में ठेके पर आपत्ति उचित नहीं है। मार्केट आरडीए ने बनाया है लेकिन पार्किंग भी उसी बाजार के व्यापारियों के लिए बनी है।

मुझे ऐसी किसी चिट्ठी की जानकारी नहीं है। शायद कमिश्नर को मिली है, फिर भी आरडीए की आपत्ति बेमानी है। पार्किंग बनाने से पहले एनओसी ली गई थी।
एजाज ढेबर, महापौर रायपुर

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