कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया खत्म:तीन इंजीनियरिंग कॉलेजों में एक भी एडमिशन नहीं, छह संस्थानों को दस फीसदी छात्र मिले

रायपुर2 महीने पहले
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इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या इस बार कम हुई। आने वाले वर्षों में भी कुछ और कॉलेज कम हो सकते हैं। वह इसलिए क्योंकि, इस बार इंजीनियरिंग के 9 कॉलेजों में दाखिले को लेकर स्थिति अच्छी नहीं रही। प्रवेश के मामले में तीन इंजीनियरिंग कॉलेजों का खाता नहीं खुला, यानी यहां एक भी छात्र ने एडमिशन नहीं लिया। एक संस्थान में 240 सीटों में से सिर्फ 4 में प्रवेश हुए हैं। जबकि पांच कॉलेजों में 10 फीसदी तक दाखिले हुए हैं।

शिक्षा सत्र 2021-22 के अनुसार इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया मंगलवार, 30 नवंबर को खत्म हो गई। विभिन्न चरणों की काउंसिलिंग के बाद भी 6458 सीटें खाली रह गई। राज्य में 33 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। यहां 11291 सीटें हैं। आखिरी चरण की काउंसिलिंग तक 4833 सीटों ही भरी। यानी 42.80 प्रतिशत प्रवेश हुए। इंजीनियरिंग में प्रवेश को लेकर शुरुआत से ही यह स्थिति बनी थी कि इस बार बड़ी संख्या में सीटें खाली रह सकती है, क्योंकि इंजीनियरिंग की उपलब्ध सीटों से भी कम छात्र प्री इंजीनियरिंग टेस्ट में शामिल हुए थे। दो-तीन चरणों की काउंसिलिंग के बाद भी जब सीटें खाली रह गई, तब सीटें भरने के लिए संस्थावार काउंसिलिंग बुलाई गई। लेकिन इसमें एडमिशन कम हुई।

अगली बार फिर कम हो सकती है सीटें
इंजीनियरिंग में प्रवेश को लेकर स्थिति अच्छी नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कॉलेज बंद हुए हैं, सीटें कम हुई। इस बार इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या कम नहीं हुई। 33 कॉलेजों में ही प्रवेश हुए, लेकिन 730 सीटें क हुई थी। इस बार भी कुछ इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश कम हुए हैं इसलिए अगली बार सीटों की संख्या कम हो सकती है।

गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, जैसे रायपुर, बिलासपुर व जगदलपुर में शत प्रतिशत प्रवेश हुए हैं। इसके अलावा कुछ प्राइवेट कॉलेजों में भी प्रवेश को लेकर स्थिति अच्छी रही।

तकनीकी कोर्स की स्थिति अच्छी नहीं : इंजीनियरिंग के अलावा अन्य तकनीकी कोर्स जैसे पॉलिटेक्निक, एमसीए, एमबीए में प्रवेश कम हुए हैं। पॉलिटेक्निक की तो बड़ी संख्या में सीटें खाली रही। राज्य में पॉलिटेक्निक की 7870 सीटें हैं। इसमें से आधी सीटें भी नहीं भरी। डी.फार्मेसी की 2741 सीटें हैं। इसमें से अधिकांश सीटों में दाखिले हुए। जानकारों ने बताया कि पॉलिटेक्निक की कई सरकारी कॉलेजों में भी सीटें खाली रही।

सिविल व मैकेनिकल की पूछपरख हुई कम
एक वह भी दौर था, जब इंजीनियरिंग में मैकेनिकल व सिविल की पूछपरख ज्यादा थी। इन ब्रांच में प्रवेश के लिए होड़ मची रहती थी। लेकिन अब स्थिति बदली है। कंप्यूटर साइंस यानी सीए की डिमांड बढ़ी है। कंप्यूटर साइंस व इससे जुड़े ब्रांच जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा एनालिटिक्स समेत अन्य में प्रवेश ज्यादा हुई हैं। इन ब्रांच की 80 प्रतिशत से अधिक सीटों में प्रवेश हुए हैं। माइनिंग इंजीनियरिंग की भी 75 प्रतिशत सीटें भरी है। जबकि सिविल की 2010 सीटों में से 739 यानी 36.77 प्रतिशत एडमिशन हुए। मैकेनिकल की 1988 सीटें हैं। इसमें से 440 सीटों भरी, यानी 22.13 प्रतिशत प्रवेश हुए।

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