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DMF के कलेक्टर फिर अध्यक्ष:केंद्र की जिद पर झुकी CG सरकार; प्रभारी मंत्री का दखल नहीं होगा, सांसदों को भी शासी परिषद में जगह

रायपुर18 दिन पहले
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जिले की खदानों की रायल्टी का 10 से 30 प्रतिशत हिस्सा इस DMF में आता है। इसको प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर खर्च किया जाना है। - Dainik Bhaskar
जिले की खदानों की रायल्टी का 10 से 30 प्रतिशत हिस्सा इस DMF में आता है। इसको प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर खर्च किया जाना है।

जिला खनिज न्यास (DMF) के विवाद में केंद्र सरकार की जिद के आगे छत्तीसगढ़ सरकार झुक गई है। सरकार ने DMF के अध्यक्ष पद से प्रभारी मंत्री को बाहर कर दिया है। अब तक पदेन सदस्य सचिव रहे कलेक्टर को अब अध्यक्ष बना दिया गया है। सांसदों को भी DMF के शासी परिषद में जगह मिल गई है।

राज्य सरकार ने खनिज न्यास की नियमावली में बदलाव को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया है। खनिज साधन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, सदस्य सचिव रहे कलेक्टर को अब DMF का अध्यक्ष बना दिया गया है। वहीं सांसदों को भी शासी परिषद का सदस्य बनाया गया है। जिले में एक से अधिक लोकसभा सीट होने पर सभी सांसद इसका हिस्सा होंगे। अगर कोई लोकसभा सीट एक से अधिक जिलों में आती है तो सांसद उन सभी जिलों की परिषद में शामिल होंगे। राज्य सभा के सांसदों को किसी एक जिले की शासी परिषद में रखा जाएगा। उन्हें खनिज साधन विभाग के सचिव को बताना होगा कि वे किस जिले की शाषी परिषद में रहना चाहते हैं।

इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच पिछले कई महीनों से विवाद चल रहा था। केन्द्रीय खनन मंत्रालय ने 23 अप्रैल 2021 को नियमों संशोधन करते हुए कलेक्टर को ही अध्यक्ष बनाने का फैसला किया है। विधायक व सांसदगण इसकी शासी परिषद में सदस्य होंगे। सरकार को इस पर आपत्ति थी। वनमंत्री मोहम्मद अकबर का कहना था कि DMF का गठन करने के लिए नियम बनाने का पूर्ण अधिकार राज्य सरकारों को है। इसके तहत छत्तीसगढ़ शासन ने जिले के प्रभारी मंत्री को अध्यक्ष नियुक्त करने का प्रावधान किया था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय खनन मंत्रालय को पत्र लिखा, लेकिन बात नहीं बनी। पिछले महीने केंद्रीय खनन मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कलेक्टर को ही DMF का अध्यक्ष बनाने का आग्रह किया था।

DMF पर केंद्र सरकार का झटका:केंद्रीय खान मंत्री ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र भेजकर DMF से प्रभारी मंत्रियों को हटाने को कहा, कलेक्टर को बनाना होगा शासी परिषद का प्रमुख

क्यों बना था यह DMF?
केंद्र सरकार के एक कानून से खनन प्रभावित जिलों में जिला खनिज न्यास का गठन हुआ था। मकसद था खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास और सुविधाओं की बहाली के लिए अलग से फंड की व्यवस्था करना। छत्तीसगढ़ में 22 दिसम्बर 2015 को इसे अधिसूचित किया गया। यहां सभी 28 जिलों में DMF का गठन हुआ है। इसके तहत जिले की खदानों की रायल्टी का 10 से 30 प्रतिशत हिस्सा इस फंड में आना था। इसको खर्च करने का अधिकार एक शाषी परिषद को था।

ऐसे बदली व्यवस्था, जिसपर टकराव हुआ?
2015 के नियम के मुताबिक जिला कलेक्टर न्यास का पदेन अध्यक्ष था। वह तीन विधायकों को भी नामित कर सकता था। उद्योगपतियों, किसानों और विभिन्न विभागों के अधिकारी इसकी शाषी परिषद में सदस्य थे। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने कलेक्टरों पर मनमानी का आरोप लगाया। कहा गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी कर इस फंड से गैर जरूरी सामान खरीदा जा रहा है। निर्माण हो रहा है। कांग्रेस सरकार आने पर फरवरी 2019 में जिलों के प्रभारी मंत्रियों को अध्यक्ष बना दिया गया। कलेक्टर सचिव बने और सभी विधायकों को पदेन सदस्य बना दिया गया। बाद में जिला पंचायत अध्यक्ष भी इसके सदस्य बना दिए गए।

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