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कमल विहार 10 साल बाद मिल सकता है निगम को:500 से ज्यादा लोग बसे, उनकी सुविधा के लिए एमआईसी में आएगा प्रस्ताव

रायपुर6 दिन पहले
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रायपुर की सबसे चर्चित टाउनशिप स्कीम कमल विहार हालांकि रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की एक दशक से ज्यादा पुराना है, लेकिन अब वहां लगभग 500 मकान बन चुके हैं और लोगों को मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, सफाई, पानी-बिजली के मेंटेनेंस में परेशानी होने लगी है, इसलिए इसे नगर निगम को हैंडओवर करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। यह प्रस्ताव खुद आरडीए ने दिया है। नगर निगम 9 जून को महापौर परिषद (एमआईसी) की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करने जा रहा है। यह हैंडओवर फाइनल हुआ तो राजधानी के लिए बड़ा फैसला होगा ही, कमल विहार के लोगों की दिक्कतें भी दूर होंगी।

करीब 1600 एकड़ में तैयार कमल विहार में दो हजार से अधिक आ‌वासीय और व्यावसायिक प्लाट हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने यहां घर बनाने शुरू कर दिए हैं। बसाहट भी तेजी से बढ़ी है। अस्पताल, स्कूल सहित कई व्यावसायिक संस्थानें भी खुल चुकी हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसलिए रायपुर विकास प्राधिकरण ने कालोनी की देखरेख की जिम्मेदारी निगम को सौंपनी का फैसला किया है। इसका प्रस्ताव नगर निगम को भेजा गया है। निगम के नगर निवेश विभाग के अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने बताया कि प्रस्ताव के आधार पर महापौर परिषद की बैठक में यह एजेंडा प्रस्तुत किया जाएगा। महापौर और सारे एमआईसी सदस्यों की अनुमति के बाद यदि प्रस्ताव पास हुआ तो बिजली, पानी, नाली, सड़क इत्यादि सुविधाओं के लिए लोगों को आरडीए के बजाए निगम से संपर्क करना होगा। अभी आरडीए ही मेंटनेंस कर रहा है। आरडीए के अफसरों का कहना है कि कमल विहार में बसाहट शुरू होने के बाद यहां निर्माण इत्यादि का नक्शा निगम ही पास कर रहा है। आरडीए एक डेवलपमेंट एजेंसी है। मेंटनेंस स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी है। नक्शा इत्यादि स्वीकृत करने से निगम को आय हो रही है। संपत्तिकर भी वसूल रहे हैं। एमआईसी की बैठक में इस एक मुद्दे के अलावा पेंशन, नामकरण सहित कुछ अन्य विभागों के प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी।

टैक्स बिरगांव लेता है, मेंटनेंस करता है आरडीए
आरडीए अफसरों का कहना है कि कमल विहार की तरह ट्रांसपोर्ट नगर को भी बिरगांव नगर निगम को हैंडओवर करने का प्रस्ताव दिया गया है। बिरगांव निगम यहां लोगों से संपत्तिकर वसूलता है। विभिन्न तरह के टैक्स लेता है। जब नाली, सड़क, बिजली इत्यादि की परेशानी आती है तो निगम कहता है कि कालोनी आरडीए की है तो वे ही करें। ट्रांसपोर्ट नगर को भी हम स्थानीय निकाय को हैंडओवर करेंगे।

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