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मई में रोजाना औसतन 12 मिमी वाष्पीकरण, अभी 8.5 मिमी:मई में नहीं सूखे नदी-तालाब क्योंकि गर्मी कम होने से वाष्पीकरण भी घटा

रायपुर2 महीने पहले
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राजधानी में पिछले सप्ताहभर से दिन का तापमान काफी कम होने के कारण हवा में वाष्पीकरण का मात्रा औसत से बहुत कम हुआ है। मई के पहले पखवाड़े में दिन का तापमान आमतौर पर 42 डिग्री से ऊपर रहता है। अधिकतम 46 और 47 डिग्री तक पहुंच जाता है। इस वजह से इस पूरे महीने में वाष्पीकरण की औसत मात्रा 12 से 13 मिमी प्रतिदिन रहती है। इस समय यह 8.5 मिमी के आसपास है।

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि वाष्पीकरण में कमी का सीधा अर्थ यह है कि नदी-तालाबों या अन्य जलस्त्रोतों में पानी कम होने की दर कम होना है। मौसम विज्ञानियों का दावा है कि इससे बारिश पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मानसून 98 प्रतिशत रहने के आसार हैं। गर्मी के दिनों में एक-दो दिन तापमान में कमी की वजह से वाष्पीकरण कम होना सामान्य बात है। इससे बहुत अधिक फर्क भी नहीं पड़ता, लेकिन लगातार सप्ताहभर या उससे भी अधिक समय तक वाष्पीकरण में कमी से थोड़ा असर जलस्रोतों पर जरूर दिखाई देता है। मौसम विभाग के 29 अप्रैल से 5 मई तक के डेटा के अनुसार इस दौरान सतह पर धूप पड़ने की अवधि भी कम है। इसका असर भी वाष्पीकरण पर पड़ता है। इिस समय सूर्योदय सुबह साढ़े पांच बजे हो रहा है और सूर्यास्त का समय साढ़े छह बजे हो रहा है। लिहाजा रोज 13 घंटे सूर्य की रोशनी पहुंचनी चाहिए, लेकिन इस समय सन साइन (सूर्य की रोशनी की अवधि) टाइम औसत 8.6 घंटे है।

लेकिन इस मौसम का मानसून पर कोई असर नहीं
लालपुर मौसम केंद्र के मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने कहा कि अप्रैल में इस साल अपेक्षाकृत कम गर्मी पड़ी है। मई में भी अब तक ज्यादा गर्मी नहीं महसूस हुई है। अभी पूरा महीना बाकी है। मानसून किसी स्थान विशेष पर निर्भर नहीं करता। यह लोकल नहीं है, बल्कि बंगाल की खाड़ी में उठने वाले तूफान के कारण समुद्र से नमी मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ती है और बारिश कराती है। इसलिए एक प्रदेश या एक शहर में कम गर्मी की वजह से मानसून पर असर होने के संबंध में कोई अध्ययन नहीं है। मौसम विभाग ने इस साल 98 प्रतिशत बारिश की संभावना जताई है। यह भी पूरे देश के हिसाब से है। मई में मौसम विभाग एक और पूर्वानुमान जारी करेगा। इसमें चिन्हिंत जगहों‌ के संबंध में भविष्यवाणी की जा सकेगी।

पानी की कमी नहीं महसूस होती
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि तेज धूप का नदी-तालाबों, कुओं में प्रत्यक्ष असर होता है। इससे वाष्पीकरण बढ़ जाता है और जलस्त्रोत जल्द सूखने लगते हैं। इसके अलावा वाष्पीकरण का असर इंसान और प्राणियों के शरीर पर भी तेजी से पड़ता है। तेज धूप और ज्यादा वाष्पीकरण से शरीर से पानी भी तेजी से निकलने लगता है और वह तेजी से सूखता है। जलस्त्रोतों में जैसे पानी की कमी होने लगती है वैसे ही शरीर में भी पानी की कमी होने लगती है। इसी वजह से गर्मी के दिनों में लोगों में डीहाईड्रेशन की शिकायतें बढ़ जाती हैं। इस साल मई राहत देने वाला है।

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