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लॉकडाउन का स्टार्टअप पर असर / पांच साल में चार हजार से ज्यादा आइडिया मिले, सिर्फ 383 आइडिया पर ही शुरू कर पाए काम, इनमें से भी 80% की डिमांड घटी, 30 फीसदी बंद होने की स्थिति में

लाकडाउन में खाली पड़ा आईएनसी 36 इंक्यूबेटर लाकडाउन में खाली पड़ा आईएनसी 36 इंक्यूबेटर
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लाकडाउन में खाली पड़ा आईएनसी 36 इंक्यूबेटरलाकडाउन में खाली पड़ा आईएनसी 36 इंक्यूबेटर

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 07:06 AM IST

रायपुर. अमिताभ अरुण दुबे। केंद्र से लेकर राज्य शासन की एजेंसियां अब लॉकडाउन में स्टार्टअप पर क्या असर पड़ा इसकी पड़ताल करने में जुटी हुई है। ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है क्योंकि कोरोना काल में स्टार्टअप को भविष्य का कारोबार माना जा रहा है। यानी भविष्य में कारोबार जिस रूप में शक्ल बदलने वाला है वो काफी हद तक स्टार्टअप जैसा ही होगा। लेकिन सरकारी एजेंसियों के सर्वे ने बीते पांच साल में स्टार्टअप की जमीनी सच्चाई खोलकर रख दी है। हालात ऐसे हैं कि बहुत सारे स्टार्टअप अब वजूद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। युवा उद्यमी भी एक बिजनेस पर स्थिर नहीं रह पा रहे हैं, काम चला नहीं तो दूसरा पकड़ लिया वो भी नहीं चला तो कोई और काम करने लगे हैं। 
तालाबंदी में अमेरिका जैसे देशों में स्टार्टअप चलाने वाले युवा उद्यमियों का कारोबार बंद हो गया है। अब देश में नए काम को चुनने के लिए दिमाग खपा रहे हैं। दरअसल, राज्य में पांच साल पहले 4 हजार से ज्यादा स्टार्ट अप आइडियाज युवा उद्यमियों से मंगवाए गए। इनमें से अब तक 383 स्टार्टअप आईएनसी-36 इंक्यूबेटर के जरिए चुने गए। करोड़ों रुपए केवल सेमिनार और स्टार्टअप के लिए युवा उद्यमियों को सलाह मशविरा देने के नाम पर खर्च कर दिए गए। स्टार्टअप के जरिए आईआईटी, आईआईएम जैसे बड़े संस्थानों से निकलने के बाद छत्तीसगढ़ के नौजवान अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में अपने प्रोडक्ट का बिजनेस कर रहे हैं। कोरोना की मार की वजह से अमेरिका में बिजनेस कर रहे स्टार्टअप को भारी धक्का लगा है क्योंकि वहां के हालात पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा खराब हैं। 
2 हजार से ज्यादा युवाओं के सामने रोजगार बचाने की जद्दोजहद 
हालात ऐसे हैं कि कोरोना संकट के कारण रोजगार से लगे दो हजार से ज्यादा युवाओं के सामने अपना काम बचाने का संकट है। एक लाख रुपए महीना से दस पंद्रह लाख रुपए प्रतिमाह कमाने वाले स्टार्टअप अपने वजूद को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। प्रदेश में फिलहाल 383 स्टार्टअप चल रहे हैं। इनमें से करीब 20 फीसदी स्टार्टअप ऐसे हैं जो संकट के इस दौर में भी औसत कमाई कर पा रहे हैं। जबकि 80 फीसदी मांग में कमी के कारण अब मुश्किलों से जूझ रहे हैं। राज्य में 383 स्टार्टअप के जरिए करीब दो हजार युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से रोजगार मिल रहा है। करीब 707 युवा प्रत्यक्ष और करीब 1090 अप्रत्यक्ष तरीके से रोजगार से लगे हैं।
लग्जरी बिजनेस पर सर्वाधिक असर 
