जल्दी ही विदा हो जाएगा मानसून:राजस्थान से पीछे हटने लगा मानसूनी तंत्र, छत्तीसगढ़ की हवा में अभी बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी; कुछ दिन होती रहेगी बारिश

रायपुर2 महीने पहले
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अभी रायपुर के आसमान में हल्के बादल हैं। दिन का तापमान बढ़ा है। उमस है, लेकिन रात को ठंड बढ़ने लगी है। - Dainik Bhaskar
अभी रायपुर के आसमान में हल्के बादल हैं। दिन का तापमान बढ़ा है। उमस है, लेकिन रात को ठंड बढ़ने लगी है।

जून से शुरू हुआ मानसून का मौसम 30 सितंबर को आधिकारिक रूप से खत्म हो गया, लेकिन मानसून लौटा नहीं है। मानसून के पीछे हटने का अनुकूल माहौल बना हुआ है। संभावना जताई जा रही है कि जल्दी ही मानसून की विदाई शुरू हो जाएगी। इस बीच बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी ने बरसात की संभावना बनाए रखी है।

रायपुर मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास एक ऊपरी हवा का चक्रवाती घेरा बना हुआ है। इसके प्रभाव से प्रदेश में काफी मात्रा में नमी आ रही है। बुधवार को प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने के साथ गरज चमक के साथ छीटें पड़ने की संभावना है। प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ बिजली गिरने की भी संभावना बन रही है। बताया जा रहा है, मौसम की यह परिस्थिति कुछ और दिन बनी रह सकती है।

मौसम विज्ञानियों ने बताया, वायुमंडल के निचले हिस्से में प्रति चक्रवात बना हुआ है। हवा में नमी की मात्रा विभिन्न स्तर पर सार्थक रूप से कम हुई है। कई हिस्सों में कई दिनों से वर्षा में भी कमी देखने को मिली है।ऐसे में बुधवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई उत्तर पश्चिम भारत के राज्य पश्चिमी राजस्थान और उससे लगे गुजरात से प्रारंभ हो गई है। मानसून की विदाई की रेखा बीकानेर, जोधपुर, जालौर और भुज है। सामान्य तौर पर दक्षिण- पश्चिम मानसून के बिदाई 17 सितंबर से होती है। इस बार इसमें देर हुई है। अगले 3 से 4 दिनों में गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ भाग से मानसून पूरी तरह विदा हो जाएगा। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक मानसून की विदाई के लिए तीन परिस्थितियां जरूरी हैं। पहला, राजस्थान के ऊपर एक प्रति चक्रवात बनना चाहिए। दूसरा, उस उपखंड में लगातार 5 दिन तक वर्षा रुकी रहनी चाहिए। तीसरा, वातावरण में नमी के स्तर में सार्थक कमी होनी चाहिए। बताया जा रहा है, छत्तीसगढ़ में मानसून के पूरी तरह विदा होने में देर लगेगी। यहां मानसून के बाद की भी वर्षा होती है।

मानसून सीजन में 3 प्रतिशत कम बरसात

प्रदेश में एक जून से 30 सितम्बर तक 1108 मिली मीटर औसत बरसात दर्ज हुई है। इन चार महीनों में प्रदेश की सामान्य औसत वर्षा 1142 मिली मीटर मानी जाती है। इस बार की बरसात सामान्य से 3% कम है। प्रदेश के 4 जिले सरगुजा, जसपुर, रायगढ़ और कांकेर जिले में सामान्य से कम बरसात है। बाकी सभी जिलों में 19 प्रतिशत अधिक या 19 प्रतिशत कम के बीच रहे हैं। इसे सामान्य माना जाता है। प्रदेश में कुल वर्षा के दिनों की औसत संख्या 56.04 दिन रहा। सोमवार और मंगलवार को भी कई जिलाें में हल्की से मध्यम बरसात हुई है।

सितंबर की बरसात से प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने थे। शहरों-गांवों से सड़क संपर्क टूट गया था।
सितंबर की बरसात से प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने थे। शहरों-गांवों से सड़क संपर्क टूट गया था।

जून महीने में हुई सबसे ज्यादा बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक जून के महीने में सामान्य वर्षा 193.5 मिली मीटर है, जबकि प्रदेश में 244.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। यह सामान्य से 26% अधिक रहा। इस अवधि में 21 जिले अधिक एक्सेस तथा 6 जिले सामान्य से कम (deficient) की स्थिति में थे।

जुलाई तक 83 हो चुकी थी बरसात
जुलाई के महीने तक प्रदेश में 756 मिलीमीटर बरसात हो चुकी थी। सामान्य तौर पर इन दो महीनों में 569 मिमी बरसात होती रही है। अकेले जुलाई में 331.6मिमी वर्षा दर्ज की गई जो कि सामान्य से 83% रहा। तब तक 10 जिलों में बरसात सामान्य से अधिक और 17 जिले सामान्य से कम स्थिति में रहे।

अगस्त में कम हुई बरसात
अगस्त के महीने में प्रदेश में कुल वर्षा 797.5 मिली मीटर रही। सामान्य तौर पर इस महीने तक 933.2 मिमी बरसात होती रही है। केवल अगस्त महीने में सामान्य वर्षा 364 मिमी होती है, लेकिन इस बार केवल 221.5 मिमी पानी बरसा। यह सामान्य वर्षा का केवल 60.8% रहा। अगस्त तक प्रदेश में औसत सामान्य बरसात 15% कम रही। तब तक 1 जिले हैं एक्सेस, 14 जिले सामान्य तथा 12 जिले सामान्य से कम स्थिति में रहे।

अगस्त महीने में बरसात कम हुई तो धान के खेतों में ऐसी हालत बन गई थी।
अगस्त महीने में बरसात कम हुई तो धान के खेतों में ऐसी हालत बन गई थी।

सितंबर में कुछ दिनों तक भारी बरसात
सितंबर के महीने में कुल 310 मिलीमीटर वर्षा हुई है। वहीं सामान्य में 208.9 मिलीमीटर वर्षा होती रही है। जो सामान्य से 48.5% अधिक रहा। इस अवधि में 25 जिले सामान्य तथा 2 जिले सामान्य से कम वर्षा की स्थिति बने रहे। सितंबर के अंत तक केवल चार जिले सामान्य से कम की स्थिति में रहे।

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