लॉकडाउन में स्टार्टअप की डिमांड में आई कमी इस बात की ओर भी इशारा है कि हमें अपने तरीकों में बड़े बदलाव करने होंगे। ऑनलाइन बिजनेस भी सर्वाइव तब ही कर पाएंगे जबकि वो सोशल डिस्टेंसिंग का प्लान करें। युवा उद्यमियों को अब इनोवेटिव अप्रोच को भी नेक्स्ट लेवल पर ले जाना होगा। डिमांड में 80 फीसदी तक की कमी आना या 43 फीसदी बिजनेस ऑपरेशन सस्पेंड होना ये बताता है कि बेशक हमारे तरीके नए तो थे लेकिन वो इस वक्त की जरूरत को पूरा नहीं कर पाए। 
सर्वे में उजागर हुई लॉकडाउन से स्टार्टअप को नुकसान की जानकारी 
डीबी स्टार को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक राज्य में सरकारी एजेंसियों द्वारा स्टार्टअप के जरिए बिजनेस करने वाले युवा उद्यमियों के बीच सर्वे भी करवाया जा रहा है। जिसमें उनसे लॉकडाउन के दौरान स्टार्टअप बिजनेस के हालात के बारे में पूछा जा रहा है। अभी तक सरकारी एजेंसियां सत्तर से ज्यादा युवा उद्यमियों से संपर्क कर पाई हैं। उनमें से 43 फीसदी ने अपने स्टार्टअप बंद कर दिए हैं, क्योंकि नौकरी पर रखे स्टाफ की सैलरी की तक नहीं निकाल पा रहे हैं।
हॉबी क्लास, ऑनलाइन सब्जी सेनिटाइजेशन हर तरह का काम बदला 
डीबी स्टार को मिली सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक विदेश में एजुकेशन जैसे फील्ड में स्टार्टअप चला रहे युवाओं की कमाई घटकर जीरो पर आ गई। इनमें से कुछ का साढ़े तीन लाख रुपए से पंद्रह बीस लाख महीना तक का टर्नओवर था। चूंकि स्टार्टअप बिजनेस से जुड़ा है, इसलिए शहर के युवा उद्यमियों ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि पहले वो ऑनलाइन योगा जिम ट्रेनिंग दे रहे थे, लॉकडाउन में ये काम भी खास नहीं चला तो इसको हॉबी क्लास के तौर पर बदल दिया। एजुकेशन, लांड्री बिजनेस करने वाले सेनिटाइजेशन की फील्ड में उतर गए। 
मायूस ऐसे कि सर्वे में भी नहीं ले रहे युवा उद्यमी रुचि 
स्टार्टअप की जमीनी पड़ताल के लिए किए जा रहे सर्वे में उद्योग विभाग के डिजिटल सर्वे में केवल 75 उद्यमियों ने जानकारी दी है। जबकि आईएनसी 36 इंक्यूबेटर के सर्वे में केवल पचास से ज्यादा लोगों ने ही हिस्सा लिया। लॉकडाउन के कारण बिजनेस में आया डाउनफॉल इसकी अहम वजह बताया जा रहा है। हाल ही में केंद्र द्वारा 20 लाख करोड़ के पैकेज से युवाओं में थोड़ी उम्मीद जगी है। लेकिन बहुत से इस राहत का कैसे फायदा उठा पाएंगे इसको लेकर फिक्रमंद हैं। कई युवा उद्यमी अब चल रहे कामों के बीच उन कामों को लेकर प्लानिंग कर रहे हैं जो भविष्य के बाजार की जरूरतों को पूरा करें। युवा उद्यमी हेल्थ सेक्टर के अलावा सेफ ट्रांसपोर्ट और हाइजिन सेनिटाइजेशन, एजुटेक और एग्री टेक में नए तरीके भी खोज रहे हैं।
एक्सपर्ट व्यू
आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर प्रोफेसर रजत मूना के मुताबिक लॉकडाउन में स्टार्टअप की डिमांड में आई कमी इस बात की ओर भी इशारा है कि हमें अपने तरीकों में बड़े बदलाव करने होंगे। अॉनलाइन बिजनेस भी सर्वाइव तब ही कर पाएंगे जबकि वो सोशल डिस्टेसिंग का प्लान करें। युवा उद्यमियों को अब इनोवेटिव अप्रोच को भी नेक्स्ट लेवल पर ले जाना होगा। डिमांड में 80 फीसदी तक की कमी आना या 43 फीसदी बिजनेस ऑपरेशन सस्पेंड होना ये बताता है कि बेशक हमारे तरीके नए तो थे लेकिन वो इस वक्त की जरूरत को पूरा नहीं कर पाए। भविष्य में स्टार्टअप के लिए बेहतर अवसर और संभावनाएं भी हैं। बशर्ते कि तरीका अत्याधुनिक होना चाहिए।

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